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एनसीडी आय पर कर आर्बिट्राज का इस्तेमाल कर रहे एफपीआई

पवन बुरुगुला / मुंबई January 04, 2018

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) फिलहाल गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर्स (एनसीडी) से प्राप्त लाभ को कर आर्बिट्राज का फायदा उठाने के लिए ब्याज आय के तौर पर दिखा रहे हैं जो पूर्व के रुझान की तुलना में एकदम विपरीत है जब वे इस आय को पूंजीगत लाभ के तौर पर दिखाते थे। मौजूदा समय में एफपीआई की ब्याज आय को 5 फीसदी की कर दर के अधीन रखा गया है जो संबद्घ समझौतों के आधार पर पूंजीगत लाभ के लिए 15-20 फीसदी है। विश्लेषकों का कहना है कि मॉरिशस और सिंगापुर समेत कई देशों के साथ संशोधित डबल टैक्स अवॉयडेंस एग्रीमेंट्ïस (डीटीएए) इस बदलाव की वजह हैं। 
 
शुरू में पूंजीगत लाभ एफपीआई के लिए बेहद उपयुक्त विकल्प थे, क्योंकि वे संबद्घ देशों के साथ  समझौतों के तहत लाभ का दावा कर सकते थे। हालांकि 15-20 फीसदी की कर दर पूंजीगत लाभ पर लागू थी, लेकिन एफपीआई को डीटीएए के तहत राहत मिली जिसमें पूंजीगत लाभ को छूट दी गई। हालांकि पूंजीगत लाभ कर मॉरिशस के जरिये आने वाले निवेशकों के लिए भी लंबे समय से उपलब्ध नहीं है, इसलिए एफपीआई अब करों को बचाने के लिए इसे ब्याज आय के तौर पर दिखा रहे हैं।
 
एक अधिकारी ने कहा, 'डीटीएए में संशोधन किए जाने के बाद से इसमें स्पष्टï बदलाव आया है कि एफपीआई एनसीडी से आय को पुनर्गठित कर रहे हैं। शेयर या रुपये से जुड़े ऋणों के मामलों के विपरीत, एनसीडी के कराधान ढांचे में कई खामियां हैं जिससे विदेशी फंडों को अपना कर खर्च घटाने में मदद मिल रही है।' सरकार ने 2013 में आयकर अधिनियम में संशोधन कर विदेशी निवेशकों के लिए कुछ खास शर्तों के साथ 5 फीसदी की रियायती कर दर को मंजूरी दी। एक अहम शर्त यह है कि रियायती दर तभी लागू होगी जब एनसीडी पर ब्याज एसबीआई की आधार दर से 5 प्रतिशत से अधिक न हो। उदाहरण के लिए, एसबीआई की मौजूदा आधार दर 8.65 फीसदी है। इसलिए, इस रियायती दर का हकदार बनने के लिए प्राप्त ब्याज आय 13.65 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। मौजूदा समय में एफपीआई रियायती कर दर पाने के लिए 13.65 फीसदी से कम की निर्धारित ब्याज दर वाली निवेश योजनाएं खरीद रहे हैं। इस दर से ऊपर, वे अपने एनसीडी समझौतों में क्लॉज भी शामिल करते हैं जिसमें कहा गया है कि कंपनी को रिडम्पशन के समय शेयर के प्रदर्शन के आधार पर प्रीमियम चुकाना होगा। हालांकि यह प्रीमियम कंपनी के शेयर के प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है, लेकिन इसे नियमों में खामियों की वजह से ब्याज आय के तौर पर श्रेणीबद्घ किया जा सकता है।
Keyword: FPI, NCD,,
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