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घटने लगा चीनी आयात का जंग, नए साल में बढ़ेगी इस्पात कंपनियों की चमक

उज्ज्वल जौहरी /  December 17, 2017

सर्दी की शुरुआत के बाद चीन में उत्पादन कम करने की पहल भारत के लौह उद्योग सहित दुनिया भर के इस्पात उत्पादकों के लिए अच्छी खबर है। कारोबारी माहौल में कुछ बाधाओं के बावजूद दूसरी तिमाही में घरेलू इस्पात कंपनियों का परिचालन प्रदर्शन शानदार रहा है। संभावनाएं बेहतर होने से पिछले छह महीने के दौरान इनके शेयरों की कीमतों में भी 30 से 40 प्रतिशत की तेजी आई है। विश्लेषकों के अनुसार कारोबारी माहौल में आगे भी सुधार होने से कई इस्पात कंपनियों का प्रदर्शन और उनका शेयर भी चमक सकता है।

 
उत्तरी चीन में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए चीन के अधिकारियों ने वहां 15 नवंबर से इस्पात उत्पादन में कटौती लागू करना शुरू कर दिया है। यह सिलिसला अगले साल मार्च के  मध्य तक जारी रहेगा। उत्पादन कम होने से दुनिया के इस सबसे बड़े उत्पादक देश से निर्यात भी घट जाएगा। इससे दुनिया भर में इस्पात कारोबार और क्षमता इस्तेमाल में सुधार आना चाहिए। विश्लेषकों का कहना है कि इसके संकेत दिखने भी लगे हैं। चीन में इस्पात भंडार तेजी से घट रहा है। इससे पिछले एक महीने के मुकाबले चीन के घरेलू रीबार और हॉट रॉल्ड कॉयल (एचआरसी) की कीमतों में 21 प्रतिशत तक की तेजी आई है। इस तेजी का बड़ा हिस्सा 15 नवंबर के बाद तब से आया जबसे उत्पादन कटौती लागू हुई है। इससे यह उम्मीद बंधी है कि कुछ समय में वैश्विक इस्पात कीमतें सुधरने लगेंगी। 
 
देसी इस्पात कंपनियों की बात करें तो घरेलू बाजार में भी इस्पात की कीमतों में नवंबर 2017 के बाद तेजी आनी शुरू हो गई है। हालांकि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से पहली छमाही खासकर जून तिमाही में देश में इस्पात की मांग पर असर पड़ा था। दूसरी तिमाही में इस्पात के अधिक आयात से भी उनके लिए दिक्कतें पैदा हुई थीं। दूसरी तिमाही में इस्पात आयात सालाना आधार पर 48 प्रतिशत बढ़कर 26 लाख टन हो गया। हालांकि तिमाही में इस्पात की ऊंची कीमतों और लागत कम होने से परिचालन मुनाफा अच्छा रहा था। 
 
एक छोटे अंतराल के बाद घरेलू कारोबार में फिर से सुधार दिखने लगा है। इसका कंपनियों के कारोबार पर अच्छा असर होना चाहिए। तीसरी तिमाही में कीमतों में कुछ बढ़ोतरी और पिछले 15 दिनों में लॉन्ग स्टील उत्पादों के दाम बढऩे के बाद आईआईएफएल के विश्लेषकों को लगता है कि इस्पात कंपनियों के राजस्व में तिमाही आधार पर सुधार हो सकता है। वैश्विक बाजार में चीन की डंपिंग घटने और बेहतर घरेलू कारोबार से इस्पात उत्पादकों के मार्जिन में इजाफा होगा। इस कारण पूरे इस्पात क्षेत्र के लिए उनका नजरिया सकारात्मक है। वे टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील को अधिक तवज्जो दे रहे हैं। 
 
चीन में उत्पादन कटौती का बड़ा असर जनवरी से दिखना शुरू होगा। फिलिप कैपिटल के विश्लेषकों का कहना है कि इससे वैश्विक स्तर पर इस्पात कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ेगा, जिससे भारतीय इस्पात कंपनियों को लाभ होगा। उनके अनुसार मार्च 2018 तिमाही से देसी इस्पात कंपनियों को इस रुझान से मदद मिलेगी। हाल में कोयला और लौह-अयस्क सहित कच्चे माल की कीमतों में आई तेजी से भी वैश्विक बाजारों और भारत में इस्पात कीमतों को मजबूती मिलेगी। हालांकि ऐसी स्थिति में जिन देसी कंपनियों की इन कच्चे माल तक सुरक्षित पहुंच रही है, उन्हें अधिक लाभ होगा। जो कंपनियां कच्चा माल आयात करती हैं, उन्हें इनमें तेजी का बोझ ग्राहकों पर डालना होगा। घरेलू स्तर पर भी मांग में तेजी आने की उम्मीद है। तीसरी तिमाही आम तौर पर इस्पात कारोबार के लिए मजबूत अवधि मानी जाती है, क्योंकि इस दौरान निर्माण गतिविधियों में तेजी आती है। विश्लेषकों का कहना है कि अब जीएसटी से पैदा हुई दिक्कतें भी कम हो रही हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की नजर में अगली दो से तीन तिमाहियों में भारतीय इस्पात कंपनियों की आय में मजबूत वृद्धि होगी। यह ब्रोकरेज कंपनी टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू और जिंदल स्टील ऐंड पावर को लेकर उत्साहित है।
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