बिजनेस स्टैंडर्ड - 'खत्म हों कर संबंधी विसंगतियां'
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'खत्म हों कर संबंधी विसंगतियां'

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली December 11, 2017

इंटरनेट और मोबाइल उद्योग के एक संगठन ने डिजिटल वस्तु एवं सेवाओं पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दर 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत या इससे भी कम किए जाने की मांग की है जीएसटी परिषद की बैठक अगले महीने होने वाली है। 

इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन आफ इंडिया (आईएएमएआई) ने अपनी हाल की रिपोर्ट में कहा है कि ई कॉमर्स कंपनियों पर जीएसटी के तहत लगने वाला 1 प्रतिशत स्रोत पर संग्रह किया गया कर (टीसीएस) खत्म किए जाने की मांग की है, यहां तक कि सरकार के भीतर भी इसे लेकर अलग अलग राय है। 

निशीथ देसाई एसोसिएट्स के साथ मिलकर तैयार की गई एसोसिएशन की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इक्वलाइजेशन लेवी खत्म  की जानी चाहिए या ऐसी व्यवस्था लाई जानी चाहिए, जिससे अप्रवासी अपने गृह देश में टैक्स क्रेडिट पा सकें। आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष गर्ग द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अरब डॉलर की डिजिटल इकोनॉमी बनाने का सरकार का लक्ष्य हासिल करने के लिए  कर अनुमान व स्पष्टता की जरूरत है।

इसमें कहा गया है कि 2024 के पहले 2022 तक ही लक्ष्य पूरा कर लिया जाना चाहिए, क्योंकि यही सही तरह की रााजनीति है। इसमें यह भी कहा गया है कि  ऑनलाइन इन्फॉर्मेशन डेटाबेस एक्सेस ऐंट रेट्राइवल सर्विसेज (ओआईडीएआर)और आईपी ट्रांजैक्शन सहित ज्यादातर तकनीकी सेवाएं जीएसटी के तहत 18 प्रतिशत कर के दायरे में हैं। ऐसा निर्धारित दर या अवशिष्ट दर की वजह से है। सिर्फ कुछ ऐसी सेवाएं व लेनदेन ही हैं जो इस समय 12 प्रतिशत कर के दायरे में हैं। 

इसमें कहा गया है कि डिजिटल लेन देन के मामले में बदलाव करके कर 12 प्रतिशत या इससे कम किया जाना चाहिए। निशीथ देसाई एसोसिएट्स के अनंत मालती ने कहा कि हमने डिजिटल वस्तु एवं सेवाओं पर अनुचित कराधान की समस्या का समाधान करने की मांग की है, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था की वृद्धि के लिए माहौल बनाने की राह में बाधा है। इसके अलावा ज्यादा कर एवं लेन देन शुल्क भी इसी वजह से प्रतिगामी है। 
 
Keyword: GST, IAMAI, TCS, जीएसटी, आईएएमएआई,
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