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इस साल एफएमसीजी क्षेत्र में विलय-अधिग्रहण सौदों में तेजी के आसार

अर्णव दत्ता / नई दिल्ली 01 11, 2018

आएंगे अच्छे दिन

विलय और अधिग्रहण (एमऐंडए) सौदों में दो वर्षों की तेजी के बाद 2017 एफएमसीजी क्षेत्र के लिए कमजोर वर्ष साबित हुआ। इस सेक्टर ने न सिर्फ न्यूनतम संख्या में ये सौदे दर्ज किए बल्कि कुल मूल्यांकन भी काफी नीचे रहा। इसकी मुख्य वजह वृहद स्तर पर हुए नीतिगत बदलाव और सरकार द्वारा सुस्त प्रतिक्रिया रही। ब्रिटेन स्थित अकाउंटिंग फर्म ग्रांट थॉर्नटन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 में एमऐंडए सौदों की कुल वैल्यू 405 अरब रुपये को पार कर गई। इसके बाद के वर्ष (2016) में यह आंकड़ा 460 अरब रुपये पर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 13.6 फीसदी की वृद्धि थी। 2016 में हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल), इमामी और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी प्रमुख कंपनियों ने पर्सनल केयर उत्पाद कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल की। जहां एचयूएल ने मैसंस गु्रप से हेयर केयर ब्रांड इंदुलेखा का अधिग्रहण 3.3 अरब रुपये में पूरा किया वहीं इमामी ने 16.5 अरब रुपये में अन्य हेयर केयर ब्रांड केश किंग को खरीदा।

हालांकि पिछले वर्ष न सिर्फ इन सौदों की संख्या 2016 के 21 से घटकर 16 रह गई बल्कि विलय एवं अधिग्रहण सौदों का कुल मूल्यांकन भी घटकर 300 अरब रुपये रह गा जो सालाना आधार पर 35 प्रतिशत कम है। वर्ष 2015 के दौरान एफएमसीजी सेक्टर अधिग्रहण क्षेत्र में मंदी से उबरा और उस वर्ष विलय एवं अधिग्रहण सौदों की संख्या 17 रही। पिछले साल इमामी को छोड़कर पर्सनल केयर स्पेस में कोई बड़े सौदे नहीं हुए। वर्ष 2017 के अंत में इमामी ने हेलियोस लाइफस्टाइल का अधिग्रहण किया।

ग्रांट थॉर्नटन में पार्टनर धनराज भगत के अनुसार लोट्टे कन्फेक्शनरी और हैवमोर आइसक्रीम्स के बीच सौदे में लोट्टे ने अहमदाबाद स्थित इस आइसक्रीम कंपनी को लगभग 10 अरब रुपये में खरीदा जिससे विलय एवं अधिग्रहण के संबंध में सालाना आंकड़ों को मजबूती मिली। एक अन्य आंतरिक सौदे में टाटा संस ने टाटा ग्लोबल बेवरिजेज में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सहयोगी कंपनी टाटा केमिकल्स से 4.3 करोड़ शेयर 77.7 रुपये के भाव पर खरीदे थे।

सूत्रों के अनुसार देश में 3.2 लाख करोड़ रुपये का एफएमसीजी क्षेत्र अब मांग और बाजार गतिविधि में सुधार की उम्मीद कर रहा है। एक प्रमुख एफएमसीजी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'पिछला वर्ष हमारे लिए खराब रहा क्योंकि  हमें नोटबंदी और जीएसटी के दोहरे झटकों से जूझना पड़ा। इससे हमारे पास विलय एवं अधिग्रहण के जरिये विकास योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए समय या संसाधन मुश्किल से ही उपलब्ध रह सका।' प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों की सालाना रिपोर्टों से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि शीर्ष सात कंपनियों के पास मार्च 2017 तक 340 अरब रुपये की आरक्षित नकदी थी। वहीं शीर्ष पांच कंपनियों की नकदी एवं नकदी समतुल्य निवेश का आंकड़ा 74 अरब रुपये को पार कर गया। इनमें उत्तर भारत स्थित दो कंपनियों डाबर और नेस्ले ने 35.5 अरब रुपये और 21.4 अरब रुपये का नकदी स्तर बनाए रखा।

बिजनेस स्टैंडर्ड को हाल में दिए एक साक्षात्कार में डाबर इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी सुनील दुग्गल ने संकेत दिया था कि कंपनी ऐसी उपयुक्त कंपनियां खरीदने की संभावना तलाश रही है जो छोटी हों, लेकिन उनमें विस्तार की संभावना मौजूद हो। उन्होंने कहा कि कंपनी ने स्थानीय विलय एवं अधिग्रहण गतिविधियों के लिए 10 अरब रुपये का बजट निर्धारित किया है। इमामी के निदेशक हर्षा वी अग्रवाल ने कहा, 'हम अच्छे अवसरों की तलाश के लिए हमेशा से प्रयासरत रहे हैं और जब भी हम महसूस करेंगे कि ये अवसर हमारी व्यावसायिक योजनाओं के अनुरूप आपसी तालमेल और रणनीतिक रूप से सही हैं तो हम उचित कीमत पर उनमें निवेश के लिए कदम उठाएंगे।' 
Keyword: FMCG, HUL, emami, godrej,,
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