बिजनेस स्टैंडर्ड - रिलायंस को बड़ी तैयारी की दरकार
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रिलायंस को बड़ी तैयारी की दरकार

अभिनीत कुमार / मुंबई January 04, 2018

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) को शीर्ष 20 वैश्विक कंपनियों की जमात में शामिल करने संबंधी मुकेश अंबानी के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी को अपनी राजस्व वृद्धि रफ्तार में तिगुना से भी अधिक वृद्धि करनी पड़ेगी। जानकारों का कहना है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कंपनी को अगले दशक में अपनी राजस्व वृद्धि की सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) को तिगुना से भी अधिक बढ़ाकर 18.5 फीसदी करने की जरूरत होगी जो पिछले 10 वर्षों में 6 फीसदी रही है।
 
बिक्री लक्ष्य के एक विश्लेषण पर गौर करने से पता चलता है कि यदि कंपनी विलय-अधिग्रहण की राह पर चली तो इसे हासिल किया जा सकता है लेकिन यह एक मुश्किल चुनौती होगी। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, 'विलय-अधिग्रहण के बिना अगले 10 साल के लिए 18.5 फीसदी सीएजीआर को बरकरार रखना थोड़ा कठिन होगा क्योंकि ऊर्जा कारोबार की स्थिति चक्रीय होती है।' आरआईएल के कुल राजस्व में तेल रिफाइनिंग, ईंधन एवं पेट्रोरसायन बिक्री कारोबार का योगदान उल्लेखनीय है और इसलिए कच्चे तेल के दाम बढऩे पर आरआईएल के राजस्व में इजाफा दिखता है। साथ ही खुदरा और दूरसंचार में उल्लेखनीय वृद्धि होने पर कंपनी के राजस्व में उछाल आता है।
 
शीर्ष वैश्विक कंपनियों की बिक्री के लिए ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार साल 2016-17 में 45.5 अरब डॉलर राजस्व के साथ आरआईएल 271वें पायदान पर रही। हालांकि इस सूची में वॉलमार्ट 485.8 अरब डॉलर के कुल कारोबार के साथ शीर्ष स्थान पर बरकरार रही जबकि 20वें पायदान पर फिलहाल एंग्लो-स्विस व्यापार एवं खनन कंपनी ग्लेनकोर पीएलसी मौजूद है जिसकी कुल सालाना बिक्री 152.9 अरब डॉलर है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में शीर्ष 20 कंपनियों की बिक्री में कुल मिलाकर 5 फीसदी की औसत सीएजीआर दर्ज की गई। यदि यही रफ्तार बरकरार रही तो अगले 10 वर्षों में 20 कंपनियों का अनुमानित सालाना कारोबार 250 अरब डॉलर का होगा। चोकालिंगम ने कहा, 'विलय-अधिग्रहण के जरिये आरआईएल अपने तेल एवं गैस और इंटरनेट कारोबार के एकीकरण के जरिये इस इस लक्ष्य तक पहुंच सकती है।' उदाहरण के लिए, आरआईएल उर्वरक कारोबार में उतर सकती है जिसके लिए ईंधन के तौर पर प्राकृतिक गैस की दरकार होती है। गैस उत्पादन बढ़ाने के लिए आरआईएल के लक्ष्य के मद्देनजर इसकी उम्मीद की जा रही है। साथ ही कंपनी पेट्रोरसायन कारोबार में पहले से ही मौजूद है जो तेल डेरिवेटिव्स पर आधारित है। इसलिए वाहन कंपनियों से बढ़ती मांग के मद्देनजर कंपनी अपने कृत्रिम रबर कारोबार में विस्तार कर सकती है।
 
सितंबर 2016 में वायरलेस दूरसंचार सेवा रिलायंस जियो के शुरू होने से आरआईएल को एक नया प्लेटफॉर्म मिला है जिसका इस्तेमाल मोबिलिटी समाधान से लेकर तमाम कारोबार में किया जा सकता है। वित्त वर्ष 2017-18 की पहली छमाही के दौरान रिलायंस जियो के तहत कंपनी के डिजिटल सेवा कारोबार ने 2.3 लाख करोड़ रुपये के सकल राजस्व में 3.2 फीसदी का योगदान किया। आगे इसमें उल्लेखनीय तेजी आने की उम्मीद की जा रही है। गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषक निखिल भंडारी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, 'हम जियो की एफटीटीएच (फाइबर टु द होम) पेशकश को लेकर भी सकारात्मक हैं और उम्मीद करते हैं कि अगले पांच साल के दौरान कुल राजस्व में इस क्षेत्र का योगदान करीब 20 फीसदी हो जाएगा।'
Keyword: RIL, oil, gas, mukesh ambani, reliance,,
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