बिजनेस स्टैंडर्ड - नवाचार की कमी
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नवाचार की कमी

संपादकीय /  December 11, 2017

प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अव्वल कंपनी सिस्को सिस्टम्स के कार्यकारी अध्यक्ष जॉन चैंबर्स ने हाल ही में कहा कि ऐसे वक्त में जबकि कई बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों की तादाद कम कर रही हैं, स्टार्टअप में यह क्षमता है कि वे देश में रोजगार सृजन के वाहक बन सकती हैं। यह सच है कि भारतीय स्टार्टअप, खासतौर पर प्रौद्योगिकी क्षेत्र की स्टार्टअप फंड जुटाने और बढ़ती तादाद की वजह से चर्चा में हैं। नैसकॉम के ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017 में 1,000 से अधिक नई स्टार्टअप सामने आई हैं जबकि इनकी कुल तादाद बढ़कर 5,200 हो गई। ट्रैक्सन के आंकड़े बताते हैं कि बिज़नेस टु बिज़नेस (बी2बी) ई कॉमर्स स्टार्टअप ने इस वर्ष अब तक 19.65 करोड़ डॉलर की राशि जुटाई है जो सन 2010 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है। 

परंतु आंकड़े अक्सर अधूरी कहानी कहते हैं। देश में जहां स्टार्टअप की तादाद बढ़ी है, वहीं मौलिकता और नवाचार की कमी बनी हुई है। स्टार्टअप का उद्देश्य ही है नवाचार करना, न कि किसी अन्य जगह सफलतापूर्वक चल रहे मॉडल का अनुकरण करना। यह सच है कि हाल के वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने भारतीय स्टार्टअप में निवेश किया है लेकिन उसे देश में उद्यमिता की सफलता के मानक के रूप में आकलित नहीं किया जाना चाहिए। गत वर्ष हॉर्वर्ड बिज़नेस रिव्यू ने दुनिया भर में स्टार्टअप के जरिये रोजगार सृजन पर सवाल उठाए थे। 

उसकी दलील थी कि कई कंपनियों अपने पहले ही वर्ष में नाकाम हो जाती हैं और स्टार्टअप को रोजगार तैयार करने वालों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। एक अन्य अध्ययन में कहा गया कि जो स्टार्टअप 11 साल तक सुचारु रूप से काम करती हैं वही रोजगार पर प्रभाव छोड़ पाती हैं और उनकी नाकामी की सबसे बड़ी वजहों में से एक नवाचार की कमी भी है। हकीकत में फोब्र्स के एक हालिया सर्वेक्षण में कहा गया कि 77 फीसदी वेंचर कैपिटलिस्ट्स को भारतीय स्टार्टअप में विशिष्ट कारोबारी मॉडल की कमी दिखी और उन्होंने अपने वैश्विक समकक्षों की तुलना में बहुत कम अंतरराष्ट्रीय पेटेंट कराए। 

अमेरिकी की सिलिकन वैली और उसके आसपास सबसे बेहतरीन स्टार्टअप पनपीं। ऐपल, फेसबुक, गूगल, एमेजॉन और ट्विटर इसके उदाहरण हैं। इसके अलावा इजरायल, दक्षिण कोरिया और चीन भी लगातार वैश्विक नवाचार के क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ रहे हैं। दक्षिण कोरिया, चीन और इजरायल वैश्विक दिग्गजों से कतई पीछे नहीं हैं। भारत ने भी कुछ प्रगति की है लेकिन अभी भी उसे शीर्ष श्रेणी में जगह बनाने में बड़ी मेहनत करनी है। 

किसी देश में नवाचार को लेकर जो हालत है वह स्टार्टअप क्षेत्र में भी दिखती है। उदाहरण के लिए इजरायल को उसके स्टार्ट अप के लिए जाना जाता है। उसने समुद्री आवागमन के आंकड़े जुटाने वाली कंपनियों के लिए क्लाउड आधारित ड्रोन व्यवस्था विकसित की है। दक्षिण कोरिया में फिनटेक और साइबर सुरक्षा क्षेत्र के उद्यमियों की चर्चा है। चीन की दो शीर्षस्थ स्टार्टअप कंपनियां बच्चों को एक-एक कर वीडियो प्रशिक्षण देने वाली और (विपकिड) गहन अध्ययन के लिए विकसित प्रोसेसर चिप (कैंब्रिकॉन) बनाने वाली हैं। ज्यादातर मामलों में अधिकांश नवाचार शुरुआती दौर की कंपनियां करती हैं जिनके निहित स्वार्थ नहीं होते और जो अलग सोचने का माद्दा रखती हैं। 

इसके विपरीत भारत की अधिकांश स्टार्टअप लागत कम रखने को ध्यान में रखते हुए काम करती हैं। नवाचार के प्रयास की तुलना में यह एक आसान नीति है। परंतु लंबी अवधि में यह तरीका अदूरदर्शी साबित होता है क्योंकि लागत लाभ की प्रतिस्पर्धा संभव है। स्टार्टअप को नई सोच अपनानी चाहिए और नवाचार पर काम करना चाहिए। लागत पर काम करने की तुलना में यह ज्यादा बेहतर है।
Keyword: Startup, companies, funding, traction, e-commerce, स्टार्टअप, प्रौद्योगिकी, फंड, ट्रैक्सन,
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