बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी में आएगा और सामान : सुशील मोदी
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जीएसटी में आएगा और सामान : सुशील मोदी

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली December 14, 2017

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा है कि जीएसटी परिषद पेट्रोलियम उत्पादों, बिजली और कुछ और वस्तुओं को भविष्य में जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि आने वाले दिनों में जीएसटी स्लैब में कमी आ सकती है। वहीं पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि अक्टूबर महीने में कई अन्य कारणों के साथ मझोले व छोटे आकार के उद्योगों के उत्पादन में कमी आने की वजह से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के संग्रह में गिरावट आई है। उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी के तहत मुनाफारोधी कदम उठाए जाने से उद्योग जगत के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है। 

उद्योग संगठन फिक्की की सालाना बैठक में मोदी ने कहा, 'बिजली, रियल एस्टेट, स्टांप शुल्क और पेट्रोलियम उत्पाद को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है। यह हमारी कवायद होगी।' बहरहाल उन्होंने कहा कि इसके लिए समय सीमा निर्धारित करना कठिन होगा कि ऐसा कब तक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बगैर संविधान में संशोधन के ऐसा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो यह सबसे ज्यादा कर वाले ढांचे में होगा और और राज्यों को इसके ऊपर उपकर लगाने की स्वतंत्रता होगी जिससे वे अपने राजस्व एकत्र कर सकें। 

इस समय राज्य सरकारें व केंद्र अपने कुल राजस्व का 40 प्रतिशत पेट्रोलियम उत्पादों से पाते हैं। मोदी ने यह भी संकेत दिए कि  कर संग्रह में स्थिरता आने के बाद कर ढांचे में कमी की जाएगी। मौजूदा जीएसटी में 5 कर ढांचा 0 प्रतिशत, 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत है। इसके अलावा कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त जीएसटी सेस लगाया गया है। हालांकि इस मसले पर अंतिम फैसला परिषद द्वारा लिया जाएगा, लेकिन उन्होंने कहा, 'संभावना यह है कि सबसे ज्यादा कर ढांचे 28 प्रतिशत को घटाकर 25 प्रतिशत किया जा सकता है और 12 प्रतिशत व 18 प्रतिशत कर ढांचे का विलय एक में किया जा  सकता है।'

पिछले 4 महीने में नेटवर्क के माध्यम से 3,20,000 रिटर्न दाखिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि फॉर्म को सरल किया जा रहा है, जिससे कर भुगतान ासान काम बन सके। इसके अलावा इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी का काम भी चल रहा है। मोदी ने यह भी कहा कि जीएसटी भी मूल्यवर्धित कर की तरह सफल होगा और उन्होंने उम्मीद जताई कि 2-3 साल के बाद राज्य सरकारें केंद्र से मुआवजा नहीं मांगेंगी। 

मित्रा ने कहा कि अक्टूबर महीने में सितंबर की तुलना में जीएसटी संग्रह में कमी आई है। उन्होंने कहा, 'गिरावट की एक वजह यह है कि एमएसएमई का उत्पादन करीब 40 प्रतिशत गिरा है।' अक्टूबर में जीएसटी संग्रह घटकर 83,346 करोड़ रुपये रह गया है, जो सितंबर में 92,150 करोड़ रुपये था। जम्मू कश्मीर के वित्त मंत्री हशीब द्राबू ने कहा कि जीएसटीएन की तैयारियों के बारे में परिषद को जानकारी दी जानी चाहिए। द्राबू ने कहा कि जीएसटीएन इस मामले में असफल रहा है और इसकी खामियों को दूर किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने इन्फोसिस का बचाव करते हुए कहा कि मैं विश्वास के साथ कह सक ता हूं कि हमने इसके लिए बेहतरीन कंपनी की सेवाएं ली हैं। 
Keyword: GST, economy, electricity, जीएसटी , पेट्रोलियम उत्पाद,,
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