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एफपीआई के तौर पर पंजीकरण में हेज फंडों की बढ़ती दिलचस्पी

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई January 09, 2018

पार्टिसिपेटरी नोट्ïस (पी-नोट्स) रूट के जरिये आए कई हेज फंडों ने स्वयं को प्रत्यक्ष तौर पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) के तौर पर पंजीकृत कराने का रास्ता चुना है।  बाजार नियामक सेबी के नए आंकड़ों के अनुसार डेरिवेटिव्स के लिए पी-नोट निवेश की अनुमानित वैल्यू नवंबर 2017 में 91 फीसदी घटकर 50.72 अरब रुपये रह गई जो जनवरी में 557.8 अरब रुपये थी। पिछले साल जुलाई में सेबी ने पी-नोट धारकों को डेरिवेटिव बाजार में निवेश से रोकने के लिए सर्कुलर जारी किया था। इसमें कहा गया था कि सभी मौजूदा पोजीशन वर्ष 2020 के अंत तक या निवेश योजना की परिपक्वता की तारीख तक (जो भी पहले हो) निपटाई जाएंगी। विश्लेषकों के अनुसार भारत से जुड़े निवेश से संबंधित हेज फंडों ने सेबी के सर्कुलर के कुछ सप्ताह के अंदर पंजीकरण (प्रत्यक्ष तौर पर) की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि बड़ी तादाद में हेज फंड इस विकल्प को अपना रहे हैं, लेकिन कुछ फंड भारतीय डेरिवेटिव में अपने विफल सौदों की वजह से इस बाजार से बाहर भी हुए हैं।
 
धु्रव एडवाइजर्स में पार्टनर पुनीत शाह कहते हैं, 'सेबी द्वारा नियामकीय प्रतिबंधों और केवाईसी (नो यॉर कस्टमर) शर्तों के सख्त होने एवं कर संधियों में संशोधन से भी कई विदेशी निवेशकों ने भारतीय पूंजी बाजारों में पी-नोट रूट के जरिये अपने निवेश को समाप्त करने में दिलचस्पी दिखाई है। कई मामलों में, इन निवेशकों ने स्वयं को एफपीआई के तौर पर पंजीकृत कराने और भारत में निवेश करने का विकल्प चुना है।' उन्होंने कहा, 'हाल में संशोधित कर संधियों ने एफऐंडओ कारोबार पर पूंजीगत लाभ के संदर्भ में कर रियायतों की लगातार पेशकश को बढ़ावा दिया है। इसके परिणामस्वरूप, इन नए एफपीआई (जो इन क्षेत्राधिकारों में पंजीकृत हैं) को कर लाभ पाने के लिए जनरल एंटी-अवॉयडेंस रूल (जीएएआर), मल्टीलैटरल इंस्ट्रूमेंटïï्ïस (एमएलआई) और प्लेस ऑफ इफेक्टिव मैनेजमेंट (पीओईएम) कानूनों पर अमल करने की जरूरत होगी।'
 
सर्कुलर में एकल आधार पर समान शेयर पर हेजिंग की अनुमति दी गई है। इससे भारत में डेरिवेटिव पोजीशन, खासकर शॉर्ट पोजीशन लेने के लिए पी-नोट के इस्तेमाल की संभावना घटी है। विश्लेषकों का कहना है कि इसलिए कई फंड एफपीआई रूट के जरिये भारत में सीधे तौर पर निवेश करना पसंद करेंगे। डेरिवेटिव के साथ नए पी-नोट के निर्गम के लिए एफपीआई के अनुपालन अधिकारी द्वारा एक प्रमाण पत्र जारी किए जाने की जरूरत होगी। यह प्रमाणित किया जाना चाहिए कि जिस डेरिवेटिव पोजीशन पर पी-नोट जारी किया जा रहा है, वह सिर्फ उसके इक्विटी शेयरों की हेजिंग के लिए है। यह प्रमाण पत्र मासिक पी-नोट रिपोर्ट के साथ भेजा जाएगा।
 
विश्लेषकों का कहना है कि यूरोपीय क्षेत्रों में स्थित हेज फंडों के लिए भारत में डेरिवेटिव सौदों के लिए अपने स्वयं के एफपीआई पंजीकृत कराना आसान होगा। इसकी वजह यह है कि ज्यादातर यूरोपीय देशों में ऐसी कर संधियां लागू हैं जो इस तरह की इकाइयों को भारतीय डेरिवेटिव योजनाओं में कारोबार कर कमाए गए लाभ पर भारतीय कर से छूट प्रदान करती हैं। हॉन्गकॉन्ग या केमैन द्वीप जैसे स्थानों में स्थित हेज फंडों के लिए भारतीय डेरिवेटिव पर लाभ को 30 से अधिक प्रतिशत के कर के दायरे में लाया जाएगा। इन्हें अन्य क्षेत्रों से शुद्घ प्रतिफल की तुलना में भारतीय डेरिवेटिव में निवेश की व्यावसायिक व्यवहार्यता की समीक्षा करने की जरूरत होगी।
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