बिजनेस स्टैंडर्ड - 50 हजार के नकद सौदे पर सख्ती
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50 हजार के नकद सौदे पर सख्ती

श्रीमी चौधरी / मुंबई 01 09, 2018

कड़े नियम

पीएमएलए के तहत धनशोधन पर अंकुश के लिए रिपोर्टिंग नियम होंगे कड़े
50 हजार रुपये से अधिक के नकद लेनदेन के बारे में भी जानकारी देना हो सकता है अनिवार्य
फिलहाल 10 लाख रुपये के नकद लेनदेन आते हैं इसके दायरे में
सोना एवं बुलियन में नकद लेनदेन की सीमा भी तय
लेनदेन के लिए आधार को अनिवार्य पहचान प्रमाण बनाने की भी योजना

सरकार धनशोधन नियमों को सख्त बनाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत 50 हजार रुपये से अधिक के लेनदेन के बारे में अनिवार्य जानकारी देने के 'रिपोर्टिंग एवं मेनटेनेंस' नियमों को सख्त बनाया जाएगा ताकि काले धन को सफे द बनाने पर रोक लगाई जा सके। वर्तमान धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) नियमों के तहत 10 लाख रुपये मूल्य से अधिक के सभी नकद लेनदेन के बारे में इस तरह की जानकारी देनी होती है। इसी तरह देश से बाहर 5 लाख रुपये से अधिक के अंतरण और 50 लाख रुपये या इससे अधिक की अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री पर इस तरह की जानकारी देने की जरूरत होती है।

पीएमएलए में रिपोर्टिंग प्रावधान के तहत बैंकों, वित्तीय संस्थानों जैसी रिपोर्टिंग इकाइयों और मध्यस्थतों जैसे कि शेयर ब्रोकरों को ग्राहकों की पहचान सत्यापित करने, रिकॉर्ड रखने और वित्तीय खुफिया इकाई को इसकी जानकारी देने की बाध्यता होता है। इसके बाद वित्तीय खुफिया इकाई ऐसी सूचनाओं का विश्लेषण करती है और धनशोधन निषेध कार्रवाई के लिए इसकी जानकारी समुचित केंद्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को अग्रसारित करती है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार जानकारी देने वाली इकाइयों के लिए सोना एवं बुलियन में नकद लेनदेन की सीमा भी तय कर सकती है। व्यापक आलोचना के बाद सरकार ने अपने उस परिपत्र को रद्द कर दिया था, जिसमें 2 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार करने वाले ज्वैलरों को पीएमएलए के तहत ब्योरा देने वाली इकाई के तौर पर काम करने और 50,000 रुपये से अधिक की बिक्री में स्थायी खाता संख्या (पैन) लेने का निर्देश दिया गया था।

फिलहाल आयकर कानून के नियमों के तहत 2 लाख रुपये से अधिक के आभूषणों की खरीद पर भी पैन की आवश्यकता होती है। जानकारी मुहैया कराने वाली इकाई बनाकर उन्हें पीएमएलए प्रावधानों के तहत नकद लेनदेन की जानकारी देना अनिवार्य किया जा सकता है। नियम में बदलाव व्यवस्था से काले धन को साफ करने की दिशा में एक कदम होगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमें देश में काले धन की समस्या को ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत है। इसे महज एक अपराध या विवाद नहीं माना जाना चाहिए। हमे मामले की तह में जाकर किसी तरह की अवैध कमाई या कर चोरी पर लगाम लगाने की जरूरत है। हमें धन शोधन विरोधी कानूनों में केवाईसी प्रक्रिया को कड़ा बनाने की जरूरत है।' साथ ही जानकारी देने वाले संस्थान की परिभाषा को भी व्यापक बनाने पर बातचीत चल रही है। 

सूत्रों का कहना है कि पीएमएलए के प्रावधानों के तहत कुछ और संस्थाओं को भी जोड़ा जा सकता है।  इसके अलावा सरकार किसी भी तरह के वित्तीय लेनदेन के लिए आधार को अनिवार्य बनाने पर विचार कर रही है। जानकारी देने वाली संस्थाओं को ऐसे लोगों से आधार लेना होगा। सरकार का मानना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह के आकलन के लिए भी इस सूचना को विस्तारित किया जा सकता है। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि अधिकांश क्षेत्र खासकर होटल और विमानन जैसे सेवा क्षेत्र बुकिंग के लिए आधार मांग सकते हैं। 
Keyword: नियम, पीएमएलए, धनशोधन, रिपोर्टिंग, सोना, बुलियन, रिकॉर्ड, खुफिया इकाई,
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