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प्रत्यक्ष कर संग्रह से मिली राहत

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली January 09, 2018

राजस्व के मोर्चे पर बढ़ती चिंता के बीच सरकार को मुख्यतौर पर कम रिफंड की वजह से प्रत्यक्ष कर मोर्चे पर कुछ राहत मिली है। दिसंबर तक प्रत्यक्ष कर संग्रह में 18.2 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। बजट अनुमान के मुताबिक प्रत्यक्ष कर संग्रह की वृद्धि का लक्ष्य इस वित्त वर्ष के लिए 15.7 फीसदी है।  प्रत्यक्ष कर संग्रह (रिफंड के बाद) दिसंबर तक बढ़कर 6.56 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह 9.8 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान का 67 फीसदी तक है। इससे सरकार को कुछ राहत मिल सकती है जो वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कम संग्रह, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के द्वारा अधिशेष हस्तांतरण आदि की वजह से राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.2 फीसदी के स्तर पर रखने की चुनौतियों से जूझ रही है। 
 
सरकार इन श्रेणियों में करीब 500 अरब रुपये की कमी के विकल्प पर विचार कर रही है। रिफंड 1.12 लाख करोड़ रुपये रहा जो पिछले साल के 1.38 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 23 फीसदी कम है। इसकी वजह यह है कि सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह (रिफंड से पहले) वृद्धि मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 9 महीने में 12.6 फीसदी पर रहा है जो एक साल पहले 18.2 फीसदी तक था। पिछले साल अप्रैल से दिसंबर के दौरान संग्रह बढ़कर 7.68 लाख करोड़ रुपये हो गया। डेलॉयट हसकिंस ऐंड सेल्स के पार्टनर नीरू आहूजा का कहना है कि प्रत्यक्ष कर विभाग के नियमित मूल्यांकन में कमी की वजह से कम रिफंड हो सकता है। वह कहती हैं, 'नियमित ऑडिट और मूल्यांकन में कमी आई है। विभाग अब जोखिम आधारित मूल्यांकन करेगा और ऐसे मुद्दों पर काम करेगा जहां कुछ मुश्किलें होंगी। कीमत हस्तांतरण के लिहाज से देखें तो मूल्यांकन में बड़ी कमी देखी गई है।'
 
ग्रांट थॉन्र्टन के पार्टनर विकास वासल का कहना है कि दो वजहों से रिफंड में कमी देखी गई थी। पिछले साल से लंबित रिफंड को खत्म किया जा रहा है और कानूनी झगड़े के स्तर में कमी देखी जा रही है। उनका कहना है, 'कीमतों के हस्तांतरण में सरकार ने कई चीजें छोड़ दीं। परामर्श के स्तर पर हम यह महसूस करते हैं कि कई मामले कम हुए हैं क्योंकि सरकार ने पर्याप्त स्पष्टीकरण दिया है।' बजट अनुमान के मुकाबले जीडीपी में कम वृद्धि की वजह से राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को भी दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
 
वर्ष 2017-18 में जीडीपी वृद्धि के लिए पहला अग्रिम अनुमान शुक्रवार को जारी हुआ जिसमें यह अंदाजा मिला कि अगर घाटे को बजट अनुमान के 5.46 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर बनाए रखा जाता है तो सांकेतिक जीडीपी के प्रतिशत के तौर पर राजकोषीय घाटा करीब 3.3 फीसदी के स्तर पर आ सकता है जो 3.2 फीसदी के लक्ष्य से अधिक है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़े के मुताबिक 2016-17 में 152 लाख करोड़ रुपये के अस्थायी अनुमान के मुकाबले मौजूदा कीमत पर जीडीपी में वृद्धि 166 लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है। नवंबर तक राजकोषीय घाटा 2017-18 के बजट लक्ष्य का 112 फीसदी तक था। वैश्विक मंदी वाले साल 2008-09 के बाद से किसी वित्त वर्ष के शुरुआती 8 महीने में राजकोषीय घाटे के लिए बजट अनुमान में सबसे ज्यादा अंतर था। दिसंबर तक अग्रिम कर के रूप में 3.18 लाख करोड़ रुपये की रकम मिली जिससे पिछले साल की समान अवधि के दौरान संग्रह में 12.7 फीसदी तक की वृद्धि नजर आई। कॉरपोरेशन अग्रिम कर में वृद्धि 10.9 फीसदी जबकि  निजी आय कर में वृद्धि 21.6 फीसदी तक है।
Keyword: income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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