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दिवालिया मामलों में छोटे बैंक अधिक चुस्त

एन सुंदरेश सुब्रमण्यन / नई दिल्ली 01 07, 2018

शुरुआती दिनों में दिखाई काफी फुर्ती

दिवालिया प्रक्रिया के लिए नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) को कहीं अधिक मामले हस्तांतरित कर शुरुआती दिनों में छोटे बैंकों ने काफी फुर्ती दिखाई है। बड़े बैंकों के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा अग्रणी रहा लेकिन यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्टï्र और देना बैंक ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) जैसे अपने बड़े प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कहीं अधिक एलसीएलटी प्रक्रिया शुरू की। हालांकि मूल्य के लिहाज से एसबीआई अग्रणी रहा और उसने 30 सितंबर तक कुल 340.97 अरब रुपये के 18 मामलों को आगे बढ़ाया। इस प्रकार सितंबर 2017 तक ऋणशोधन एवं दिवालिया प्रक्रिया के तहत 1.07 लाख करोड़ रुपये से अधिक के दावे किए गए। जबकि कुल मामलों की संख्या 330 रही। कई ऐसे मामले भी हो सकते हैं जिनमें एक से अधिक लेनदार शामिल हों।

बिजनेस स्टैंडर्ड ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के जरिये प्राप्त जानकारियों का संकलन किया। हालांकि 17 बैंकों ने आरटीआई के तहत जानकारी दी लेकिन इंडियन ओवरसीज बैंक और आईडीबीआई ने सूचनाओं को वाणिज्यिक तौर पर संवेदनशील करार देते हुए जानकारी देने से इनकार किया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा कि उसके पास बैंकवार आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं और बैंकवार एकीकृत आंकड़ों के लिए एनसीएलटी को आग्रह भेज दिया लेकिन उसका अब तक जवाब नहीं आया।

बैंक ऑफ इंडिया ने सितंबर तक सबसे अधिक 55 मामले एनसीएलटी को भेजा। बैंक के 5.3 लाख एनपीए खातों में 463 अरब रुपये फंसे हुए हैं। इन प्रक्रियाओं के तहत कुल फंसे कर्ज का आकार 122.94 अरब है। करीब 520 अरब एनपीए के साथ बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि एनसीएलटी में उसके 51 मामले हैं जिनका कुल बकाया 148.56 अरब रुपये है। उसने कहा कि 16 मामले ऋणशोधन प्रक्रिया के लिए आरबीआई की दूसरी सूची से संबंधित हैं। बैंक ने कहा कि इनमें से तीन मामलों में प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। दिलचस्प है कि दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए कंपनियों की दूसरी सूची एनसीएलटी के पास पहुंच चुकी है जबकि पहली सूची को निपटाना अभी बाकी है।

केनरा बैंक ने आरटीआई के जवाब में कहा कि हालांकि उसने अभी ऐसी महज एक प्रक्रिया शुरू की है लेकिन कुल मिलाकर वह ऐसे 66 मामलों से संबंधित है जहां उसके करीब 146 अरब रुपये फंसे हैं। छोटे सरकारी बैंकों में यूको बैंक ने कहा कि उसने दिवालिया प्रक्रिया के तहत 72.65 अरब रुपये की परिसंपत्तियों के साथ 30 मामले शुरू किए हैं। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने कहा कि वह 52.96 अरब रुपये की परिसंपत्तियों के साथ 28 मामलों में सीओसी (कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स) का सदस्य है। देना बैंक ने कहा कि सितंबर तक उसने 33.6 अरब रुपये के 23 मामले शुरू किए हैं। जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के दूसरे सबसे बड़े बैंक पीएनबी ने भी 34 अरब रुपये मूल्य के 23 मामले शुरू किए हैं। आंध्रा बैंक ने कहा कि अन्य बैंकों द्वारा शुरू की गई एनसीएलटी प्रक्रिया के तहत उसके 57.66 अरब रुपये का एनपीए है। इलाहाबाद बैंक, इंडियन बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, पंजाब ऐंड सिंध बैंक और सिडबी ने भी एक अंक में ऐसे मामले दर्ज किए हैं। 

1,463 ऋण खातों में सौ-सौ करोड़ रुपये से अधिक का बकाया

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों में 1463 इकाई के अवरुद्ध ऋण खातों पर प्रत्येक पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। केवल भारतीय स्टेट बैंक में ही 265 खातों पर 100 करोड़ रुपये प्रत्येक से अधिक का बकाया है। सितंबर तिमाही तक बैंक के इस तरह के खातों पर कुल मिलाकर 77,538 करोड़ रुपये का बकाया था। राष्ट्रीयकृत बैंकों में ऐसे फंसे कर्ज वाले एनपीए खातों के लिहाज से पंजाब नैशनल बैंक पहले स्थान पर है। उसके 143 से अधिक एनपीए खातों पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। कुल मिलाकर इन खातों पर 45,973 करोड़ रुपये बकाया है। पीएनबी के बाद 100 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया वाले एनपीए खातों की संख्या के लिहाज से कैनरा बैंक का नंबर आता है। जहां तक छोटे पीएसयू बैंकों का सवाल है तो यूनियन बैंक में ऐसे 79 खाते, ओरियंटल बैंक में 68 खाते व यूको बैंक में 62 खाते हैं।

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