बिजनेस स्टैंडर्ड - गलत कॉल
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गलत कॉल

संपादकीय /  January 17, 2018

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने अंतरराष्ट्रीय कॉल टर्मिनेशन की दर में 43 फीसदी की कटौती की है। यह व्यवस्था आगामी 1 फरवरी से प्रभावी होगी। इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। ट्राई ने इन दरों को 53 पैसे प्रति मिनट से घटाकर 30 पैसे प्रति मिनट करने का निर्णय लिया है और इस बारे में उसकी दलील यह है कि ऐसा करने से अनधिकृत बाजार (ग्रे मार्केट) का मनमानापन खत्म किया जा सकता है। उसका कहना है कि अनधिकृत बाजार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रहा है। प्रथम दृष्टïया तो सस्ती अंतरराष्ट्रीय इनकमिंग कॉल उपभोक्ताओं की दृष्टिï से बेहतर प्रतीत हो सकती हैं क्योंकि यह ट्राई के लक्ष्यों में शामिल है लेकिन हकीकत यह है कि यह दलील काफी कमजोर है। पहली बात तो यह कि यह कटौती ऐसे वक्त पर आई है जबकि वॉयस कॉल बहुत तेजी से इंटरनेट की मदद से की जाने लगी हैं। इसमे स्काइप और व्हाट्स ऐप जैसे ऐप्लीकेशन मददगार हैं। इन ऐप के साथ भी सुरक्षा जोखिम जुड़े हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि दरों में कटौती करते समय ग्रे मार्केट की चुनौती का जिक करना व्यावहारिक नहीं है। इन ऐप में भी उतना ही जोखिम है। 

 
निश्चित तौर पर यह दलील दी जा सकती है कि अंतरराष्ट्रीय टर्मिनेशन शुल्क में भारी कटौती होने से विधिक तरीके से की जाने वाली इनकमिंग कॉल में इजाफा हो सकता है। इससे इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल का अनुपात सुधर सकता है। यह अनुपात वर्ष 2011 के 1:5 से बिगड़कर 1:20 तक पहुंच चुका है। परंतु यह बात भी ध्यान देने लायक है कि यह गिरावट उस वक्त भी हुई जबकि भारतीय टर्मिनेशन शुल्क दुनिया में सबसे कम-53 पैसे प्रति मिनट(1 फरवरी से पहले) रह गया। दूसरी ओर अमेरिका के लिए यह 1.01 रुपये प्रति मिनट, ओमान के लिए 15.44 रुपये प्रति मिनट और संयुक्त अरब अमीरात के लिए 8.36 रुपये प्रति मिनट है। इस लिहाज से देखा जाए तो यह मानने की वजह नहीं है कि इससे इनकमिंग ट्रैफिक में इजाफा होगा। वहीं दूसरी ओर दूरसंचार सेवा प्रदाता जो पहले ही तनाव में हैं, उनका तनाव और बढ़ गया है। उनमें से अधिकांश ने इस कदम का विरोध किया है। ट्राई द्वारा घरेलू टर्मिनेशन शुल्क को गत अक्टूबर में 14 पैसे प्रति मिनट से घटाकर 6 पैसे प्रति मिनट करने के बाद से इस क्षेत्र का राजस्व पहले ही काफी कम हो चुका है। यह वह शुल्क होता है जो एक सेवा प्रदाता दूसरे सेवा प्रदाता को चुकाता है जब उसके नेटवर्क पर कॉल खत्म होती है। ट्राई के उस कदम ने नई कंपनियों को फायदा पहुंचाया जबकि पुरानी कंपनियों को इससे नुकसान उठाना पड़ा। कुछ ही वक्त बाद अब अंतरराष्ट्रीय टर्मिनेशन शुल्क को लेकर यह निर्णय लिया गया। इससे शायद ही कोई मदद मिले। 
 
मोटे अनुमान के मुताबिक दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को नई दरें प्रभावी होने के बाद एक साल में 2,000 करोड़ रुपये से 5,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। इस उद्योग की सालाना अनुमानित आय 2.4 लाख करोड़ रुपये है जबकि इसका कर्ज इससे लगभग दोगुना यानी 4.7 लाख करोड़ रुपये है। ऐसे में यह आंकड़ा भी काफी मायने रखता है। रिलायंस जियो ने आकर प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ा दी है। सेवा प्रदाताओं का कमजोर राजस्व इस दलील का एक ही पहलू है। यह कटौती जीएसटी के कारण सरकार के राजस्व पर भी असर डालेगी। वित्त मंत्रालय पहले ही राजकोषीय घाटे को संभालने में लगा है और यह कदम उसे और मुश्किल में डालेगा। लब्बोलुआब यह कि इंटरनैशनल कॉल टर्मिनेशनल शुल्क में भारी कटौती के पक्ष में दी जाने वाली दलील कमजोर हैं। ट्राई को समय रहते यह फैसला बदलना चाहिए। यही बेहतर होगा। 
Keyword: telecom, दूरसंचार trai,,
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