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डीबी रियल्टी फिर जमाएगी धाक!

राघवेंद्र कामत /  12 21, 2017

डीबी रियल्टी के शाहिद बलवा ने अपने करियर में तीन अहम चढ़ाव और एक बड़ा उतार देखा है। पहला चढ़ाव तब आया, जब वर्ष 2010 में कंपनी का 1,500 करोड़ रुपये का आईपीओ 2.95 गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ था। दूसरा, जब वह और डीबी रियल्टी के सह-प्रवर्तक विनोद गोयनका दूरसंचार क्षेत्र में उतरे और 15 सर्किलों में परिचालन के लिए 1,537 करोड़ रुपये में 2जी लाइसेंस खरीदे। बाद में उन्होंने दूरसंचार उपक्रम स्वान टेलीकॉम में 45 फीसदी हिस्सेदारी यूएई की एटिसालेट को करीब 4,200 करोड़ रुपये में बेच दी। 

 
इस आईपीओ से बलवा और गोयनका भारत के धनाढ्य लोगों की जमात में शामिल हो गए। वर्ष 2010 की फोब्र्स की सबसे अमीर भारतीयों की सूची में गोयनका 54वें स्थान पर थे, जिनका नेटवर्थ 1.18 अरब डॉलर था। इस सूची में शाहिद बलवा 66वें स्थान पर थे, जिनका नेटवर्थ 1.06 अरब डॉलर था।  वर्ष 2009-10 के दौरान जब ज्यादातर डेवलपर मुश्किल दौर से गुजर रहे थे, तब डीबी रियल्टी ने शुद्ध मुनाफे में 77 फीसदी बढ़ोतरी और बिक्री में दोगुनी वृद्धि दर्ज की थी। 
 
हालांकि समूह को जल्द सफलता हासिल करने की एक बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी। डीबी का नाम सबसे पहले 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में आया। इस घोटाले के बारे में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने कहा कि पूर्व संचार मंत्री ए राजा के अधीन आने वाले दूरसंचार विभाग ने स्वान टेलीकॉम (बाद में एतिसालेट डीबी) और यूनिटेक वायरलेस जैसी कंपनियों को 2जी लाइसेंसों के आवंटन में नियमों का उल्लंघन किया। सीएजी ने आरोप लगाया कि ए राजा ने नई कंपनियों को औने-पौने दामों पर 2जी लाइसेंसों का आवंटन किया, जिससे सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। 
 
सीएजी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि स्वान ने गलत दस्तावेज दिए और उसका आवेदन यूएएसएल (यूनिफाइड एक्सेस सर्विस लाइसेंस) के नियम एवं शर्तों पर खरा नहीं उतरता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जिन सर्किलों में स्वान को लाइसेंस मिले, वहां पहले से परिचालित हो रही रिलायंस टेलीकॉम की लाइसेंस आवेदन के समय स्वान में 10.71 फीसदी हिस्सेदारी थी। यह इस नियम का उल्लंघन है कि किसी भी दूरसंचार कंपनी की दूसरी कंपनी में 10 फीसदी से कम हिस्सेदारी होनी चाहिए। हालांकि रिलायंस टेलीकॉम ने इन आरोपों से इनकार किया है। 
 
सीएजी ने कहा कि स्वान को पंजाब सर्किल में भी स्पेक्ट्रम दिया गया, जबकि वह प्राथमिकता सूची में चौथे स्थान पर थी। बाद में प्रवर्तकों ने स्वान में 45 फीसदी हिस्सेदारी 4,200 करोड़ रुपये में बेच दी, जबकि कंपनी ने 1,537 करोड़ रुपये में लाइसेंस खरीदे थे। पहले बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ एक ईमेल साक्षात्कार में डीबी के बलवा ने इस बात से इनकार किया था कि डीबी रियल्टी की एतिसालेट डीबी में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी थी। बलवा ने कहा, 'प्रवर्तकों और एतिसालेट डीबी ने लाइसेंस आवंटन से संबंधित सभी सूचनाएं और दस्तावेज सरकारी एजेंसियों को मुहैया कराए हैं और वे उनके साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। प्रवर्तकों ने कहा है कि एतिसालेट डीबी को लाइसेंस सरकार द्वारा आवश्यक सत्यापन और जांच-पड़ताल के बाद जारी किए गए थे, इसलिए हमारी तरह से कोई गलती नहीं की गई।' कंपनी की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है। डीबी रियल्टी का शेयर पिछले 6-7 साल के दौरान काफी गिर चुका है। कंपनी की बिक्री भी हर साल घट रही है। यह वित्त वर्ष 2011 में 1,268 करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2017 में घटकर 137 करोड़ रुपये रही है। कंपनी का शुद्ध लाभ भी गिरा है। यह वित्त वर्ष 2011 में 299 करोड़ रुपये था, जबकि पिछले दो साल से कंपनी को घाटा हो रहा है।  हालांकि अदालत के फैसले के बाद डीबी रियल्टी का शेयर 20 फीसदी चढ़ गया। इसमें अपर सर्किट लगा। इस शेयर का कोई भी बिकवाल नहीं था। 
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