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बिटकॉइन: 9 साल में मालामाल

राजेश भयानी /  01 03, 2018

बिटकॉइन का सफर

2-3 सेंट की कीमत से शुरू हुआ था बिटकॉइन, आज 700 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण वाले क्रिप्टोकरेंसी बाजार में है 36 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी
जापान बिटकॉइन को कानूनी मान्यता दे चुका है। रूस का केंद्रीय बैंक क्रिप्टो रूबल के नाम से अपनी खुद की आभासी मुद्रा लाने पर विचार कर रहा है।

बिटकॉइन ने बुधवार को अपनी नौवीं सालगिरह मनाई। विश्व की पहली और अब तक की सबसे बड़ी आभासी मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी) बिटकॉइन के जनक सतोशी नाकामोतो ने नौ साल पहले जेनेसिस ब्लॉक बनाकर बिटकॉइन नेटवर्क की  शुरुआत की थी। यह जेनेसिस ब्लॉक बिटकॉइन के वैश्विक लेनदेन रजिस्टर में सबसे पहला लेनदेन था। इसमें लिखा था, 'तारीख 3 जनवरी 2009, बैंकों के लिए दूसरे बेलआउट के कगार पर चांसलर।' यह एक ऐसा समय था जब 2008 के वित्तीय संकट से उबरने के लिए वैश्विक केंद्रीय बैंक विभिन्न बैंकों को अनेक प्रकार के पैकेज और प्रोत्साहन दे रहे थे।

नाकामोतो ने 31 अक्टूबर, 2008 को मेट्जडाउडडॉटकॉम पर क्रिप्टोग्राफी मेंलिंग सूची के माध्यम से एक श्वेत पत्र जारी किया था। इसमें बिटकॉइन मुद्रा के साथ ही दोहरे खर्च की समस्या से बचने के उपाय भी बताए गए थे, जिससे मुद्रा की नकल होने से रोका जा सके। वह एक ऐसी मुद्रा लाना चाहते थे जो लोकतांत्रिक हो और जिस पर किसी केंद्रीय बैंक का नियंत्रण ना हो। इसका एक कारण यह भी था कि तभी विश्व ने एक बहुत बड़े वित्तीय संकट का सामना किया था और इसने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया था। उन्होंने बिटकॉइन के बारे में कहा था, 'यह इलेक्ट्रॉनिक नकदी का पूरी तरह से पीर-टू-पीर वर्जन होगा, जिसमें किसी वित्तीय संस्था की भागीदारी के बिना ऑनलाइन लेनदेन को सीधे एक व्यक्ति से दूसरे तक भेजा जा सकेगा।' उन्होंने बिटकॉइन लेनदेन के लिए ब्लॉकचेन तकनीक को भी बनाया, जो एक सार्वजनिक खाता है।

इन्वेस्टोपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार 3 जनवरी, 2009 को एक अनाम डेवलपर (जिसे सतोशी नाकामोतो कहा जाता है) ने 50 बिटकॉइन के साथ एक जेनेसिस ब्लॉक जारी करके इतिहास रच दिया। आज भी सतोशी नाकामोतो की पहचान एक अबूझ पहेली बनी हुई है, हालांकि कुछ लोगों ने खुद के सतोशी होने का दावा भी किया है।

नौ वर्ष पहले साधारण से कंप्यूटर की सहायता से बनी और कुछ सेंट कीमत वाली इस आभासी मुद्रा के लिए आज ग्राफिक कार्ड के साथ ही उच्च दक्षता के कंप्यूटर और बहुत सी बिजली की आवश्यकता होती है। आज बिटकॉइन इतनी प्रसिद्ध हो चुकी है कि इसके जैसी ही हजारों दूसरी आभासी मुद्राएं बनाई जा चुकी हैं और इनकी कीमतें भी इतनी तेजी से बढ़ रही हैं कि बिटकॉइन की बाजार हिस्सेदारी अभी तक के सबसे कम स्तर 36.6 प्रतिशत पर आ गई है। वर्तमान में 250 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ बिटकॉइन पहले स्थान पर और रिपल दूसरे स्थान पर है। वहीं, सभी आभासी मुद्राओं के बाजार पूंजीकरण ने आज 700 अरब डॉलर के स्तर को पार कर दिया और अब यह एक लाख करोड़ डॉलर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 

इतिहास में झांकें तो लस्जलो हेनीयेज नाम के एक प्रोग्रामर द्वारा 22 मई, 2010 को विश्व का सबसे महंगा पिज्जा खरीदने की कहानी मिलती है। उन्होंने दो पापा-जॉन पिज्जा के लिए 10,000 बिटकॉइन का भुगतान किया था। तब इस तकनीक को आए हुए मात्र एक वर्ष हुआ था और इस भुगतान की कीमत मुश्किल से 25 डॉलर के बराबर थी। आज 14,900 डॉलर प्रति बिटकॉइन की कीमत पर उस भुगतान को रुपयों में बदलने के लिए आपको एक अच्छे कैलकुलेटर की जरूरत पड़ेगी। तब यह केवल 2-3 सेंट की कीमत का था। 

आज रोजाना 30 लाख यूजर ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं और अगले सात वर्षों में यह संख्या बढ़कर 20 करोड़ तक हो जाएगी। बिटकॉइन में बढ़ती रुचि ने विश्व के केंद्रीय बैंकों को परेशानी में डाल दिया है। अनेक केंद्रीय बैंक इनके विनिमय अथवा कानूनी मान्यता पर विचार कर रहे हैं तो वहीं कुछ अपनी क्रिप्टोकरेंसी बनाने की बात कर रहे हैं। जापान पहले ही बिटकॉइन को कानूनी मान्यता दे चुका है। रूस का केंद्रीय बैंक क्रिप्टो रूबल के नाम से अपनी खुद की आभासी मुद्रा लाने पर विचार कर रहा है। पिछले सप्ताह ही बेलारूस ने भी आभासी मुद्राओं को कानूनी मान्यता दे दी। वहीं, भारत आधिकारिक रूप से कह रहा है कि बिटकॉइन को कानूनी मान्यता नहीं है लेकिन वह इसे गैरकानूनी भी घोषित नहीं कर रहा है। भारत सरकार एक समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जो क्रिप्टोकरेंसी के विनियमन पर अनुशंसा कर सकती है।
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