बिजनेस स्टैंडर्ड - नई जीएसटी दर का असर रेस्टोरेंट पर
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नई जीएसटी दर का असर रेस्टोरेंट पर

अर्णव दत्ता / नई दिल्ली 12 10, 2017

... पर मकसद अधूरा

► इनपुट टैक्स क्रेडिट न होने से फ्रैंचाइजी शुल्क और रॉयल्टी में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी
नए स्टोरों के सेटअप की लागत भी बढ़ी, पूंजीगत व्यय पर रिटर्न की सुविधा नहीं
20,000 करोड़ रुपये के रेस्टोरेंट चेन कारोबार की विस्तार योजनाओं पर पड़ सकता है असर
फ्रैंचाइजी मॉडल के नए स्टोर की वृद्धि पर 10-15 प्रतिशत असर का अनुमान
बेहिसाबी लेनदेन को लेकर चिंता, हिस्सेदार कर सकते हैं ज्यादा नकदी सौदे
छोटे, असंगठित कारोबारियों को लाभ होगा क्योंकि प्रभावी कर दरें घटीं, रिटर्न दाखिल करने से राहत

खानपान की दुकानों के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की नई दरों का मकसद पूरा होता नजर नहीं आ रहा है क्योंकि रेस्टोरेंट चेन क्षेत्र अब एक अलग संकट से जूझ रहा है। इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) खत्म किए जाने से कारोबार में बढ़ोतरी और नए फ्रैंचाइजी आउटलेट खोले जाने को लेकर चिंता बढ़ी है। केंद्र सरकार ने पिछले महीने रेस्टोरेंट के लिए जीएसटी दर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया था। बहरहाल आईटीसी खत्म किए जाने से कर की दर कम किए जाने का प्रभाव बहुत कम रह गया। खाद्य एवं बेवरिज (एफऐंडबी) की कीमतों में बदलाव को लेकर जहां बहस छिड़ी हुई है, वहीं नए मानकों के तहत रॉयल्टी, फ्रैंचाइजी शुल्क और अन्य देन देन की नियत लागत की वजह से कर की प्रभावी दर में ज्यादा बदलाव नहींं हुआ है। उपभोक्ताओं से जहां खाने के बिल में 5 प्रतिशत जीएसटी लिया जा रहा है, वहीं रॉयल्टी और फ्रैंचाइजी शुल्क पर जीएसटी 18 प्रतिशत है। 

नैशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन आफ इंडिया (एनआरएआई) का कहना है कि आईसीटी सुविधा न होने से उसके सदस्यों को 2.7 प्रतिशत तक ज्यादा भुगतान करना होगा। एफऐंडबी क्षेत्र में फ्रैंचाइजी मैनेजमेंट कंपनी येलो टाई हॉस्पिटलिटी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी करन तन्ना ने कहा, 'इससे वृद्धि योजनाओं पर असर पड़ेगा क्योंकि रॉयल्टी और फ्रैंचाइजी शुल्क में बहुत बढ़ोतरी हुई है। इसका असर नए रेस्टोरेंट की शुरुआत के मामलों में नजर आएगा।'

कनॉट प्लाजा रेस्टोरेंट्स के प्रबंध निदेशक विक्रम बख्शी के मुताबिक यह कदम जीएसटी की धारणा के खिलाफ जाता है। उन्होंने कहा, 'हम अगर किसी लेन देन पर कर का भुगतान करते हैं तो उस पर आईटीसी नहीं मिलेगा, जिसमें रॉयल्टी भी शामिल है। इससे नियत लागत में बढ़ोतरी होगी।' 

इस समय देश के 20,000 करोड़ रुपये के रेस्टोरेंट चेन क्षेत्र में सालाना 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। इसमें कारोबार के 3 स्टैंडर्ड मॉडल का इस्तेमाल होता है। इसमें एक कंपनी के मालिकाना वाले आउटलेट का मॉडल है, दूसरा कंपनी व फ्रैंचाइजी के बीच संयुक्त उद्यम और तीसरा मास्टर फ्रैंचाइजी मॉडल है। 

बहुराष्ट्रीय रेस्टोरेंट चेन की वजह से मास्टर फ्रैंचाइजी मॉडल तेजी से बढ़ा है, जहां आउटलेट मालिक द्वारा रॉयल्टी और फ्रैंचाइजी शुल्क का भुगतान किया जाता है, जो ब्रांड की मालिकाना वाली कंपनियों की आमदनी का बड़ा हिस्सा है। रॉयल्टी 8 से 20 प्रतिशत तक होती है, ऐसे में कर की दरें 3 प्रतिशत तक बढऩे से इस कारोबारी मॉडल पर विपरीत असर पडऩे की संभावना है। इसकी वजह से रेस्टोरेंट चेन मालिक और फ्रैंचाइजी पार्टनर पर विपरीत असर होगा। इस क्षेत्र के अनुमान के मुताबिक लागत बढ़ने से नए रेस्टोरेंट खोले जाने गतिविधियां 10-15 प्रतिशत कम हो जाएंगी। 

विभिन्न हिस्सेदारों द्वारा अनुपालन न किए जाने की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं। एनआरएआई के अध्यक्ष और बीयर कैफा चेन चलाने वाली बीटीबी मार्केटिंग के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी राहुल सिंह ने कहा, 'अब आईटीसी खत्म कर दिया गया है और कर शृंखला बाधित की गई है, ऐसे में हमें लगता है कि वेंडरों के अनुपालन पर नजर रखनी होगी। बहरहाल नए मानक छोटी व असंगठित इकाइयों के लिए कुछ अच्छी खबर लाए हैं। इसके पहले बड़ी शृंखलाओं द्वारा कुछ को छोड़ दिया गया था क्योंकि वे अनुपालन में सक्षम नहीं थे। सिंह ने कहा कि इस बदलाव के बाद हर आकार के रेस्टोरेंट के मामले में कर नियमों का अनुपालन करना होगा।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी, restaurent, ITC, F&B,
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