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राजस्थान, छत्तीसगढ़ व मप्र में 52 जिले सूखे

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली December 24, 2017

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सरकारों ने इस खरीफ सीजन के दौरान 52 जिलों की 270 तहसीलों में आधिकारिक रूप से सूखा घोषित कर दिया है। इस संबंध में संसद को सूचित किया गया है। अब तक छत्तीसगढ़ के 21 जिलों की 96 तहसीलों, मध्य प्रदेश के 18 जिलों की 133 तहसीलों और राजस्थान के 13 जिलों की 41 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। इस खरीफ सीजन के लिए राज्य 30 अक्टूबर तक किसी भी हिस्से में सूखा घोषित कर सकते हैं और रबी सीजन के लिए 31 मार्च तक।
 
इन तीन राज्यों ने केंद्र सरकार से 11,186 करोड़ रुपये की संयुक्त वित्तीय सहायता मांगी है। इसमें से मध्य प्रदेश ने 3,706 करोड़ रुपये, राजस्थान ने 3,078 करोड़ रुपये और छत्तीसगढ़ ने 4,401 करोड़ रुपये की मांग की। आंकड़े बताते हैं कि 2016-17 में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, केरल और तमिलनाडु ने सूखा घोषित किया था। इन्होंने संयुक्त रूप से 54,772 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की थी, जिसमें से 5,436 करोड़ रुपये मंजूर किए जा चुके हैं। रिपोर्ट बताती हैं कि मध्य प्रदेश में जलाशयों के कम स्तर और कई हिस्सों में खराब मॉनसून की वजह से चालू रबी सीजन के दौरान गेहूं की बुआई पर असर पड़ा है। पिछले गुरुवार तक 3,18,000 हेक्टेयर में गेहूं बोया जा चुका था।
 
2017 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से पांच प्रतिशत की कम बारिश के साथ समाप्त हुआ। मौसम विज्ञान के रूप में कहें तो दीर्घ अवधि औसत (एलपीए) के 95 प्रतिशत पर 'सामान्य से कम'। जून और जुलाई में धीमी शुरुआत के बाद यह अगस्त में और सितंबर की शुरुआत तक विस्तरित हो गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर प्रशांत चक्रवातों की वजह से ऐसा हुआ था, जो मॉनसूनी तरंगों को खींच रहे थे। इससे मध्य और उत्तरी भारत के ऊपर से बारिश गायब हो गई।
 
पूर्व में भारतीय मौसम विभाग ने अगस्त (एलपीए का 99 प्रतिशत) और सितंबर में सामान्य बारिश (कुछ न्यूनाधिक के दायरे में) होने का पूर्वानुमान जताया था। अगस्त में वास्तविक बारिश सामान्य से चार प्रतिशत कम रही और सितंबर में लगभग 12 प्रतिशत कम। देश के 630 जिलों में से जिन एक-तिहाई के आंकड़े सितंबर तक उपलब्ध थे, उनमें बारिश कम थी और बाकी हिस्से में सामान्य।
Keyword: agri, farmer, drought,,
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