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करदाताओं की परेशानी घटाएगा बजट

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली December 12, 2017

करदाताओं का उत्पीडऩ कम करने और अधिकारियों की कार्यकुशलता में सुधार के लिए आगामी केंद्रीय बजट में आयकर प्रशासन और निर्धारण व्यवस्था में सुधार की पेशकश हो सकती है। करदाताओं के प्रति मित्रवत होने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार आयकर अधिनियम में उचित संशोधन की घोषणा कर सकती है, जिससे 'न्यायक्षेत्र मुक्त निर्धारण' हो सके, जिसका मतलब है कि कोई भी अधिकारी किसी भी करदाता को किसी के न्यायक्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से नोटिस भेज सकता है। 
 
देश के किसी भी करदाता की देनदारी के निर्धारण का अधिकार अधिकारियों को देने के लिए आयकर कानून में बदलाव की जरूरत होगी। इस कदम से करदाताओंं का उत्पीडऩ कम होगा और भ्रष्टाचार घटेगा क्योंकि कर का निर्धारण कर ई मेल से भेजा जाएगा और इसमें मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा।  इस कदम का मतलब यह होगा कि नई दिल्ली के किसी करदाता को चेन्नई में बैठा अधिकारी कर नोटिस भेज सकेगा और उसे ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जवाब देना होगा। इसमें आमने सामने से चर्चा की जरूरत नहीं होगी। 
 
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'इस कदम का मकसद भ्रष्टाचार और उत्पीडऩ के मामलों को कम करना और विभाग की कार्यकुशलता में सुधार करना है। यह करदाताओं के प्रति मित्रवत कदम है। उम्मीद की जा रही है कि यह व्यवस्था अगले वित्त वर्ष से लागू होगी।' मौजूदा अधिनियम के मुताबिक कोई कर अधिकारी दाखिल किए गए रिटर्न पर नोटिस भेज सकता है। अब यह नोटिस कंप्यूटर से या निर्धारण अधिकारियों के एक समूह की ओर से जारी होगा, ऐसे में करदाता चुनौती देते हुए कह सकता है कि वह अधिकृत निर्धारण अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, 'इस तरह की स्थिति से बचने के लिए प्रावधान में बदलाव की जरूरत होगी, जिससे आयकर विभाग की ओर से नोटिस जारी हो सके।' 
 
अगर ऐसा कदम उठाया जाता है तो कर मामलों का तेजी से समाधान होगा और लंबित मामलों की संख्या में कमी आएगी।  पिछले सप्ताह वरिष्ठ कर अधिकारियोंं की बैठक हुई थी, जिसमेंं न्यायक्षेत्र मुक्त निर्धारण लागू करने में कानूनी चुनौतियोंं पर चर्चा हुई।  अधिकारी ने कहा, 'कोई व्यक्ति एक निश्चित न्यायिक क्षेत्र के किसी अधिकारी को रिटर्न दाखिल कर सकता है, लेकिन अगर उस मामले की जांच होती है और आपकी कोई आपत्ति है तो यह किसी अन्य अधिकारी के हवाले किया जा सकता है।'
 
इसके साथ ही कर विभाग कार्यात्मक विशेषज्ञता लागू करने पर भी विचार कर रहा है। इसका मकसद भी कार्यकुशलता बढ़ाना और करदाताओं की परेशानी कम करना है। इसके साथ ही निर्धारण, पुष्टि, मांग करने, रिकवरी और आदेश पारित करने जैसे कर अधिकारी के काम को अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है। इस समय एक ही अधिकारी करदाता की पूरी प्रक्रिया देखता है, जिसमें निर्धारण से लेकर मांग करने और आदेश पारित करने का काम शामिल है। 
 
प्रस्ताव के मुताबिक अगर किसी अधिकारी के ऊपर काम का बोझ ज्यादा है को किसी दूसरे इलाके में स्थित किसी अधिकारी को निर्धारण या कोई अन्य काम करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। आयकर विभाग की सालाना कार्ययोजना में याचिका प्रबंधन, ज्यादा मूल्य वाले मामलोंं को निपटाना, तलाशी और जब्ती करना, व्यवस्था को मजबूत करना और जांच दल बनाकर काम करना शामिल है। 
Keyword: budget, tax,,
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