बिजनेस स्टैंडर्ड - मीडिया की कम कमाई की दिक्कत दूर कर रहीं उभरती कंपनियां
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मीडिया की कम कमाई की दिक्कत दूर कर रहीं उभरती कंपनियां

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  December 08, 2017

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में बनाने वाला देश है। यह विश्व में टेलीविजन वाले घरों या इंटरनेट बाजार के लिहाज से दूसरे पायदान पर है। निस्संदेह यह सबसे ज्यादा मनोरंजन पसंद करने वाला बाजार है।  हालांकि यह दुनियाभर में सबसे कम कमाई वाले मीडिया बाजारों में से एक है। फिल्मों में हॉलीवुड भारत से आधी से कम फिल्में बनाकर बॉक्स ऑफिस पर करीब 13 गुना ज्यादा कमाई करता है। 

 
भारत में टीवी में मार्जिन चीन और ब्राजील की छोटी कंपनियों से भी आधा या उससे भी कम है। टेलीविजन को छोड़कर भारत का 1,26,210 करोड़ रुपये का मीडिया और मनोरंजन उद्योग बिखरा हुआ यानी असंगठित है। हालांकि टेलीविजन कुछ हद तक संगठित है। ज्यादातर कंपनियां विज्ञापनदाताओं या ग्राहकों के साथ मोलभाव की ताकत नहीं रखती हैं। भारत में तीन-चौथाई विज्ञापन का नियंत्रण पांच वैश्विक कंपनियों के हाथ में है, जिन्हें दरें घटाने में बड़ा मजा आता है। हालांकि ग्राहक शुल्क (सबस्क्रिप्शन) राजस्व का संग्रहण किया जाता है, मगर लीकेज की वजह से यह कभी सामग्री तैयार करने वाली कंपनियों और प्रसारक कंपनियों के पास नहीं पहुंचता है। ऐसे में इस बात में कोई अचरज नहीं होना चाहिए कि कॉमकास्ट या लिबर्टी ग्लोबल जैसी दिग्गज मीडिया कंपनियां भारत से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं डिज्नी जैसी कंपनियों ने कम कमाई की वजह से भारत में अपने कारोबार का आकार कम करने का फैसला लिया है। 
 
इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि उस ढांचे में वृद्धि हो रही है, जो इन स्थितियों को बदल सकता है। करीब एक दर्जन उभरती कंपनियां उन क्षेत्रों में अपने उत्पाद एवं सेवाएं मुहैया करा रही हैं, जो मीडिया की कमाई बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती हैं। इनमें विज्ञापन की दरें सुधारना, सामग्री से कमाई आदि शामिल हैं। यहां इन तीन उभरती कंपनियों का पूरी तरह रैंडम सैंपल दिया जा रहा है। 
 
वर्ष 2009 में स्थापित ड्रीम थियेटर मीडिया ब्रांडों को उपभोक्ता उत्पादों से अपनी कमाई करने में मदद कर रही है। ड्रीम थियेटर के सह-संस्थापक जिग्गी जॉर्ज विश्व की सबसे बड़ी मीडिया कंपनियों में से एक 55 अरब डॉलर की वॉल्ट डिज्नी का उदाहरण देते हैं, जिसकी कमाई में उपभोक्ता उत्पादों का योगदान महज 4.8 अरब डॉलर या 8 फीसदी है। भारत में ग्रीन गोल्ड एनिमेशन की कमाई के सबसे तगड़े स्रोत छोटा भीम तौलिये, टी-शट्र्स, घडिय़ां, गेम्स आदि हैं। वस्तुुओं के लिए टीवी या फिल्मों के पात्र मुहैया कराने में अरबों डॉलर के बाजार की संभावना है। पाइरेसी सहित कई वजहों से भारत में इस बाजार का पूरा दोहन नहीं हो पाया है। अब ड्रीम थियेटर जैसी करीब आधा दर्जन ऐसी स्वतंत्र कंपनियां आ गई हैं, जो डिज्नी इंडिया, बेनेट कोलमैन और वायकॉम 18 को अपने ब्रांडों से कमाई करने में मदद कर रही हैं। 
 
वहीं क्वान 'आम जनता की पसंद का मार्केटप्लेस' है, जिसे उसके सह-संस्थापक अनिर्वाण ब्लाह इसी नाम से पुकारना पसंद करते हैं। क्वान केवल प्रीतम, वीर दास, रणबीर कपूर और दीपिका पडुकोणे जैसे 115 प्रतिभाशाली लोगों का ही प्रतिनिधित्व नहीं करती है बल्कि यह प्रतिभाओं, सूचना और विभिन्न रचनात्मक प्रतिभाओं की एग्रीगेटर है। इसलिए 2009 में बनी क्वान ने सीड सावन और फैंटम फिल्मों को मदद दी। इसने पिछले साल 50 फिल्मों, 60 टीवी शो और 20 वेब सीरीज में मददगार भूमिका निभाई। इसने 1,500 लाइव कार्यक्रमों का आयोजन किया और ब्रांडों और खेल एवं मनोरंजन क्षेत्र की हस्तियों के बीच 2,500 साझेदारियां कराईं। कंपनी में 140 लोग काम कर रहे हैं। यह हस्तियों, खेलों या अन्य प्रतिभाओं का फायदा उठाने के बारे में सलाह मुहैया कराती है। इस प्रक्रिया के दौरान यह राजस्व के नए स्रोत सृजित करती है। इसका दावा है कि हर साल करीब 3,200 करोड़ रुपये का कारोबार में अहम भूमिका निभाती है। 
 
इसके अलावा एक कंपनी श्योरवेव्ज भी है। वर्ष 2011 में बेंगलूरु की इस कंपनी ने स्थानीय केबल चैनलों पर विज्ञापन समय की एग्रीगेटिंग के लिए एक उत्पाद पेश किया था। इसने राष्ट्रीय विज्ञापनदाताओं के साथ काम किया, जो टेलीविजन पर स्थानीय विज्ञापनों में लचीलापन चाहते थेे। टीवी का दायरा आम तौर पर एक क्षेत्र, एक राज्य या एक देश तक होता है। इससे प्रसारकों और छोटी केबल कंपनियों के लिए राजस्व का स्रोत बन गया है। इस साल की शुरुआत में श्योरवेव्ज ने स्काईनेट शुरू किया था। स्काईनेट एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो टीवी पर प्रोग्रामेटिक को लाने की कोशिश करता है। प्रोगामेटिक का ऑनलाइन खूब इस्तेमाल होता है, जिसमें वेबसाइटों पर उसी क्षण सॉफ्टवेयर से विज्ञापन लगाए जाते हैं। उदाहरण के लिए अगर हॉटस्टार पर आईपीएल का कोई मैच ट्रेंड कर रहा है तो विज्ञापनदाता तत्काल विज्ञापन स्थान खरीद सकता है। श्योरवेव्ज के संस्थापक राजेंद्र खारे का कहना है कि स्काईनेट के पीछे विचार सैकड़ों छोटे विज्ञापनदाताओं और प्रसारकों को जोडऩा है। 
 
बड़े विज्ञापनदाता मीडिया एजेंसियों का इस्तेमाल करते हैं और बड़े प्रसारक सालाना अनुबंध या सीजन के करार करते हैं। स्काईनेट टीवी विज्ञापन के लंबे-चौड़े क्षेत्र में राजस्व के नए स्रोत खोल सकती है। इसके अलावा एक सलाहकार कंपनी ओरमैक्स मीडिया है, जो कुछ अन्य कार्यों के अलावा फिल्मों और टीवी में जोखिम कम करने के लिए स्क्रिप्ट की परख करती है। भारतीय मीडिया को अपने उत्पादों से कमाई करने में मदद करने वाला ढांचा धीरे-धीरे तैयार हो रहा है। 
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