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आगामी बजट में साइबर सुरक्षा पर होगा विशेष जोर

करण चौधरी / नई दिल्ली 01 07, 2018

पिछले 1 साल में भारत की डिजिटल यात्रा

► इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण पर निवेश में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी
मोबाइल फोन के उत्पादन में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी
इस साल के दौरान डिजिटल लेन देन में 300 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी
इंडिया बीपीओ प्रमोशन स्कीम, सॉफ्टवेटर खरीद नीति, ग्रामीण भारत  को कानूनी सहायता के लिए टेली लॉ

डिजिटल अभियान को इस बजट में मिल सकते हैं 200 अरब रुपये

डिजिटलीकरण नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की प्रमुख पहल है, जिसके लिए आवंटन में 2018-19 के बजट में मामूली बढ़ोतरी की संभावना है। बहरहाल डेटा लीकेज की हाल की घटनाएं सामने आने के बाद से साइबर सुरक्षा के लिए अलग से धन आवंटित किया जा सकता है।  शहरी विकास मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास, दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, सहित विभिन्न मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सरकार डिजिटलीकरण का बजट 200 अरब रुपये रख सकती है। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने विभिन्न डिजिटलीकरण योजनाओं के लिए करीब 180 अरब रुपये आवंटित किए थे। 

इसके अलावा सरकार राज्यों के साथ सरकारी एजेंसियों को डिजिटलीकरण कार्यक्रम की लंबी सूची पूरी करने और लक्ष्य आधारित आवंटन पर जोर देगी। शहरी विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'तमाम परियोजनाएं सुस्त पड़ी हैं और डिजिटलीकरण के क्षेत्र में बहुत कुछ होना है। सरकार परियोजनाओं को पूरा होने को आगे के आवंटन से जोड़ सकती है।'  नोटबंदी के बाद 2017-18 के बजट में वित्त मंत्री ने डिजिटलीकरण पर खासा जोर दिया था और बजट भाषण में उन्होंने डिजिटल होने के आह्वान के साथ इसके फायदे गिनाए थे। नरेंद्र मोदी सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान के हिस्सा के रूप में रिजर्व बैंक से लेकर गांव के स्तर तक के लिए इस दिशा में पहल की गई है।

साइबर सुरक्षा बढ़ाने के लिए ज्यादा नकदी

साइबर सुरक्षा एक अहम क्षेत्र है, जिस पर बजट में वित्त मंत्री ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। साइबर अपराध और हैकिंग की तमाम घटनाए सामने आने और आधार के आंकड़ों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच वित्त मंत्री प्रस्ताव ला सकते हैं और साइबर सुरक्षा को मजबूती प्रदान करने के लिए धन का अवंटन हो सकता है।  सूत्रों के मुताबिक सेक्टर आधारित कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी) के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय को 15 अरब रुपये दिए जा सकते हैं और गृह मंत्रालय के आंतक निरोधी साइबर सेल के अलावा विभिन्न मंत्रालयोंं को बजट दिया जा सकता है। आईटी मंत्रालय को 55 अरब रुपये के आवंटन की उम्मीद है, जिसे पिछले साल 40.39 अरब रुपये मिले थे। 

स्मार्ट सिटी पहल पर ज्यादा जोर नहीं

सूत्रों ने कहा कि  सरकार की महत्त्वाकांक्षी 100 स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स को ज्यादा धन मिलने की संभावना नहीं है, जिसे 2017-18 में 40 अरब रुपये मिले थे। उन्होंने कहा कि इस परियोजनाओं पर ज्यादा कुछ नहीं हुआ है और ऐसे में सरकार राज्य सरकारों व नगर निकायोंं को और ज्यादा धन आवंटित करने के पहले काम पूरा करने के लिए दबाव डाल सकती है। अधिकारी ने कहा, 'स्मार्ट सिटी पहल पर पिछले साल के बजट में आवंटित धन में से सिर्फ 7 प्रतिशत खर्च हुए हैं। वित्त मंत्री डिजिटलीकरण पर ज्यादा बात कर सकते हैं, वहीं परियोजनाओं को शुरू किए जाने संबंधी विचार पर ज्यादा जोर होगा।'

डिजिटलीकरण अभियान में होंगी ज्यादा सेवाएं व एजेंसियां

पशुपालन, वानिकी, कृषि, स्पोट्र्स, सड़क सहित विभिन्न विभाग एवं मंत्रालयों को अपने डिजिटलीकरण अभियान की रफ्तार को दोगुना करने पर जोर होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'सरकार खर्च नहीं बढ़ाने जा रही है, लेकिन वह ज्यादा विभागों और एजेंसियों को प्रेरित कर सकती है कि वे डिजिटल अभियान पर खर्च बढ़ाएं। इसमें खिलाडियों को ऐप बनाने, जिससे कि उन्हें कौशल सुधारने में मदद मिले, पेड़ पौधोंं की गणना के लिए वनों की जियो टैगिंग और अन्य जानवरों व पशुओं को कार्ड से जोडऩे का काम शामिल है।' 

डिजिटल धन को बढ़ावा देने के लिए और योजनाएं

कम नकदी के इस्तेमाल पर सरकार के जोर के बारे में लोगों को जागरूक करने और इस अभियान की राह में आ रही चुनौतियों को दूर करने के लिए उपभोक्ताओं व दुकानदारों को लिए और ज्यादा प्रोत्साहन की पेशकश की जा सकती है, जिससे लोग डिजिटल भुगतान के लिए प्रेरित हों। विभिन्न नगर निकाय, प्राधिकरणों को भी डिजिटल नकदी लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
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