बिजनेस स्टैंडर्ड - आतंकियों और भ्रष्टाचारियों की ढाल नहीं निजता : रवि शंकर प्रसाद
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, April 21, 2018 03:26 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

आतंकियों और भ्रष्टाचारियों की ढाल नहीं निजता : रवि शंकर प्रसाद

किरण राठी /  12 10, 2017

बीएस बातचीत

भारत का साइबर स्पेस सुरक्षित है और रोजगार की दृष्टि से यह भविष्य में अहम क्षेत्र होगा। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद से बात की किरण राठी ने। प्रस्‍तुत हैं बातचीत के संपादित अंश:

साइबर हमलों और डेटा चोरी की खबरें आ रही हैं। भारत का साइबर स्पेस कितना सुरक्षा है?

भारत का आईटी सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है। मैं यह नहीं कहूंगा कि साइबर हमलों का प्रयास नहीं हुआ है। कुछ समय पहले रैनसमवेयर हमला हुआ था लेकिन हमने पहले ही इससे बचने के उपाय कर लिए थे। इसलिए इसका न्यूनतम असर हुआ। इस पूरे मामले में मेरी राय स्पष्ट और व्यावहारिक है। हम सूचना हाइवे बना रहे हैं और भारत में सूचना हाइवे की सबसे बड़ी सफलता यह है कि हम आम आदमी की जिंदगी में बदलाव ला रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण उमंग ऐप है। हमने इसे प्रायोगिक परियोजना के तौर पर शुरू किया था और कुछ ही हफ्तों में 112 सेवाओं को इस पर डाल चुके हैं। इस ऐप को 10 लाख बार डाउनलोड किया जा चुका है। दूसरी बात यह है कि दुनिया में ऐप का सबसे ज्यादा डाउनलोड भारत में ही होता है। फेसबुक और ट्विटर तथा लिंक्डइन जैसे नए तकनीकी प्लेटफॉर्मों में भारतीय यूजरों की संख्या सबसे अधिक है। सूचना हाइवे दिन ब दिन मजबूत हो रहे हैं। कभी-कभी दुर्घटनाएं हो सकती हैं। लेकिन क्या दो वाहनों के टकराने से आप हाइवे बनाना बंद कर देते हैं? इसका उत्तर है नहीं। आपको अपनी सीट बेल्ट मजबूती से बांधनी होगी, शराब पीकर गाड़ी चलाने के नियम का पालन करना होगा और अपनी रफ्तार पर नियंत्रण रखना होगा। उसी तरह साइबर नैशनल हाइवे के मामले में भी सावधानी बरतने की जरूरत है।

भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं की जमात में शामिल होने के लिए कदम बढ़ा रहा है। ऐसे में क्या आपको लगता है कि इतने भारी इंटरनेट ट्रैफिक को संभालने के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा है?

हम अपने साइबर इकोसिस्टम में कारगर तरीके से सुधार कर रहे हैं। हमारी इंडियन कंप्यूटर एमरजेंसी रिस्पांस टीम (सर्ट-इन) बेहद कारगर है। इसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मिल रहा है। हम ऊर्जा और वित्त क्षेत्र के लिए एक अलग सर्ट-इन बनाने पर विचार कर रहे हैं। साइबर सुरक्षा उपायों के लिए हमारे पास भारतीय सॉल्यूशंस हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि  हम साइबर सुरक्षा के लिए मानव संसाधनों को तैयार कर रहे हैं। आपको सभी बैंकों के लिए साइबर ऑडिटर की जरूरत है। हमने सभी विभागों से साइबर सुरक्षा के लिए एक अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। साथ ही हमने न्यायाधीशों और पुलिसकर्मियों के लिए एक व्यापक साइबर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इसके लिए मानव संसाधन तैयार करने के लिए हमने इलेट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय संस्थान (एनआईईएलआईटी) से साइबर सुरक्षा पर अल्पकालिक पाठ्यक्रम शुरू करने को कहा है।

साइबर सुरक्षा में कितने रोजगार पैदा होने की संभावना है?

इस क्षेत्र में अनगिनत रोजगार पैदा होंगे। भारत साइबर सुरक्षा से जुड़े छोटे उत्पादों का केंद्र बनने जा रहा है। भारतीय स्टार्टअप कंपनियां सस्ते साइबर सुरक्षा उत्पाद तैयार करेंगी जो छोटी और मझोली कंपनियों की साइबर सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करेंगे। जहां तक कुल रोजगार की बात है कि भारतीय आईटी क्षेत्र में करीब 40 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। इनमें से एक तिहाई महिलाएं हैं। इसी तरह इस क्षेत्र में 1.30 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। करीब 10 लाख लोग साझा सेवा केंद्रों में काम कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में करीब 3 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। छोटे शहरों में भी बीपीओ खुले हैं। एक नया डिजिटल इकोसिस्टम बनाया जा रहा है। इसी तरह देश में स्टार्ट अप के क्षेत्र में क्रांति हो रही है। शीर्ष संस्थानों से निकल रहे मेधावी छात्र नई कंपनियां शुरू कर रहे हैं और खुद नौकरी करने के बजाय दूसरे लोगों को नौकरियां दे रहे हैं। इसलिए अगर आप डिजिटल अर्थव्यवस्था की बात करते हैं तो इसमें मेरा यही कहना है कि जब भारत एक लाख करोड़ डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बन जाएगा तो अगले 5-7 वर्षों में 50-60 लाख रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

अमेरिका ने वीजा नियम कड़े बनाकर आईटी पेशेवरों का वहां जाकर काम करना मुश्किल बना दिया है। क्या आईटी मंत्री होने के नाते आपने यह मुद्दा अमेरिकी सरकार के सामने उठाया है?

कई स्तरों पर बातचीत चल रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बारे में बात की है, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने अमेरिका सरकार को भारतीय चिंताओं से अवगत कराया है। मैंने भी लोगों से बात की है। मैं आपसे यही कहना चाहता हूं कि जब भारतीय कंपनियां अमेरिका या किसी अन्य देश में जाती हैं तो वे वहां नौकरियां खत्म नहीं करती हैं, बल्कि नौकरियां देती हैं। भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 4 लाख लोगों को रोजगार दिया है और वे वहां और रोजगार पैदा करेंगी क्योंकि हर नौकरी बाहर वालों को नहीं दी जा सकती है। लेकिन एक चीज याद रखिए, भारतीय आईटी कंपनियों ने कई अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मूल्यवर्धन किया है और उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाया है। भारतीय तकनीक ने साथ ही अमेरिका में वहां की कंपनियों को तकनीकी रूप से प्रतिस्पर्धी बनने में मदद की है। उनकी इस बात के लिए सराहना की जानी चाहिए।

आधार को अधिकांश सेवाओं के साथ जोड़ने से कुछ लोगों का कहना है कि यह उनकी निजता का उल्लंघन है। साथ ही उनका आरोप है कि भारत में ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है जहां सरकार लोगों पर नजर रखेगी?

भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां कानून का राज है। हम निजता का सम्मान करते हैं। हम किसी पर नजर नहीं रखेंगे। लेकिन निजता आतंकवादियों और भ्रष्टाचारियों के लिए आड़ नहीं बन सकती है। अगर आधार को पैन कार्ड से जोड़ा जा रहा है तो इसमें क्या समस्या है? हाल ही में हमने 2.24 लाख मुखौटा कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया है। धन शोधन के ऐसे कई मामले हैं। क्या वे गरीब लोग खुश नहीं हैं जिनका डीबीटी का पैसा सीधे उनके बैंक खाते में आ रहा है? गरीब लोग इससे खुश हैं। आधार को संसद द्वारा पारित मजबूत कानून का समर्थन हासिल है जिसमें निजता का पूरा ध्यान रखा गया है। आधार भारत का इनोवेशन है। यह सस्ती तकनीक है जिसमें हर कार्ड बनाने पर केवल एक डॉलर खर्च आता है। आज पूरी दुनिया में एक तकनीक के तौर पर आधार की तारीफ हो रही है। गरीबों की चिंताओं को दूर करने के लिए मैंने साफ कहा है कि आधार नहीं होने पर भी किसी को अनाज देने से इनकार नहीं किया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो इस पर राज्य सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।

अमेरिकी संघीय संचार आयोग ने नेट निरपेक्षता नियम वापस लिए हैं। इस पर भारत सरकार की क्या राय है?

यह संचार मंत्रालय का मामला है लेकिन मैं अपनी तरफ से इतना कह सकता हूं कि जरूरी नहीं है कि हम दूसरे देशों के नक्शेकदम पर चलें। इस मामले में हमारा रुख पहले दिन से ही स्पष्ट है कि डिजिटल इंडिया से डिजिटल समावेश का मार्ग प्रशस्त होगा। इंटरनेट तक सबकी पहुंच होनी चाहिए और इसमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

ऐपल की भारत में विनिर्माण योजनाओं पर क्या अपडेट है?

इस बारे में वाणिज्य मंत्रालय से लेकर वित्त और आईटी मंत्रालय तक कई विभागों के साथ बातचीत हो रही है।

Keyword: साइबर स्पेस, रोजगार, सूचना प्रौद्योगिकी, रवि शंकर प्रसाद, साइबर हमले, डेटा, रैनसमवेयर,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या राजनीति से प्रेरित है महाभियोग का नोटिस
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.