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बजट में परिवहन पर रहेगा विशेष जोर

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली 12 26, 2017

परिवहन मंत्रालय करना चाहता है 18 % अधिक खर्च

देश में परिवहन व्यवस्था सुधारेन पर होगा 45,000 करोड़ रुपया खर्च

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय देश में बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर देने पर विचार कर रहा है। मंत्रालय अपनी इस योजना के लिए बजट में अतिरिक्त प्रावधान की मांग करेगा। मंत्रालय वित्त वर्ष 2018-19 के लिए मंत्रालय पिछले साल के मुकाबले 18 प्रतिशत अधिक रकम खर्च करना चाहता है और इसके लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली से विशेष बजटीय समर्थन की मांग की है। 

इस तरह, देश भर में परिवहन ढांचा सुधारने पर 45,000 करोड़ रुपये अधिक खर्च होंगे। सरकार इलेक्ट्रिक बसों की खरीदारी के लिए केंद्रीय बजट में 2,000 करोड़ रुपये की घोषणा कर सकती है। केंद्र ने राज्यों को मदद के जरिये बेहतर परिवहन सुविधाएं विकसित करने की योजना तैयार की है। सड़क परिवहन मंत्रालय एक चतुष्कोणीय पहल पर विचार कर रही है, जिसमें बड़े शहरों में यातायात सरल बनाना, नई परिवहन व्यवस्था जैसे पीआरटी और इलेक्ट्रिक बसें, बस अड्डïे विकसित करना और राज्य परिवहन निगमों को उनके बेड़े में सुधार में मदद करना शामिल हैं।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'योजना का मकसद शहरी परिवहन व्यवस्था में सुधार से दिल्ली, मुंबई और बेंगलूरु जैसे शहरों में सड़कों पर भीड़ कम करना है। इसके लिए राज्यों को केंद्र सरकार से वित्तीय मदद की जरूरत है। यह जरूरत मंत्रालय के लिए होने वाले मौजूदा बजटीय प्रावधान से पूरी नहीं हो सकती है।' दिल्ली, मुंबई और देश के दूसरे शहरों में यातायात की दिक्कतें दूर करने के लिए 15,000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। केंद्रीय राजमार्ग मंत्रीय नितिन गडकरी ने ही वित्त मंत्री को पत्र लिखा था, जिसमें अपने मंत्रालय के लिए अधिक रकम की मांग की थी।

मंत्रालय 25,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित इलेक्ट्रिक बसों और पीआरटी पहल को भी अपने समर्थन को विस्तार देने को इच्छुक है, जिसमें से 2,000 करोड़ रुपये इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने के लिए होंगे। यह बसें मौजूदा डीजल बसों का स्थान लेंगी और इतना ही धन पोड टैक्सी जैसे व्यक्तिगत द्रुतगामी परिवहन के प्रोत्साहन के लिए होगा। सरकार जल्द ही देश की पहली चालक रहित पोड टैक्सी व्यवस्था शुरू करने के लिए रुचि पत्र (ईओआई) आमंत्रित करेगी, जिसे दिल्ली के धौला कुआं से हरियाणा के मानेसर के बीच चलाया जाना है।

केंद्र सराकर ने बस पोर्ट के  विकास की भी परिकल्पना की है, जो राज्य सरकारों के साथ मिल कर बड़े शहरों में बनाए जाएंगे। इस योजना के व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) के लिए 2,000 करोड़ रुपये अलग से रखे जाएंगे।  सड़क मंत्रालय ने लंदन की परिवहन व्यवस्था की तर्ज पर राज्य परिवहन अंडरटेकिंग के परिचालन मॉडल की भी परिकल्पना की है। ग्रेटर लंदन, इंगलैंड मेंं परिवहन व्यवस्था का दायित्व स्थानीय निकाय पर होता है। 

योजना के तहत एसटीयू बसों के बेड़े की खरीद के लिए पूंजी नहीं लगाएगी बल्कि इसकी जगह कंपनियों से टेंडर आमंत्रित करेगी और प्रति किलोमीटर किराये के भुगतान के आधार पर बसें चलाने के लिए हिस्सेदार बनाया जाएगा। इन बसों के किराये का निर्धारण राज्य सरकार करेगी, जिसे केंद्र सरकार का समर्थन होगा।
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