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सोने पर बिटकॉइन की माया

राजेश भयानी /  December 31, 2017

सोने ने पिछले 5 वर्षों के दौरान अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए लंबा दौर देखा है। सितंबर 2011 में 1,900 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद इसमें गिरावट आई थी। चांदी भी अप्रैल 2011 में 48.40 डॉलर के 3 दशक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी और उसके बाद उसने अपनी स्थिति मजबूत की। लेकिन सोने के उलट चांदी के निवेशकों के लिए साल 2017 उतना अच्छा नहीं रहा। ऐतिहासिक रूप से सोना एक दशक तक तेज गति से बढ़ता है और फिर लंबे समय तक खुद को मजबूत करता रहा है। तो क्या इसमें मजबूती का यह दौर 2018 में खत्म हो जाएगा? विशेषज्ञों की मानें तो शायद नहीं। लेकिन कई ऐसे कारण है जो सोने की चाल तय करेंगे। इनमें सबसे अहम कारण यह है कि क्रिप्टोकरेंसी कैसा प्रदर्शन करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार विश्लेषक और अरोड़ा रिपोर्ट के लेखक निगम अरोड़ा का अनुमान है कि अगर कोई बड़ी घटना नहीं हुई तो वर्ष 2018 में सोना 1,120 से 1,380 डॉलर के दायरे में रहेगा। अलबत्ता उन्होंने कहा, 'बिटकॉइन जैसी आभासी मुद्राएं भी बड़ा कारण होंगी। द अरोड़ा रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक सामान्य रूप से सोने और चांदी में निवेश होने वाला कुछ पैसा क्रिप्टोकरेंसी में जा रहा है। अगर क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो इससे सोने को नुकसान होगा। दूसरी तरफ यदि क्रिप्टोकरेंसी का बुलबुला फूटता है तो फिर यह सोने के लिए अच्छी खबर होगी।'

 
बिटकॉइन सहित कई क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। इनमें से कई की कीमतें तो कुछ ही दिनों में दोगुनी हो गईं। बिटकॉइन की कीमत 20 हजार डॉलर तक पहुंचने के बाद कुछ ही दिनों में गिरकर 11 हजार डॉलर पर पहुंच गई। अभी इसकी कीमत 14 हजार डॉलर के आसपास है। क्रिप्टोकरेंसी का बाजार भी मजबूत हो रहा है और इसकी कुल बाजार कीमत 500 से 600 अरब डॉलर है। बिटकॉइन की कीमतों में तेजी के अलावा कुछ सकारात्मक चीजें भी हैं। निगम कहते हैं, 'सकारात्मक पक्ष की बात करें तो महंगाई बढ़ सकती है और चीन तथा अमेरिका के बढ़ते कर्ज को लेकर भी दुनिया में घबराहट की स्थिति हो सकती है। जहां तक नकारात्मक पक्ष की बात है तो ब्याज दरों के बढऩे की संभावना है। चूंकि सोने पर ब्याज या फिर लाभांश नहीं मिलता है, इसलिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी सोने के लिए नकारात्मक है।'
 
पिछले कुछ दिनों में कमजोर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट के साथ-साथ कई दूसरे कारणों से सोने की कीमतों में कुछ इजाफा हुआ है। लंदन के नेटिक्सिस कमोडिटी रिसर्च में वरिष्ठï जिंस विश्लेषक बर्नार्ड दाहदा भी सोने के 1,120 से 1,250 डॉलर के दायरे में रहने की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन उनका मानना है कि सोने की औसत कीमत वर्ष 2017 के 1,258 डॉलर की तुलना में 2018 में 1,235 डॉलर रहेगी। सोने की कीमतों में 2019 में तेजी आने की संभावना है जब खनन उत्पादन के उम्मीद से कम रहने का अनुमान है। ऐसा इसलिए कि 2012-13 में सोने की कीमतों में भारी गिरावट के बाद सोना उत्पादकों ने पूंजीगत खर्च में कटौती कर दी थी। उत्पादन में कटौती को जमीन पर उतरने में औसतन 5 साल का समय लगता है। निगम ने कहा कि दूसरा कारण यह है कि इस समय पूरी दुनिया में शेयर बाजार बहुत चढ़े हुए हैं। उन्होंने कहा, 'अगर शेयर बाजार गिरते हैं तो फिर सुरक्षित माने जाने वाले सोने पर पैसों की बरसात होगी। हमेशा ही तरह भूराजनीतिक घटनाक्रम सोने के लिए बहुत अहम है। अगर उत्तर कोरिया में स्थिति बदतर होती है या फिर अमेरिका और ईरान में टकराव होता है तो फिर यह सोने के लिए अच्छा होगा।' भारत में डॉलर के प्रति रुपये की चाल सोने की कीमतों का रुझान तय करेगी। इसके अलावा विदेशी पूंजी निवेश भी एक कारण होगा। इस कारण भी देश में सोने और चांदी की कीमतों में वैश्विक कीमतों की तरह तेजी देखने को नहीं मिली।
Keyword: bitcoin, money, currency , trade, exchange,
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