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दिवालिया परिसंपत्तियों को मिलेगी कर राहत!

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 12 18, 2017

कर बोझ को कम करने की तैयारी

कर राहत के लिए सरकार जीएसटी परिषद से कर सकती है संपर्क
सरकार द्वारा हाल में बनाई गई समिति इन बदलावों पर कर रही है विचार

सरकार इनसॉल्वेंसी (दिवालिया प्रक्रिया) के तहत खरीदी गई परिसंपत्तियों के लिए कर राहत देने पर विचार कर रही है। इनमें कर छूट जैसी सुविधाएं बजट में दी जा सकती हैं। सरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के संदर्भ में राहत दिए जाने के लिए जीएसटी परिषद से संपर्क कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि स्टांप शुल्क पर कर राहत के लिए राज्यों के  सहयोग की जरूरत होगी। इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया से गुजर रही कंपनियों को कर संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है जिससे समाधान प्रक्रिया जटिल हो गई है।

कंपनियों को परिसंपत्तियों के साथ साथ ब्रांड की बिक्री पर जीएसटी का सामना करना पड़ता है। इससे पहले सिक इंडस्ट्रियल कंपनीज (स्पेशल प्रोवीजंस) ऐक्ट के तहत कंपनियों को केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) से छूट प्राप्त थी। जीएसटी के शुरू होने से सीएसटी उपयोगी नहीं रह गया है। जीएसटी से छूट से कंपनियों को ऊंची कीमतों पर परिसंपत्तियों के लिए बोली लगाने और कर्जदाताओं को अधिक रकम देने में मदद मिलेगी।

डेलॉयट इंडिया के अमरीश शाह का कहना है, 'यदि जीएसटी छूट इनसॉल्वेंसी एंड बैंगक्रप्सी कोड (आईबीसी) प्रक्रिया के अधीन बेची गई संपत्तियों के लिए दी जाती है तो इससे ऋणदाताओं के लिए वसूली तेज करने में मदद मिलेगी।' इसी तरह भूमि समेत परिसंपत्तियों की बिक्री पर स्टांप शुल्क लगेगा। स्टांप शुल्क विभिन्न राज्यों से 3-10 के दायरे में अलग अलग है, लेकिन ज्यादातर राज्यों में यह 5 फीसदी के आसपास है।

स्टांप शुल्क राज्य के अधीन है और इसमें राज्यवार ढंग से संशोधन किए जाने की जरूरत है। भले ही केंद्रीय कानून 'इंडियन स्टांप ऐक्ट, 1989' मौजूद है, लेकिन दरों का निर्धारण राज्यों द्वारा ही किया जाता है। दरअसल, राज्यों को अधिनियम में किसी तरह का बदलाव करने और इस संबंध  में अपने स्वयं के नियम बनाने का अधिकार हासिल है। किसी खास राज्य में भी ये एक-दूसरे से भिन्न हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, महाराष्टï्र में बॉम्बे स्टांप ऐक्ट, 1958 है जो स्टांप शुल्क से जुड़े मामले देखता है। वहीं गुजरात, कर्नाटक, केरल, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे अन्य राज्यों में अपने स्वयं के स्टांप शुल्क कानून हैं। इसके अलावा खरीदी गई कंपनी के नुकसान कर कर छूट को उस कंपनी को स्थानांतरित करना भी एक बड़ी समस्या है जिसने इसे खरीदा हो।

मौजूदा कानूनों के अनुसार दिवालियापन की प्रक्रिया से जुड़ी कंपनी को मिलने वाली कर छूट को बरकरार नहीं रखा जा सकता, जिससे संभावित खरीदारों के लिए इनका अधिग्रहण करना आकर्षक नहीं रह गया है।  शाह ने कहा, 'कर के नजरिये से आईबीसी प्रक्रिया को अधिक मजबूत बनाने के लिए आईबीसी के तहत किसी कंपनी के आगे के नुकसान को अधिग्रहीत कंपनी को स्थानांतरित किया जाएगा।'

डेलॉयट की नीरू आहूजा का कहना है, 'आईबीसी के तहत शामिल कंपनियों के लिए कर समस्याओं से भविष्य में बड़ी तादाद में कर विवादों को बढ़ावा मिल सकता है। इसलिए यह सरकार को जल्द से जल्द इसका समाधान निकालने की जरूरत है।' कंपनी मामलों के मंत्रालय  में सचिव की अध्यक्षता में सरकार द्वारा हाल में बनाई गई समिति इन बदलावों पर विचार कर रही है।
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