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वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद बिजली-शिक्षा क्षेत्रों में किया सुधार

साहिल मक्कड़ /  12 20, 2017

बीएस बातचीत

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने चार साल पहले श्रम सुधारों की घोषणाओं के साथ जोरदार शुरुआत की थी। साहिल मक्कड़ के साथ साक्षात्कार में उन्होंने दावा किया कि वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद उनकी सरकार बिजली और शिक्षा क्षेत्रों में सुधार करने में कामयाब रही हैं। प्रमुख अंश : 

हाल में लव-जिहाद से जुड़े मामले में एक व्यक्ति की नृशंस हत्या और कथित गोरक्षकों द्वारा मुसलमानों पर हमलों से सभी दंग हैं? क्या ये मामले राजस्थान में सांप्रदायिक माहौल बिगडऩे का इशारा कर रहे हैं?

यह शायद आबादी के दबाव और समाज में बढ़ते रोष का नतीजा है। दुर्भाग्य से ऐसे चंद मामले राजस्थान में भी हुए हैं और हम उनसे दुखी हैं। राज्य सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से लिया है। राजसमंद घटना के 18 घंटे के भीतर हमने आरोपी को पकड़ लिया और इसके लिए पुलिस की निश्चित तौर पर सराहना होनी चाहिए। इसी तरह पहलू खान मामले में भी राज्य सरकार तुरंत हरकत में आई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। दूसरे राज्यों में भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं, लेकिन दुर्भाग्य से कुछ मामलों को ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है। जफर खान का मामला पूरी तरह अलग ढंग से पेश किया गया। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक उसकी मौत दिल का दौरा पडऩे से हुई थी, लेकिन उसे भी सांप्रदायिक रंग दे दिया गया। हमारी सरकार समाज के हर वर्ग की सुरक्षा और विकास चाहती है। 

ऐसी धारणा भी बन गई है कि राज्य सरकार कुछ खास हिंदू समूहों और गोरक्षकों के प्रति नरम रवैया रखती है?

बिल्कुल गलत बात है। ऐसा होता तो शंभू सिंह के समर्थन में उदयपुर में जुटे लोगों के साथ सरकार कड़ाई से पेश नहीं आई होती। वहां करीब 200 लोग हिरासत में लिए गए। पशु तस्कारी के मामलों में हम त्वरित कार्रवाई कर रहे हैं। अल्पसंख्यक समुदाय ही नहीं बल्कि सभी को भरोसा होना चाहिए कि हमारी सरकार शांति, कानून-व्यवस्था और सभी नागरिकों की सुरक्षा के लिए वचनबद्ध है। 

फिल्म पद्मावती को लेकर खासा विरोध प्रदर्शन हुआ है। क्या राज्य सरकार इस फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति देगी?

जैसा मैंने पहले कहा है, राजस्थान में कानून-व्यवस्था बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और हम किसी भी कीमत पर इससे समझौता नहीं करेंगे। जहां तक पद्मावती की बात है तो सेंसर बोर्ड को यह समझना होगा कि राज्य में समाज के एक हिस्से में इस फिल्म पर आक्रोश है और आगे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। अगर किसी को आपत्ति नहीं है तो हम इस फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति दे देंगे। 

राज्य की मौजूदा वित्तीय स्थिति क्या है? राजस्थान उन राज्यों में रहा है, जिनका राजकोषीय घाटा अधिक रहा है।  

वित्त वर्ष 2015-16 और 2016-17 में राजकोषीय घाटा राज्य के सकल घरेलू अनुपात (जीडीपी) के  3 प्रतिशत से अधिक रहा है। 'उदय' योजना के तहत बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की पिछली देनदारियों का बोझ वहन करने से राजकोषीय घाटा एक निश्चित सीमा से अधिक हो गया। केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा नियमित तौर पर मिलने से राज्य सरकार अपनी वित्तीय स्थिति का प्रबंधन और अधिक सहजता से करेगी। 

'उदय' के तहत अब तक क्या प्रगति हुई है?

2013 में जब हम सत्ता में आए तो बिजली क्षेत्र की हालत खस्ता थी। डिस्कॉम बुरी हालत में थीं और 2013-14 में उनका सालाना नुकसान 15,645 करोड़ रुपये पहुंच गया था। इन कंपनियों पर 72,727 करोड़ रुपये कर्ज था। हरेक यूनिट बिजली पर डिस्कॉम को 3.65 रुपये नुकसान हो रहा था। ऐसा नुकसान वित्तीय कुप्रबंधन, खासकर पिछली सरकार की गलत नीतियों की निशानी है। उदय लागू कर हमारी सरकार ने एक साहसिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों के 62,000 करोड़ रुपये से अधिक कर्ज का बोझ वहन किया है। इसमें कोई शक नहीं कि इससे राज्य सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ा है, लेकिन इससे डिस्कॉम को ब्याज के रूप में सालाना 5,000 करोड़ रुपये बचाने में मदद मिली है।

राज्य सरकार उदय के तहत बिजली दरें क्यों नहीं बढ़ा पाई है?

वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए हम लागत कम करने पर जोर दे रहे हैं न कि शुल्क बढ़ाने पर। अजमेर के एक छोटे से गांव में मैंने एक प्रयोग किया था, जिससे मुझे विश्वास हो गया कि लोगों की भागीदारी से पारेषण, वितरण एवं तकनीकी नुकसान कम किया जा सकता है। इसके आधार पर राज्य में पारेषण एवं तकनीकी नुकसान रोकने के लिए मुख्यमंत्री विद्युत सुधार अभियान की शुरुआत की गई। इसका अच्छा नतीजा सामने आया और पिछले साल नुकसान करीब 5 प्रतिशत कम हो गया, जिससे 1,800 करोड़ रुपये की बचत हुई। मौजूदा रुझान देखते हुए इस साल 2,800 करोड़ रुपये बचत हो सकती है। बिजली खरीद पर व्यय नियंत्रित किया गया है। पिछले तीन सालों में इसमें प्रति यूनिट मात्र 16 पैसे या सालाना 1.25 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती लागत के अनुरूप पिछले चार साल में दो बार बिजली दरें भी बढ़ाई गई हैं। इस साल वित्तीय घाटा वित्त वर्ष 2013-14 के 15,645 करोड़ रुपये से कम होकर 2,000-2,500 करोड़ रुपये पर ही सिमट सकता है। 

'राजस्थान रिसर्जेंट समिट' के क्या परिणाम सामने आए हैं? 

इस कार्यक्रम में 3.3 लाख करोड़ रुपये मूल्य के समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे, जिनमें 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाएं क्रियान्वित हो गई हैं या लागू होने के चरण में हैं। राज्य सरकार लगातार यह कहती रही है कि वह अकेले राजस्थान का सपना पूरा नहीं कर सकती है और इसमें उसे सभी पक्षों का सहयोग चाहिए। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारा कन्वर्जन रेट 60 प्रतिशत है और इस मामले में हम केवल गुजरात से पीछे हैं। इन निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन और लोगों के लिए रोजगार सृजन के लिए हम पिछले चार वर्षों से कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

राज्य सरकार ने साक्षरता दर बढ़ाने और प्राथमिक शिक्षा में सुधार के लिए क्या प्रयास किए हैं?

कम साक्षरता दर और शिक्षा व्यवस्था की खस्ता हालत हमें विरासत में मिली है। यह जानकर हैरानी होगी कि 2012-13 में राजस्थान में 28,000 प्राथमिक विद्यालय थे, जिनमें प्रत्येक में 30 से भी कम विद्यार्थी थे और करीब 8,800 ऐसे विद्यालय थे, जहां 15-15 विद्यार्थी भी नहीं थे। पहली से बारहवीं कक्षा के बीच विद्यार्थियों को तीन बार विद्यालय बदलने पड़े। शिक्षकों के 50 प्रतिशत से अधिक पद खाली थे और 40 प्रतिशत प्राध्यापकों के पद रिक्त थे। पिछले तीन सालों में हमने विद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए करीब 2,000 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। हमनें विद्यालयों का समेकन, एकीकरण और इनमें सुधार किए हैं। हमारे प्रयासों से प्रति कक्षा शिक्षकों की उपलब्धता में काफी सुधार हुआ है। परास्नातक (पोस्ट ग्रैजुएट) शिक्षकों को हरेक सप्प्ताह 33 कक्षाएं लेनी होती हैं। 1.1 लाख से अधिक शिक्षकों को प्रोन्नति दी गई है और 68,000 नए शिक्षकों की बहाली हुई है। अभी 49,500 शिक्षकों की बहाली और की जाएगी। विद्यालयों में विद्यार्थियों का नामांकन अनुपात भी सुधरा है और सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में 10 लाख का इजाफा हुआ है। वास्तव में राज्य में अब तो निजी विद्यालयों से बच्चे सरकारी विद्यालयों में दाखिला ले रहे हैं।

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