बिजनेस स्टैंडर्ड - पेट्रोल पर जीएसटी संग वैट भी
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पेट्रोल पर जीएसटी संग वैट भी

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 12 20, 2017

जीएसटी का बढ़ता दायरा

जीएसटी परिषद पेट्रोलियम पदार्थों यानी पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने के लिए राज्यों के बीच सहमति बनाने का प्रयास कर रही है। परिषद राज्यों को आश्वस्त कर रही है कि ऐसा होने से उनके राजस्व पर किसी तरह का नुकसान नहीं होगा। इसके तहत प्रस्ताव यह है कि पेट्रोलियम पर 28 फीसदी जीएसटी लगाई जाए और केंद्र एवं राज्यों को इस पर अपने यहां मौजूदा करों के हिसाब से कर लगाने की अनुमति दी जाए।

हालांकि राज्य पेट्रेालियम को जीएसटी में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि उनके कर राजस्व में इसकी हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है। ऐसे में इस पर मूल्य वर्धित कर (कर) या जीएसटी के अतिरिक्त अन्य कर लगाने की अनुमति मिलने से राज्यों को राजी किया जा सकता है।

केंद्र सरकार पेट्रोलियम को जीएसटी में लाने को इच्छुक है और उसे जीएसटी से ऊपर उत्पाद शुल्क लगाने की अनुमति मिल सकती है। बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'वर्तमान में राज्यों के कुल राजस्व में 40 फीसदी हिस्सेदारी पेट्रोलियम उत्पादों की है। ऐसे में जीएसटी दर से ऊपर कर लगाने या राज्यों और केंद्र को अतिरिक्त कर लगाने की आजादी राज्यों को मिलनी चाहिए।' 

इसका मतलब हुआ कि पेट्रोल-डीजल को 28 फीसदी के दायरे में रखा जा सकता है जबकि इसके ऊपर कर या उपकर लगाने का अधिकार राज्यों और केंद्र को मिल सकता है। सुशील मोदी ने कहा, 'दुनिया भर में पेट्रोलियम को लेकर यह आम सिद्घांत है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त कर सकेंगी।'

इस तरह की व्यवस्था के तहत फिलहाल मनोरंजन पर उपकर लगाया जा रहा है, जिसमें राज्यों को अधिकार दिया गया है कि वे सिनेमा पर 28 फीसदी से ऊपर शुल्क लगा सकते हैं। सरकार के एक अधिकारी ने कहा, 'अगर राज्यों को जीएसटी दर से अतिरिक्त कर लगाने की अनुमति मिलती है तो इससे पेट्रेालियम पर राज्यों को सहमत करना आसान हो सकता है।' मंगलवार को जीएसटी परिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि केंद्र सरकार पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे में लाना चाहती है और इसके लिए राज्यों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है।

अभी विभिन्न राज्यों में पेट्रोल-डीजल पर अलग-अलग कर लगता है। महाराष्ट्र में पेट्रोल पर वैट की दर सर्वाधिक 43.74 फीसदी है, वहीं डीजल पर 26.14 फीसदी वैट लगता है। दूसरी ओर निर्धारित केंद्रीय उत्पाद शुल्क भी लगाया जाता है, जो कीमत घटने या बढऩे पर कम या ज्यादा नहीं होता है। फिलवक्त क्रूड ऑयल, हाई स्पीड डीजल, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस और विमानन ईंधन (एटीएफ) जीएसटी के दायरे से बाहर है। एलपीजी पहले से ही जीएसटी में शामिल है। 

विनिर्मित वस्तुओं पर जीएसटी के तहत कर लगता है लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट लगाया जाता है, जिससे कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले पाती हैं और इसकी वजह से उनका मुनाफा प्रभावित होता है। डेलॉयट की सलोनी रॉय ने कहा, 'पेट्रोलियम को जीएसटी से बाहर रखना उपयुक्त नहीं है और इससे कई स्तरों पर कर लगता है।'

ईवाई के बिपिन सप्रा ने कहा, 'पेट्र्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के तहत लाने की जरूरत है ताकि जीएसटी का आधार बढ़ सके और कई स्तरों पर कर की व्यवस्था खत्म होगी। जहां तक राजस्व की बात है तो जीएसटी और राज्यों का वैट तब तक लगाया जा सकता है जब तक कि वैट की पूरी तरह से भरपाई नहीं हो जाती।'  अगस्त में जेटली ने राज्यों से पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट कम करने को कहा था, जिसे पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे में लाने के संकेत के तौर पर देखे जा सकते हैं।

(साथ में शाइन जैकब)
Keyword: petrol, diesel, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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