बिजनेस स्टैंडर्ड - डाकघरों में शुरू हो स्वर्ण जमा
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डाकघरों में शुरू हो स्वर्ण जमा

दिलीप कुमार झा / मुंबई January 14, 2018

सराफा व्यापारियों और जौहरियों ने डाकघरों को स्वर्ण संग्रह योजना शुरू करने की अनुमति दिए जाने के लिए सरकार से गुजारिश की है। इससे ग्रामीण जमाकर्ताओं को व्यवस्थित रूप से नियमित आधार पर छोटी जमाओं के जरिये सराफे के प्रति अपना आकर्षण बरकरार रखने में मदद मिलेगी। उद्योग की शीर्ष संस्था इंडियन बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) ने बजट से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री को भेजी अपनी सिफारिश में कहा है कि देश भर में डाकघरों के जरिये स्वर्ण जमा योजना की शुरुआत अवश्य की जानी चाहिए। स्वर्ण जमा के आवर्ती खाते में जब जमाकर्ता धन जमा करते हैं, तो वह स्वर्ण के रूप में जमा होता है। कालांतर में स्वर्ण संग्रह की ऐसी योजना निवेशक के लिए सोने में नियमित रूप से निवेश करने में मददगार होगी।
 
हाल तक डाकघरों को महानगरों और उप-महानगरों में फैली अपनी मुख्य शाखाओं के जरिये सोने के सिक्कों की खुदरा बिक्री करने की अनुमति प्रदान की गई थी। लेकिन सोने के सिक्कों और छड़ों के प्रोत्साहन को कम करने के सरकार के प्रयासों ने डाकघरों के माध्यम से सोने के सिक्कों की बिक्री को रोक दिया था। केवल डाकघर ही नहीं, बल्कि खुदरा जौहरियों को भी सोने के सिक्कों की बिक्री को हतोत्साहित करने के लिए कहा गया था, जो गत वर्ष तक निवेश का प्रमुख मार्ग बन गया था। आईबीजेए के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा कि देश भर में हजारों-लाखों सराफा व्यापारियों और जौहरियों का प्रतिनिधित्व करने वाली आईबीजेए ने सराफा के आयात और आभूषण निर्यात का खास तौर पर लेन-देन करने के लिए विशेष रूप से अलग से एक सराफा बैंक स्थापित करने की सिफारिश की है। इसके अलावा, यह सराफा बैंक बड़ी मात्रा में 'रुपये' की जगह 'सोने' के खातों की व्यवस्था करेगा। इससे सोने की आयात पर निर्भरता कम करने में सरकार की मदद होगी।
 
इसके अतिरिक्त, आईबीजेए ने नकद लेन-देन कम करने की किसी भी संभावना के लिए सरकार से स्थायी खाता संख्या (पैन) की अनिवार्य सीमा के अनुसार नकद लेन-देन के लिए 2,00,000 रुपये के मौजूदा सीमा स्तर को कायम रखने का आग्रह किया है। सराफा और इस कीमती धातु के शिल्प के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए जौहरियों ने एक घरेलू स्वर्ण परिषद की स्थापना के लिए आवाज उठाई है, जिसका सरकार पहले ही कई अन्य क्षेत्रों के लिए गठन कर चुकी है। घरेलू जौहरियों और सराफा व्यापार गृहों को दुरुस्त करने के उद्देश्य से आईबीजेए ने टी बोर्ड और मसाला बोर्ड की तरह ही एक हाजिर एक्सचेंज और स्वर्ण बोर्ड की स्थापना की मांग की है ताकि इस कारोबार में पूरी मूल्य शृंखला के कल्याण को बढ़ावा मिले।
 
बजट-पूर्व निवेदन में संगठित जौहरियों का प्रतिनिधित्व करने वाली उद्योग की एक अन्य संस्था ऑल इंडिया जेम्स ऐंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन (जीजेएफ) ने सोने की घरेलू खदानों को फिर से खोलने की जरूर पर प्रकाश डाला है। जीजेएफ के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने कहा कि  कोलार की खदानों और अन्य निष्क्रिय खदानों जैसे महत्त्वपूर्ण स्थलों को फिर से सक्रिय किया जाए और खनन की संभावना का पता लगाने के लिए निजी कंपनियों को इसकी पेशकश की जाए। सोने के खनन को निजी भागीदारों के लिए खोला जाना चाहिए।
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