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मारुति सुजूकी में जमकर मुनाफावसूली कर रहे फंड

चंदन किशोर कांत / मुंबई 01 16, 2018

भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजूकी का शेयर मुनाफावसूली के लिहाज से फंड प्रबंधकों के रडार पर बना हुआ है। कंपनी के शेयर में 2017 के दौरान 80 फीसदी की भारी तेजी ने फंड प्रबंधकों की बेचैनी बढ़ा दी और उन्हें इस शेयर में लगातार मुनाफावसूली के लिए प्रोत्साहित किया है।  इस वित्त वर्ष में अब तक फंड प्रबंधकों ने मारुति सुजूकी के लगभग 36 लाख शेयर बेचे हैं और 30 अरब रुपये की पूंजी हासिल की है। इन प्रबंधकों का कहना है कि वे अपने उचित मूल्य से ऊपर के स्तर पर इस शेयर में बिकवाली बरकरार रखेंगे।
 
वर्ष 2011 में कंपनी की गुजरात योजना का विरोध कर चुके एक वरिष्ठï मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) ने कहा, 'कंपनी को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है। ताजा बिकवाली को किसी तरह की चिंता से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह वाहन कंपनियों में बाजार दिग्गज है और आज भी पोर्टफोलियो के लिहाज से मुख्य होल्डिंग्स में शुमार है। लेकिन दबाव से जूझ रहे प्रीमियम बाजार को लेकर है। मुझे संदेह है कि यदि बिकवाली बनी रही तो यह दबाव बरकरार रह सकता है।' इसलिए यह सवाल उठता है कि क्या फंड प्रबंधक मारुति सुजूकी के लिए मूल्यांकन स्तर को सहज मान रहे हैं? उनके अनुसार, नकदी से संपन्न तेजी के बाजार में उचित मूल्यांकन का आकलन करना कठिन कार्य है।
 
फिलहाल टाटा मोटर्स को ज्यादा पसंद कर रहे एक वरिष्ठï फंड प्रबंधक ने कहा, 'जब मारुति के शेयर ने 2017 के दौरान पहली बार 6,000 का स्तर पार किया था, मैंने आंशिक रूप से बिकवाली की और कई अन्य प्रतिस्पर्धियों ने भी ऐसा ही किया। लेकिन इस शेयर में तेजी का सिलसिला बरकरार रहा। मेरा सोचा था कि मारुति फिर से 8500 के आसपास आएगा तो मैं इसे खरीदूंगा। तब तक हमने मुनाफावसूली का विचार नहीं किया था।' फंड प्रबंधकों में मारुति को लेकर बढ़ती बेचैनी का अंदाजा इस तथ्य से भी लगाया जा सकता है कि उन्हेंाने दिसंबर के दौरान इस शेयर में भारी बिकवाली की। कई वर्षों में पहली बार फंड प्रबंधकों ने सिर्फ एक महीने के अंदर किसी कार कंपनी के 10 लाख से अधिक शेयर बेचे, क्योंकि यह शेयर तेजी से 10,000 रुपये के स्तर की ओर बढ़ रहा था। जब बिजनेस स्टैंडर्ड ने यह पूछा कि क्या यह सुझाव के तौर पर दी गई कॉल थी तो फंड प्रबंधकों ने इससे इनकार कर दिया। पिछले साल दिसंबर के अंत में मारुति सुजूकी में म्युचुअल फंडों की इक्विटी भागीदारी 125 अरब रुपये पर थी जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 79 अरब रुपये पर था। 
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