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दूर और नजदीक

साप्ताहिक मंथन
टी. एन. नाइनन /  December 29, 2017

अंबानी बंधुओं की कहानी में हाल ही में नया मोड़ आया है। बड़े भाई मुकेश से हुए अलगाव के दौरान रिलायंस कम्युनिकेशंस को झटकने वाले छोटे भाई अनिल ने अब इस कंपनी की अधिकांश परिसंपत्तियां रिलायंस इंडस्ट्रीज को 24,000 करोड़ रुपये में बेच दी हैं। यह घटनाक्रम एक तरह से दो करियर के उत्थान एवं पतन को भी दर्शाता है। गुजरते साल को मुकेश अंबानी अपनी जियो सेवा के जरिये दूरसंचार उद्योग को हिलाकर रख देने के लिए याद रख सकते हैं, वहीं अनिल पैसे जुटाने के लिए एक-एक कर अपने कारोबार बेच रहे हैं। आरकॉम से पहले अनिल ने मुंबई बिजली वितरण कारोबार को अदाणी के हाथों 19,000 करोड़ रुपये में बेचा था। इसके पहले उन्होंने डीटीएच कारोबार, रेडियो एवं टीवी कारोबार और बिग सिनेमाज के भी सौदे किए। इसके बावजूद उन पर बड़ा कर्ज बकाया है, लिहाजा आगे आरकॉम की रियल एस्टेट परिसंपत्तियों की बिक्री हो सकती है।

 
पिता धीरूभाई अंबानी के जीवित रहते समय अनिल सभी अहम सौदों का जिम्मा संभालते थे और मीडिया के सामने रिलायंस का चेहरा हुआ करते थे जबकि मुकेश जमीनी आधार तैयार करने में लगे रहते थे। धीरूभाई के निधन के बाद अनिल को अहसास हुआ कि उनके पास करने के लिए कुछ खास रह ही नहीं गया है। भाई के साथ अलगाव अपरिहार्य होने पर उनके सामने कुछ छोटी-मोटी कंपनियों की पेशकश रखी गई। इनमें से रिलायंस कैपिटल और रिलायंस एनर्जी (पहले बीएसईएस) का जिम्मा अनिल के ही पास था। दबदबे को लेकर दोनों भाइयों के बीच टकराव हुए और बहुत कुछ सार्वजनिक भी हुआ। लेकिन अंत में  मुकेश ने न चाहते हुए पसंदीदा प्रोजेक्ट रिलायंस इन्फोकॉम (अब आरकॉम) से खुद को अलग कर लिया। इससे दोनों भाइयों के बीच बंटवारा थोड़ा कम असंगत रहा, फिर भी अनिल की तुलना में मुकेश बड़े खिलाड़ी बन गए। जहां अनिल की कंपनियों का कारोबार 76,300 करोड़ रुपये था वहीं मुकेश के हिस्से में 1,18,100 करोड़ रुपये के आकार वाली कंपनियां आईं। लेकिन वास्तविक असंतुलन तो कहीं ज्यादा था क्योंकि समूह की कुल बिक्री एवं लाभ का 90 फीसदी से भी अधिक हिस्सा मुकेश के हिस्से में आया था।
 
इसके बावजूद शुरुआती तेजी अनिल ने ही पकड़ी थी। एक वक्त दूरसंचार कारोबार 1.69 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया था लेकिन शेयरों के धराशायी होने से इसकी कीमत 10,000 करोड़ रुपये रह गई है। वर्ष 2008 में शेयर बाजार में मचे हाहाकार के बीच रिलायंस पावर का सार्वजनिक निर्गम शानदार रहा था। कोई राजस्व या नकदी नहीं होने के बाद भी इसका मूल्य 1.01 लाख करोड़ रुपये आंका गया था लेकिन आज इसका मूल्य  14,100 करोड़ रुपये है। वैसे इन दोनों कंपनियों को मुकेश के अवरोध का सामना भी करना पड़ा। आरकॉम को दक्षिण अफ्रीका की कंपनी एमटीएन का अधिग्रहण करने से रोका गया। मुकेश का यह कहना था कि किसी भी शेयर बिक्री पर पहला दावा उनका है। पारिवारिक समझौते के तहत अनिल की ऊर्जा परियोजनाओं को गैस आपूर्ति करने पर हुए कानूनी विवाद में भी जीत मुकेश की हुई थी। इन दोनों भाइयों की किस्मत में आए बदलाव के कुछ अन्य कारण भी रहे। ऐसे में अनिल की कंपनियों की एक समय जो कीमत करीब 4 लाख करोड़ रुपये थी अब वह 80 फीसदी गिरावट के साथ 73,000 करोड़ रुपये रह गई है। इसकी तुलना में मुकेश की रिलायंस इंडस्ट्रीज आज के समय में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कंपनी है। निजी संपत्ति के मामले में भी फोब्र्स ने मुकेश को एशिया का सर्वाधिक समृद्ध व्यक्ति बताया है जबकि अनिल को भारत में ही 45वां स्थान मिला है।
 
हालांकि मुकेश का तेल एवं गैस और खुदरा कारोबार कोई बहुत कामयाब नहीं रहा है जबकि दूरसंचार कारोबार में यह देखना होगा कि वह पूंजी पर कितना अच्छा रिटर्न कमा सकता है। मुकेश के लिए रिफाइनिंग एवं पेट्रोकेमिकल कारोबार ही कमाऊ घोड़े बने हुए हैं। जहां रिलायंस के निवेशकों को लंबे समय तक धैर्य रखना होगा, वहीं अनिल के लिए चुनौती यह है कि वह मुकेश की तरह जमीन पर नजर आने वाली परिसंपत्तियां खड़ा कर सकें। रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर सड़क, पुल और मेट्रो निर्माण से जुड़ी है, रिलायंस पावर दर्जन भर बिजली परियोजनाएं बना रही है और रक्षा क्षेत्र की कंपनी जहाजरानी एवं विमानन उपकरणों के निर्माण में लगी है। अगर वह इस नए खेल में कामयाब हो जाते हैं तो भी उन पर बकाया कर्जों की भरमार है। वहीं मुकेश के पास भरपूर नकदी है।
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