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आईबीसी कंपनियों को राहत देने में जुटा सेबी

पवन बुरुगुला / मुंबई January 10, 2018

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंगक्रप्टसी कोड (आईबीसी) की शुरुआत के बाद प्रतिभूति नियमों के लिए जरूरी बदलावों पर नजर रखने के लिए एक विशेष आंतरिक टीम का गठन किया है। यह टीम सभी हितधारकों से जानकारियां एकत्रित करेगी और यह जांच करेगी कि कौन से प्रस्ताव उपयुक्त हैं और किन प्रस्तावों पर अमल किया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि आईबीसी कंपनियों की सूचीबद्घता समाप्त करने के लिए सख्त रिवर्स बुक बिल्डिंग प्रोसेस (आरबीबी) से बचने, न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) मानकों से छूट और कुछ खास अनुपालन शर्तों से रियायत उन मुख्य सुझावों में शामिल हैं जिन पर समिति द्वारा विचार किया जा रहा है। समिति के अंतिम सुझाव मार्च तक आने का अनुमान है।
 
यह पहल सेबी को हितधारकों, खासकर बैंकों से कई अनुरोध मिलने के बाद सामने आई है। इन बैंकों ने नए आईबीसी के संबंध में कुछ खास नियमों को नरम बनाए जाने का अनुरोध किया है। आईबीसी कंपनियों के लिए यह दूसरे दौर की रियायत होगी। इससे पहले सेबी ने दिवालिया कंपनियों के खरीदारों को अधिग्रहण के दौरान अल्पांश शेयरधारकों के लिए ओपन ऑफर पेश करने की अनिवार्यता से छूट प्रदान की थी। सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने कहा, 'हमें आईबीसी से जुड़ी कंपनियों के लिए मौजूदा नियमों में कुछ बदलाव के संबंध में शेयरधारकों से कई अनुरोध मिले हैं। इसलिए, हमने इन अनुरोधों के आकलन के लिए एक आंतरिक टीम बनाई है।'
 
दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही कंपनियों में बड़ी तादाद में सूचीबद्घ कंपनियां शामिल हैं। हालांकि कई संभावित खरीदार बीमार कंपनियों के अधिग्रहण के बाद इनकी सूचीबद्घता समाप्त किए जाने को इच्छुक हैं। इससे उनके अनुपालन दबाव में कमी आएगी क्योंकि नए खरीदार को प्रत्येक महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए अल्पांश शेयरधारकों से जुडऩे की जरूरत नहीं होगी। कई बैंकों ने आरबीबी से छूट पाने और एक ऐसी योजना बनाए जाने के लिए बाजार नियामक से संपर्क किया था और जिसमें मौजूदा कीमत विशेषज्ञों द्वारा स्वतंत्र मूल्यांकन द्वारा निर्धारित हो। इसी तरह की योजना का प्रस्ताव शुरू में सेबी द्वारा क्षेत्रीय स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्घ उन कंपनियों की सूचीबद्घता समाप्त करने के लिए रखा गया था जो क्षेत्रीय एक्सचेंजों के बंद होने के बाद किसी पंजीकृत स्टॉक एक्सचेंज से नहीं जुड़ी थीं। सेबी ने प्रवर्तकों को अल्पांश शेयरधारकों के संदर्भ में अपने निर्णय थोपने से रोकने के लिए डीलिस्टिंग मानकों को बरकरार रखा है, लेकिन कानूनी जानकारों का कहना है कि आईबीसी मामले बेहद अलग हैं क्योंकि सार्वजनिक शेयरधारक इस प्रक्रिया में पूरी तरह सफल नहीं हो पाते हैं।  फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के संस्थापक संदीप पारेख ने कहा, 'सेबी को आईबीसी प्रक्रिया को आसान और सफल बनाने के लिए अपने कुछ प्रावधानों की समीक्षा करनी चाहिए। हालांकि आईबीसी की प्रक्रिया से गुजरने वाली किसी कंपनी के लिए यह उम्मीद रखना कठिन है कि वह सेबी के मौजूदा नियमों का पालन कर पाएगी।'
Keyword: IBC, sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),
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