बिजनेस स्टैंडर्ड - मार्च तिमाही में जारी रहेगा विनिवेश
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मार्च तिमाही में जारी रहेगा विनिवेश

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 12 13, 2017

सरकारी खजाने में आएगा मोटा धन

दो विलय, 3-3 आईपीओ और ओएफसी, भारत 22 ईटीएफ का एक और चरण कतार में
अगले 3 महीने में हिंदुस्तान पेट्रोलियम का ओएनजीसी द्वारा अधिग्रहण का काम पूरा होगा
इस सौदे से सरकारी खजाने में 30,000 करोड़ रुपये आएंगे
एनबीसीसी लिमिटेड पहले ही हिंदुस्तान स्‍टीलवर्क्‍स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को इस साल खरीद चुकी है
एनएचपीसी, पावर फाइनैंस कॉर्पोरेशन और सेल में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी, एनएलसी में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी, ग्रामीण विद्युतीकरण निगम में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी और इंडियन ऑयल में 3 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना है

केंद्र सरकार 2017-18 का विनिवेश लक्ष्य पूरा करने के लिए वित्त वर्ष के शेष महीनों में विनिवेश गतिविधियां तेज रखेगी। सरकार ने  दो विलय पूरे करने, 3 और आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) लाने, बिक्री की 3 पेशकश लाने और भारत-22 एक्सचेंज ट्रेडेड फंड का दूसरा हिस्सा पेश करने का लक्ष्य रखा है।

अधिकारियों को विश्वास है कि अगले 3 महीने में हिंदुस्तान पेट्रोलियम का ओएनजीसी द्वारा अधिग्रहण का काम पूरा कर लिया जाएगा। इस सौदे से ही सरकारी खजाने में 30,000 करोड़ रुपये आएंगे। सरकारी निर्माण कंपनी एनबीसीसी लिमिटेड ने पहले ही हिंदुस्तान स्‍टीलवर्क्‍स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को इस साल खरीद लिया है। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक वह एक और छोटी कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग पीएसयू को खरीद सकती है, जिसमें संभावित कंपनियां हिंदुस्तान प्रीफैब, इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड, एनपीसीसी लिमिटेड और एचएससीसी लिमिटेड शामिल हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इनमें से किसी एक को इस वित्त वर्ष में एनबीसीसी अपने कब्जे में ले सकती है। 

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'भारत 22 ईटीएफ के मामले में निवेशक बहुत ज्यादा रुचि ले रहे हैं। इसके दूसरे चरण की पेशकश जनवरी मार्च तिमाही में किए जाने के बारे में जल्द फैसला किया जाएगा।' 22 स्टॉक ईटीएफ पिछले महीने पेश किया गया था, जिससे केंद्र सरकार को 14,500 करोड़ रुपये मिले थे, जिसे 4 गुना ओवरसब्सक्रिप्शन मिला था। 

जनरल इंश्योरेंस कंपनी और न्यू इंडिया एश्योरेंस के इस साल की शुरुआत में बाजार में उतरने के बाद सरकार कम से कम 3 और आईपीओ 31 मार्च के पहले बाजार में लाएगी। इसमें रक्षा क्षेत्र की दिग्गज हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और दो रेल कंपनियां इरकॉन  और रााइट्स शामिल हैं। ऐसा माना जा रहा है कि आईआरसीटीसी, आईआरएफसी, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स, भारत डायनामिक्स और मझगांव डॉकयार्ड के  आईपीओ लाने की योजना पर काम चल रहा है, लेकिन इस वित्त वर्ष में यह काम पूरा होने की संभावना कम है। 

इसके अलावा ओएफ एस लाने की भी तैयारी चल रही है। एनएचपीसी, पावर फाइनैंस कॉर्पोरेशन और सेल मेंं 10 प्रतिशत हिस्सेदारी, एनएलसी में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी, ग्रामीण विद्युतीकरण निगम में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी और इंडियन ऑयल में 3 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना है। सूत्रों का कहना है कि इस साल के अंत तक  इनमें से 3 का काम पूरा कर लिया जाएगा। दीपम ने अगस्त में एनटीपीसी की 7 प्रतिशत हिस्सेदारी पहले ही बेच दी है। 

बिजनेस स्टैंडर्ड ने इसके पहले एक खबर में कहा था कि इस साल न सिर्फ 2009 के बाद पहली बार विनिवेश का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा बल्कि यह  20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ सकता है। इससे राजस्व में आने वाली कमी की कुछ भरपाई हो सकेगी।
Keyword: Disinvestment, IPO, ONGC, HPCL, विनिवेश , आईपीओ, हिंदुस्तान पेट्रोलियम,
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