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सरकार लेगी बाजार से उधार

दिलाशा सेठ और अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 12 27, 2017

► राजकोषीय घाटे का लक्ष्य चूकने की आशंका
► 50,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जुटाएगी 
► चालू वित्त वर्ष में घाटा हो सकता है 3.5 फीसदी
► अगले वित्त वर्ष में भी घाटा हो सकता है 3.2 फीसदी
राजस्व संग्रह उम्मीद से कम रहने के कारण सरकार इस साल भी राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करने से चूक सकती है। राजस्व में कमी के कारण ही सरकार को बाजार से 50,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी भी उठानी पड़ रही है। चालू वित्त वर्ष के दौरान 5.80 लाख करोड़ रुपये की उधारी का अनुमान बजट में भी जताया गया था। लेकिन यह रकम उस अनुमान के अलावा होगी। इससे लग रहा है कि राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी के 3.2 फीसदी के भीतर समेटने का लक्ष्य अधूरा रह सकता है।
 
बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक ऐसा होता है तो खजाने को मजबूती देने की सरकार की योजना को और झटका लगेगा क्योंकि अगले वित्त वर्ष के लिए भी जीडीपी के 3.2 फीसदी घाटे का लक्ष्य रखे जाने की उम्मीद लग रही है। पहले यह आंकड़ा 3 फीसदी रखा जाना था। 
 
वित्त मंत्रालय ने आज एक विज्ञप्ति में बताया कि सरकार चालू वित्त वर्ष में नियत सरकारी प्रतिभूतियों के जरिये बाजार से 50,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी उठाएगी। हालांकि सरकार ने ट्रेजरी बिल के जरिये उधार ली जाने वाली रकम में 61,203 करोड़ रुपये की कमी कर दी है, लेकिन राजकोषीय घाटे पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा।
 
सरकार को कर राजस्व में 40 से 50 हजार करोड़ रुपये कम रहने की आशंका है। कंपनियों में मंदी के कारण प्रत्यक्ष कर संग्रह में 20,000 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण अप्रत्यक्ष कर संग्रह 25 से 30 हजार करोड़ रुपये कम रहने का अंदेशा है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हमें जीएसटी, सरकारी कंपनियों तथा सरकारी बैंकों से मिलने वाले लाभांश में कमी आने का खटका है। साथ ही प्रत्यक्ष कर संग्रह भी उम्मीद के मुताबिक रहने की संभावना नहीं है।' 
 
भारतीय रिजर्व बैंक ने अंतिम 5 नीलामियों के कैलेंडर में तब्दीली कर दी है और पहले के 5,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के बजाय 15,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य कर दिया है ताकि अतिरिक्त 50,000 करोड़ रुपये उधार लिए जा सकें। यह कदम तब उठाया गया, जब खजाने को मजबूत बनाने के प्रयासों समेत भारत सरकार के नीतिगत उपायों को देखकर मूडीज ने 14 साल बाद भारत की सॉवरिन रेटिंग सुधारकर बीएए2 कर दी। 
 
मूडीज और स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स ने चेतावनी दी है कि खजाने की मजबूती अब भी केंद्र और राज्यों के लिए चुनौती बनी हुई है। लेकिन सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया कि अगले साल मार्च तक शुद्घ अतिरिक्त उधारी नहीं ली जाएगी। ट्रेजरी बिल में 61,203 करोड़ रुपये की कमी आएगी और सरकारी प्रतिभूतियों के जरिये 50 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी जुटाई जाएगी।  
 
राजकोषीय घाटे का लक्ष्य चूकने का मतलब है कि अगले साल इसे जीडीपी के 3 फीसदी पर समेटने का लक्ष्य भी नहीं मिल पाएगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली इस अतिरिक्त राशि का इस्तेमाल अगले साल के बजट में कर सकते हैं, जो 2019 के आम चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा। 
 
अगर यह मान लें कि और कुछ नहीं बदलता है तो भी 50,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी इस वर्ष राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.54 फीसदी तक धकेल सकती है। वित्त वर्ष 2016-17 में भी घाटे का आंकड़ा तना ही था।
 
केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'पहली नजर में तो यही लगता है कि राजकोषीय घाटा 3.5 प्रतिशत तक जा सकता है। लेकिन हो सकता है कि पहले की तरह सरकार पूरी रकम साल के अंत में उधार नहीं ले।'   सबनवीस ने कहा कि अतिरिक्त उधारी की घोषणा कर सरकार बाजार को इस बात के लिए तैयार कर रही है कि बजट में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूकने की बात कही जाएगी।
 
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा, 'मुझे इस बात की खुशी है कि  सरकार राजकोषीय घाटे को 3.5 प्रतिशत तक ले जाएगी। अगले साल भी आंकड़ा 3.5 प्रतिशत ही रह सकता है। अर्थव्यवस्था के लिए एक तरह से यह सकारात्मक खबर होगी क्योंकि अगले साल जीडीपी अधिक रहने की उम्मीद है। आगामी बजट आम चुनाव से पहले पेश होने वाला अंतिम पूर्ण बजट होगा, इसलिए सरकार के पास अधिक खर्च करने की गुंजाइश भी होनी चाहिए।' घोष और सबनवीस दोनों ने कहा कि अल्प अवधि का उधारी माध्यम होने के करण ट्रेजरी बिल से खजाने की हालत खराब नहीं होती।
 
इस बीच नवंबर में जीएसटी संग्रह कम होकर 80,808 करोड़ रुपये पर ही टिक गया है। इसके लिए नवंबर में ही 200 से अधिक वस्तुओं पर जीएसटी की दर कम किए जाने को सबसे बड़ा जिम्मेदार माना जा रहा है।  इसके अलावा इन्वॉयस के मिलना रिवर्स चार्ज प्रणाली आदि के कारण कर अनुपालन भी कम रहा है। एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, 'हमें जीएसटी पर सुरक्षा के तीन उपाय करने होंगे। सबसे पहले तो इन्वॉयस का मिलान ठीक तरीके से करना होगा। उसके बाद ई-वे बिल की प्रक्रिया लागू करनी होगी और रिवर्स चार्ज प्रणाली भी क्रियान्वित करनी होगी।'
 
आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष गर्ग ने सितंबर में कहा था कि सरकार उधारी और राजकोष से संबंधित लक्ष्यों पर दिसंबर में पुनर्विचार करेगी। अक्टूबर के अंत तक राजकोषीय घाटा पूरे वित्त वर्ष के लिए तय किए गए लक्ष्य के 96.1 फीसदी पर पहुंच गया था। पिछले कुछ महीनों से वित्त मंत्रालय ने व्यय पर अंकुश जरूर लगाया है और आगे भी अपना हाथ ढीला नहीं करेगा। 
 
रिजर्व बैंक ने इस साल केंद्र को 30,600 करोड़ रुपये का अधिशेष दिया है। केंद्र ने कहा कि उसे केंद्रीय बैंक से 43,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी। यह पता नही है कि बैंक अतिरिक्त अधिशेष देगा अथवा नहीं। चिंता इस बात की भी है कि सार्वजनिक उपक्रम सरकार को अपेक्षित लाभांश शायद नहीं दे सकें क्योंकि उनसे अधिक पूंजीगत व्यय करे तथा शेयर बायबैक करने के लिए कहा गया है।
 
ऐसे में सरकार के लिए विनिवेश ही पुख्ता तरीका बचता है, जिससे 90,000 करोड़ रुपये से अधिक रकम की प्राप्ति हो सकती है। बजट में यह आंकड़ा 72,500 करोड़ रुपये रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। मगर हिस्सेदारी बिक्री से मिली अतिरिक्त रकम राजस्व में अन्य स्रोतों से आने वाली कमी की भरपाई नहीं कर पाएगी।
Keyword: revenue, central, market, RBI, राजस्व, राजकोषीय घाटे,,
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