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उम्मीद पर खरी उतरी इन्फोसिस

रघु कृष्णन, विभु रंजन मिश्रा और रोमिता मजूमदार / बेंगलूरु/मुंबई January 12, 2018

बाजार की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए इन्फोसिस का शुद्घ मुनाफा चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 38.3 फीसदी बढ़कर 51.29 अरब रुपये रहा। हालांकि अमेरिका में एकमुश्त कर रिफंड से कंपनी को खासा फायदा हुआ है। इस दौरान कंपनी की आय 6.5 फीसदी बढ़कर 177.9 अरब रुपये रही।  अमेरिका में कर वापसी के तौर पर कंपनी को दिसंबर तिमाही में एकमुश्त 14.32 अरब रुपये मिले, जिससे कंपनी का मुनाफा बढ़ा है। डॉलर मद में कंपनी की आय पिछली तिमाही के मुकाबले समीक्षाधीन तिमाही में 0.8 फीसदी बढ़ी, जो सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से अपेक्षाकृत कम रहा है। टीसीएस का राजस्व डॉलर मद में 1.3 फीसदी बढ़ा है। इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी ने इन्फोसिस के मुख्य कार्याधिकारी एवं प्रबंध निदेशक का पद संभालने वाले सलिल एस पारेख के लिए अच्छी राह तैयार की है। विशाल सिक्का के कंपनी छोड़कर जाने के बाद इन्फोसिस प्रबंधन में स्थिरता लाने में नीलेकणी की अहम भूमिका रही है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के नतीजों के साथ ही इन्फोसिस ने मुद्रा के स्थिर रहने पर चालू वित्त वर्ष में आय में 5.5 से 6.5 फीसदी वृद्घि का अनुमान लगाया है। इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने कहा, 'यह पूरी तरह से सिथर है। हमने एक चुनौतीपूर्ण तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है।'

 
कंपनी पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी का रुझान अब सकारात्मक दिख रहा है। एमके रिसर्च के विश्लेषकों ने एक नोट में लिखा है, 'इन्फोसिस के नतीजे उम्मीद के अनुरूप ही रहे हैं। परिचालन मार्जिन 10 आधार अंक सुधरकर 24.3 फीसदी पर रहा, जो अनुमान से अधिक है। हमारा मानना है कि नतीजे व्यापक तौर पर उम्मीद के मुताबिक रहे हैं और अब हम नए मुख्य कार्याधिकारी के नेतृत्व में कंपनी के आगे बढऩे की उम्मीद कर रहे हैं।' पारेख फिलहाल सिक्का द्वारा अपनाई गई कंपनी की मौजूदा रणनीति का आकलन कर रहे हैं। निलेकणि पहले ही इस रणनीति की समीक्षा कर चुके हैं। यह रणनीति चार स्तंभों पर आधारित है। इनमें बाजार में मौके, ग्राहकों के साथ संबंध, कर्मचारी और सर्विस पोर्टफोलियो को नया जीवन देना शामिल है। कैपजेमिनाई में काम कर चुके पारेख को कंसल्टिंग और डिजिटल का बेहद अनुभव है।
 
पारेख ने अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा, 'कंपनी के संस्थापक मुझसे कोई अपेक्षा नहीं रखते हैं। यह एक शानदार कंपनी है जिसे ऐसे लोगों ने शुरू किया था जो बड़ा सपना देखते थे। उन्होंने ऐसा कुछ बनाया है जो लंबे समय तक कायम रहेगा। मैं संस्थापकों का पूरा सम्मान करता हूं और उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा।'  दिसंबर में खत्म तिमाही में अनिश्चित माहौल के कारण इन्फोसिस को बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र के ग्राहकों से कम कारोबार मिला। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस को भी दिसंबर तिमाही में इस स्थिति का सामना करना पड़ा है। इससे यह भी साफ है कि यूरोप से कारोबार बढ़ रहा है और अमेरिकी  बाजार के फिर से बहाल होने की संभावना है।
 
ब्रोकरेज फर्म एलारा कैपिटल के आईटी विश्लेषक रवि मेनन ने कहा, 'टीसीएस के मामले में कंपनी का कहना है कि यूरोप में मामला अच्छा लग रहा है और अमेरिकी बाजार में भी तेजी आ रही है। यह नहीं कह सकते कि बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं पर इन्फोसिस का रुख टीसीएस से किस तरह अलग होगा, लेकिन आने वाले साल में बेहतर मार्गदर्शन की जरूरत है। भारत और बाकी दुनिया के परिणाम अभी चौंकाने वाले नहीं हैं लेकिन अगर वे इसी तरह बने रहते हैं तो फिर यह चिंता की बात होगी।'
 
इन्फोसिस को परंपरागत सेवाओं पर कीमतों के दबाव का सामना करना पड़ रहा है जो दिसंबर तिमाही में सुस्त रही है। लेकिन कंपनी की डिजिटल सेवाओं में 6.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी के कुल राजस्व में इन सेवाओं की हिस्सेदारी 25 फीसदी है। इस दौरान कर्मचारियों का सर्वाधिक 84.9 फीसदी इस्तेमाल हुआ जिससे कंपनी का मार्जिन 10 आधार अंक के सुधार के साथ 24.3 फीसदी पहुंच गया।
Keyword: infosys, आईटी सेवा प्रदाता इन्फोसिस,
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