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वाराणसी, कानपुर, हाथरस में प्रसंस्करण आलू की खेती का परीक्षण सफल

भाषा / इलाहाबाद January 10, 2018

इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर फूड टेक्नोलाजी ने वाराणसी, कानपुर और हाथरस में आलू की प्रसंस्करण किस्म- चिपसोना-1, 3 एवं 4 और फ्राईसोना की खेती का परीक्षण किया जो पूरी तरह से सफल रहा है। लेकिन इन क्षेत्रों में प्रसंस्करण की कोई इकाई नहीं होने से किसान इस तरह की आलू किस्मों की खेती के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। आलू की प्रसंस्करण किस्म की खेती पर काम कर रहीं सहायक प्रोफेसर (सीएफटी) पिंकी सैनी ने बताया कि चिप्स जैसे प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद तैयार करने वाली कुछ कंपनियां मेरठ में ठेके पर खेती कराती हैं और अपने उत्पाद तैयार करने के लिए वहां से आलू की प्रसंस्करण किस्में लेती हैं।

उन्होंने बताया कि सेंटर फॉर फूड टेक्नोलाजी ने वाराणसी, कानपुर और हाथरस में आलू की प्रोसेसिंग किस्म की खेती का परीक्षण किया जो पूरी तरह से सफल रहा। लेकिन चूंकि इन क्षेत्रों में कोई प्रसंस्करण इकाई मौजूद नहीं है, इसलिए किसान आलू की इन किस्मों की खेती करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। सैनी ने कहा, मैरिनो कंपनी के साथ हमारी बातचीत हुई है। लेकिन यह कंपनी भी अभी मेरठ से आलू प्रसंस्करण किस्म उठाती है। हमने सीएफटी में आलू की इन किस्मों से बिस्कुट, एनर्जी बार, वीविंग फूड, स्टूडेड फूड तैयार किए हैं। उल्लेखनीय है कि देश में आलू की खेती करने वाले सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से किसान विरोध में सड़कों पर आलू फेंक रहे हैं। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इलाहाबाद में एक विशाल फूड पार्क स्थापित करने की घोषणा की है लेकिन इस दिशा में कोई प्रगति नहीं दिख रही है।

उत्तर प्रदेश 31 प्रतिशत उत्पादन के साथ आलू पैदा करने वाला सबसे बड़ा राज्य है और इस राज्य में हर साल करीब पांच लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती की जाती है। हालांकि पंजाब, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र में जिस तरह की बड़ी प्रसंस्करण इकाइयां मौजूद हैं, वैसी इकाइयां उत्तर प्रदेश में नहीं हैं जिसकी वजह से किसान जी-4, गोला जैसी टेबल किस्म के आलू की खेती करते हैं जिनका उपयोग सब्जी के तौर पर किया जाता है।

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