बिजनेस स्टैंडर्ड - इलेक्ट्रॉनिक्स पर सीमा शुल्क बढ़ा
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इलेक्ट्रॉनिक्स पर सीमा शुल्क बढ़ा

अर्णव दत्ता और दिलाशा सेठ / नई दिल्ली December 15, 2017

देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने के मकसद से सरकार ने कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामानों और छोटे उपकरणों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है। मोबाइल फोन, टेलीविजन सेट, डिजिटल कैमरों, माइक्रोवेव, इलेक्ट्रिकलैंप, बिजली के मीटर के साथ अन्य वस्तुओं पर सीमा शुल्क 5 से 10 प्रतिशत  तक बढ़ाया गया है। वहीं दीर्घावधि कदमों के तहत देश में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के इस कदम से अगले कुछ महीनों में इन श्रेणी के सामान के दाम बढ़ सकते हैं। 

भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सरकार आयात पर निर्भरता घटाने को अर्थव्यवस्था के लिए अहम मान रही है। एसोचेम के आंकड़ों के मुताबिक भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान की मांग 2020 तक 41 प्रतिशत सीएजीआर (चक्रवृद्धि सालाना वृद्धि दर) से बढ़ेगी। इस समय भारत में 3,00,000 करोड़ रुपये से ज्यादा उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक सामान का आयात सालाना होता है। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि अप्रत्यक्ष स्रोतों से कर संग्रह कम होने के दबाव को भी कम करने में मदद मिलेगी। 

मोबाइल फोन एवं अन्य वायरलेस दूरसंचार उपकरणों पर सीमा शुल्क हाल के 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है, जो सरकार के चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) का हिस्सा है। इससे भारत में 2019 तक स्थानीय विनिर्माण 50 करोड़ यूनिट बढऩे की संभावना है। स्थानीय उत्पादन को लेकर मांग बढ़ी है, ऐसे में हैंडसेट का आयात उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है। काउंटरप्वाइंट रिसर्च के अनुमान के मुताबिक 2014 में जहां 60 प्रतिशत हैंडसेट का आयात हुआ था, वहीं अब हिस्सेदारी घटकर 20 प्रतिशत रह गई है। 2017 में भारत का हैंडसेट बाजार 28 करोड़ यूनिट का होने की संभावना है। 

इंडियन सेलुलर एसोसिएशन (आईसीए) का अनुमान है कि इस साल 30,000 करोड़ रुपये के हैंडसेट का आयात हुआ है, जबकि इसकी तुलना में 1,25,000 करोड़ हैंडसेट का विनिर्माण स्थानीय स्तर पर हुआ है। वहीं विनिर्माण इकाइयों की संख्या 2017 में बढ़कर 120 से ज्यादा हो गई है, जो 2014 में महज 3 थीं। आईसीए के अध्यक्ष पंकज महेंद्रू ने कहा, 'स्थानीय उपकरण विनिर्माताओं की इस समय पर्याप्त क्षमता है। इसलिए छोटी फर्में अपने संयंत्र नहीं स्थापित कर रही हैं और इस तरह से हैंडसेट के आयात के बजा वे स्थानीय स्तर पर खरीद शुरू कर चुकी हैं।' हाल में उठाया गया कदम आयात को और हतोत्साहित करेगा, क्योंकि जुलाई महीने से चीन से फीचर फोन खासकर 4जी फोन का आयात बढ़ा था। 

इस समय मोबाइल हैंडसेट क्षेत्र के दिग्गज जैसे ऐपल, शियोमी और लेनोवो हैंडसेट का आयात कर रही हैं क्योंकि उनकी स्थानीय सोर्सिंग क्षमता मांग को पूरी नहीं कर पा रही है। ऐपल जहां 80 प्रतिशत हैंडसेट का आयात करती है, वहीं शियोमी व लेनोवो का आयात बहुत कम, करीब 5 प्रतिशत है। बहरहाल यह सभी फर्में स्थानीय स्तर पर विनिर्माण बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से ऐपल के हैंडसेट के दाम बढ़ सकते हैं। टीवी सेट पर सीमा शुल्क भी 5 प्रतिशत बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। देश की सबसे बड़ी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी सैमसंग जहां सभी टीवी सेटों का विनिर्माण स्थानीय स्तर पर करती है, वहीं छोटी फर्मों को संकट का सामना करना पड़ सकता है। सोनी ने अपने सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांड ब्रेविया सिरीज का 2015 से ठेके पर विनिर्माण कराना शुरू कर दिया है। सोनी के एक अधिकारी ने कहा, 'हम अधिसूचना का मूल्यांकन कर रहे हैं और अभी इसके प्रभाव की गणना बाकी है।' 

विडियोकॉन के मुख्य विनिर्माण अधिकारी अभिजित कोटनिस ने कहा, 'असेंबल्ड एलईडी पैनलों (मॉड्यूल्स) पर अतिरिक्त शुल्क भी शून्य से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया गया है। यह एक अहम कदम है जिससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इससे विदेशी उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनियां भी यहां विनिर्माण के लिए प्रोत्साहित होंगी। बहरहाल सीमा शुल्क में बढ़ोतरी के असर के बारे में कुछ भी कहना जल्दबादी होगी।' उद्योग संगठन कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड अप्लायंसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष शर्मा ने कहा कि शुल्क बढ़ाने से स्थानीय स्तर पर विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और इससे ज्यादा रोजगार का सृजन होगा। गोदरेज अप्लायंसेज के ईवीपी और बिजनेस हेड कमल नंदी ने माइक्रोवेव पर सीमा शुल्क दोगुना कर 20 प्रतिशत किए जाने का स्वागत किया है। 
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