बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी में ज्यादा है प्रक्रियाओं की बाधा
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जीएसटी में ज्यादा है प्रक्रियाओं की बाधा

इंदिवजल धस्माना /  December 31, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने छोटी और मझोली कंपनियों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाया है लेकिन करदाताओं को अब भी रिटर्न दाखिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कर संग्रह के आंकड़ों में आ रही कमी भी इसका प्रमाण है। अलबत्ता जीएसटी करों में कटौती और एकीकृत जीएसटी के इस्तेमाल के कारण भी खासकर अक्टूबर और नवंबर में राजस्व संग्रह में कमी देखने को मिली है। रिटर्न दाखिल करते समय कंपनियों से तरह-तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं। उन्हें तिमाही या मासिक रिटर्न का विकल्प चुनने की अनुमति देने में आनाकानी की जा रही है। क्लीयरटैक्स के मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता कहते हैं कि सप्लाई रिटर्न दाखिल करने के लिए जरूरी जीएसटीआर1 फॉर्म के फॉर्मेट में बदलाव होने चाहिए। उदाहरण के लिए यह करदाता से उसके संभावित टर्नओवर के बारे में पूछता है। छोटी और मझोली कंपनियों के लिए इस सवाल का जवाब देना मुश्किल है। इतना ही नहीं, अगर आपने मासिक रिटर्न का चयन किया है तो आप पात्र होने के बावजूद तिमाही रिटर्न का विकल्प नहीं चुन सकते।

 
गुप्ता ने कहा कि इनपुट-आउटपुट रिटर्न के विवरण फॉर्म जीएसटीआर3बी के बारे में भी कई बोझिल सवाल पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिए रिटर्न दाखिल करने वालों से पूछा जाता है कि उनके पास रिवर्स इनपुट टैक्स क्रेडिट तो नहीं है? इसी तरह कंपोजिशन स्कीम के फॉर्म जीएसटीआर4 के लिए ऐप्लिकेशन प्रोग्राम इंटरफेस (एपीआई) उपलब्ध नहीं है और इसे ऑफलाइन फाइल करना पड़ता है।  मार्ग ईआरपी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुधीर सिंह कहते हैं कि कंपनियों को अब भी जीएसटी से जुड़ी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, 'बदलाव की यह प्रक्रिया चल रही है और पूरी नहीं हुई है।'
 
टैक्समैन के विशाल रहेजा का कहना है कि सभी करदाताओं के लिए जीएसटीआर-1 दाखिल करने की तारीख 10 जनवरी है चाहे उनका टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से अधिक हो या नहीं। लेकिन जीएसटीएन पोर्टल ने यह फॉर्म भरने की सुविधा केवल दो सप्ताह पहले ही खोली है, इसलिए कई कारोबारी अंतिम तारीख तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाएंगे।  सरकार उम्मीद कर रही है कि कारोबारी हर दिन अपने बिल अपलोड करेंगे लेकिन छोटे और मझोले कारोबारियों के पास इसके लिए जरूरी आईटी संसाधन नहीं हैं।
 
इससे पहले सितंबर के शुरू में जुलाई के रिटर्न दाखिल करते वक्त जीएसटीएन का पोर्टल क्रैश हो गया था। रहेजा ने कहा कि यह उम्मीद की जा रही थी कि पिछले विस्तार के बाद पोर्टल सुगमता के साथ काम करेगा लेकिन इसमें अब भी कई तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने कहा, 'जीएसटीआर-1 रिटर्न का विवरण तैयार होने में अब भी बहुत समय लग रहा है और आंकड़े तुरंत पोर्टल पर नहीं दिख रहे हैं और अपलोडिंग के बाद इसमें कई घंटे लग रहे हैं। सरकार को जल्दी से जल्दी इन दिक्कतों को दूर करना चाहिए ताकि जीएसटी अनुपालन को ज्यादा सुगम बनाया जा सके।'
 
असल में सरकार ने जीएसटीआर 1 के लिए रिटर्न भरने की तारीख 10 दिन बढ़ाकर अब 10 जनवरी कर दी है। यह रिटर्न जीएसटी लागू होने के शुरू के 4 महीनों के लिए भरा जाना है। नवंबर में जीएसटी संग्रह काफी कम रहा है। इस तरफ इशारा करते हुए डेलॉयट के एमएस मणि कहते हैं कि दरों में कमी से अगर संग्रह घटा है तो समझ में आता है लेकिन अगर इसके अनुपालन में कमी आई है तो यह चिंता की बात है। जीएसटी परिषद ने कई प्रक्रियाओं को सरल बनाया है। उदाहरण के लिए 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना कारोबार वाले कारोबारी अक्टूबर से तिमाही रिटर्न और कर भुगतान कर सकते हैं। कंपोजिशन स्कीम के लिए 75 लाख रुपये सालाना कारोबार की सीमा को बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। परिषद ने 31 मार्च 2018 तक इनपुट रिटर्न और इनपुट- आउटपुट रिटर्न भरने पर राहत दे दी है। साथ ही परिषद ने कंपोजिशन स्कीम में शामिल कारोबारियों के लिए जीएसटी की दरों में भी कटौती की है।
 
कंपोजिशन स्कीम में छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान बनाया गया है और उनके लिए कर की सपाट दर रखी गई है। लेकिन उन्हें इनपुट टैक्स रिटर्न का फायदा नहीं मिलेगा। सेवा प्रदाताओं को भी यह विकल्प चुनने की सुविधा दी गई है। इस बीच जीएसटीनेटवर्क के अध्यक्ष ए बी पांडे की अगुआई में गठित एक समिति को इन फॉर्मों को सरल बनाने का जिम्मा दिया गया है। समिति साथ ही प्रक्रियाओं में बदलाव की संभावना तलाशेगी। इनमें रिटर्न दाखिल करने के नियमों, कानूनों और फॉर्मेट में बदलाव भी शामिल हैं।
 
पांडे ने कहा, 'हम फॉर्म को सरल बनाने के लिए विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर रहे हैं और विभिन्न पक्षों से सुझाव ले रहे हैं कि इसमें क्या और सरलीकरण किया जा सकता है।  इसके पीछे सोच यह है कि जिन लोगों की कर देनदारी नहीं होती है, कोई बिक्री नहीं होती है, खरीद-फरोख्त नहीं होती है लेकिन उन्होंने भविष्य के लिए इस्तेमाल के लिए पंजीकरण करा रखा है, वे महज कुछ बटन दबाकर आसानी से जीएसटीआर1 और जीएसटीआर3 दाखिल कर सकें। यही हमारा उद्देश्य है। यही हमारा लक्ष्य है।' 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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