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बाजार की राह में अमेरिका और कच्चे तेल का खटका

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई 12 31, 2017

नए साल से आशा और आशंका

क्रूड ऑयल की कीमतें, फेडरल रिजर्व की नीतियां, चीन में नरमी, उत्तर कोरिया का रुख और ब्रेक्सिट का असर बाजार के लिए हो सकता है जोखिम भरा

वर्ष 2016 में दुनिया भर में निवेशक समुदाय के एक बड़े वर्ग को उम्मीद थी कि वैश्विक शेयर बाजार में तेजी थमेगी। वर्ष 2009 से लगातार 8 साल तक बाजार में तेजी का रुख बना हुआ था और इस साल ऐतिहासिक आठ साल के मंदडि़ए के चक्र के हावी होने की उम्मीद थी। लेकिन दो साल बीतने के बाद भी बाजार में गिरावट का असर नहीं दिख रहा है। 2018 में भी बाजार तेजडि़ए के नियंत्रण में दिखाई दे रहा है। दुनिया भर के ज्यादातर बाजारों की तरह ही भारतीय शेयर बाजार में भी 2018 में लगातार तीसरे साल तेजी बनी रह सकती है। लेकिन वैश्विक बाजार में आसान नकदी की उपलब्धता कम होने से 2017 में जिस तरह का रिटर्न मिला था, संभवत: वैसा रिटर्न न मिल पाए, वहीं भारत में चुनावी साल होने की वजह से बाजार में थोड़ी-बहुत लडख़ड़ाहट दिख सकती है।

क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी, फेडरल रिजर्व की नीतियों में नरमी, चीन में नरमी, उत्तर कोरिया का रुख और ब्रेक्सिट के असर जैसे कुछ जोखिम हैं, जो बाजार की तेजी को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि बाजार में कई सकारात्मक संकेत भी मिल सकते हैं। कंपनियों की आय में सुधार और निजी पूंजीगत निवेश बढ़ने से कुछ हद तक शेयरों के उच्च मूल्यांकन को तार्किक ठहराया जा सकता है। मॉर्गन स्टैनली के प्रबंध निदेशक रिधम देसाई ने कहा, 'करीब सात साल तक नकारात्मक दायरे में रहने के बाद कंपनियों की आय में सुधार हो रहा है और यह सकारात्मक दायरे में करीब-करीब पहुंच गया है। कंपनी जगत की आय और बैलेंस शीट में नरमी का रुख खत्म हो गया है और मुक्त नकदी प्रवाह मजबूत बनी हुई है और निजी पूंजीगत निवेश बढ़ सकता है।'

फ्रैंकलिन टेंपलटन इन्वेस्टमेंट्स, इंडिया में फ्रैंकलिन इक्विटी के मुख्य निवेश अधिकारी आनंद राधाकृष्णन ने कहा, 'कंपनियों की आय में सुधार, सार्वजनिक बैंकों द्वारा कर्ज देने की बेहतर क्षमता और अनुकूल बाजार से निजी निवेश में सुधार की संभावना दिख रही है।'

सेंसेक्स अभी पिछले 12 महीनों के आय के 25 गुना पर और बीते पांच साल की औसत के 19 गुना पर कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक, धातु, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, दूरसंचार और आईटी क्षेत्र का प्रदर्शन कमतर रहा और इसकी वजह से सेंसेक्स की आय में कमी आई। यही वजह है कि शेयरों का मूल्यांकन ज्यादा लग रहा है। केनेरा रोबेको ऐसेट मैनेजमेंट में इक्विटी प्रमुख रवि गोपालकृष्णन ने कहा, 'इन क्षेत्रों के आंकड़ों में मामूली सुधार से भी अगले 12 से 18 महीनों में आय के आंकड़ों में तेजी आ सकती है और मूल्यांकन ज्यादा वाजिब दिख सकता है।'

घेरलू बाजार में म्युुचुअल फंडों की ओर से निवेश जारी रह सकता है क्योंकि निवेशक पारंपरिक निवेश साधनों जैसे सोना, रियल एस्टेट और सावधि जमा से वित्तीय संपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पारंपरिक निवेश साधनों ने पिछले कुछ वर्षों में काफी सीमित रिटर्न दिया है। मॉर्गन स्टैनली ने एक नोट में कहा है, 'भारत घरेलू तरलता के सुपर साइकिल में रहेगा। अगले 10 वर्षों में 420 से 525 अरब डॉलर का घरेलू इक्विटी में निवेश का अनुमान है, जिससे भारतीय बाजार के गुणक उच्च स्तर पर बने रह सकते हैं।' विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की दिलचस्पी को आंकना थोड़ा कठिन हो सकता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व अगले साल तीन बार दरों में इजाफा कर सकता है, जिससे जोखिम वाली परिसंपत्तियों में धन के सुगम प्रवाह में कुछ हद तक कमी आ सकती है। हालांकि यूरोपीय केंद्रीय बैंक के साथ अन्य केंद्रीय बैंक भी ऐसा रुख अपनाते हैं तो असर ज्यादा व्यापक हो सकता है।

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के इंडिया इक्विटी स्ट्रैटजिस्ट संजय मुकीम के अनुसार अमेरिकी फेडरल रिजर्व का तरलता निवेश दूसरी तिमाही में उच्च स्तर पर रह सकता है, जिससे वैश्विक संपत्तियों के मुद्रास्फीति पर असर पड़ेगा और भारतीय शेयरों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मुकीम ने कहा, 'अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में इजाफा किए जाने के बाद इक्विटी पर रिटर्न बढऩे से विदेशी निवेशकों की ओर से भारत से कोष की निकासी की जा सकती है।'

वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी, फेडरल रिजर्व की नीतियों में नरमी, चीन में नरमी, उत्तर कोरिया का रुख और ब्रेक्सिट के असर को लेकर लेकर आशावादी रुख बना हुआ है। डालटन कैपिटल एडवाइजर्स इंडिया के प्रबंध निदेशक यूआर भट्टï ने कहा, 'कोई नहीं कह सकता है कि इन कारकों को 2018 में किस तरह का प्रभाव पड़ेगा।' विश्लेषकों का कहना है कि 2017 में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 20 फीसदी बढ़कर 66 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई और 75 से 85 डॉलर के ऊपर पहुंचने पर भारतीय शेयर बाजार पर असर पड़ सकता है। घरेलू बाजार में कंपनियों की आय में निराशाजनक रही तो बाजार की तेजी पर लगाम लग सकता है। बीएनपी पारिबा के एशिया प्रशांत के इक्विटी स्ट्रैटजिस्ट मनीषी रायचौधरी ने कहा, 'अगर आय निराशाजनक बनी रही तो प्रीमियम मूल्यांकन को तार्किक ठहराना कठिन हो सकता है।'

बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार की प्रक्रिया, सरकार की बुनियादी परियोजनाओं के क्रियान्वयन और निजी पूंजी निवेश में सुधार पर भी बाजार की नजर रहेगी। 2019 में आम चुनाव से पहले सरकार द्वारा खर्च बढ़ाने से राजकोषीय गणित प्रभावित होगा और संभवत: निवेशकों के लिए यह सही नहीं होगा। भट्ट ने कहा, 'अगर भाजपा कुछ राज्यों में दोबारा सत्ता में नही आती तो बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव दिख सकता है।' राधाकृष्णन का कहना है कि निवेशकों को लॉर्ज कैप्स में मुख्य निवेश वाले विविधकृत इक्विटी फंडों पर दांव लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण आय बढऩे से एफएमसीजी के साथ ही साथ वाहन, मनोरंजन और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स क्षेत्र को लाभ होगा।
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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