बिजनेस स्टैंडर्ड - श्रम सुधार से पीछे हटेगी सरकार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, December 14, 2017 11:57 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम जिरह खबर

श्रम सुधार से पीछे हटेगी सरकार

सोमेश झा / नई दिल्ली 12 07, 2017

छंटनी संबंधित नियमों का मामला

► मजदूर संगठनों के विरोध के बीच सरकार नहीं लेना चाहती राजनीतिक जोखिम
श्रम सुधार के लिए केंद्र सरकार लाई थी विधेयक
मंजूरी के बिना छंटनी की अनुमति का प्रावधान
नौकरी छोड़ने पर तीन गुना सेवरेंस पैकेज का प्रस्ताव
मजदूर संगठन कर रहे हैं प्रस्ताव का विरोध

सरकार छंटनी से संबधित नियमों में ढील देने के प्रस्ताव को झंडे बस्ते में डाल सकती है। इस प्रस्ताव में ज्यादा कर्मचारियों वाले कारखानों को सरकार से मंजूरी लिए बिना कामगारों को रखने और निकालने की अनुमति देने का प्रावधान है। अधिकारियों की मानें तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) सहित कई मजदूर संगठनों के विरोध और नोटबंदी तथा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर विपक्षी दलों की व्यापक आलोचना के मद्देनजर विवादित श्रम सुधार प्रस्तावों की गति धीमी की जा सकती है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हम विवादित श्रम सुधार प्रस्तावों पर यथास्थिति बनाए रख सकते हैं क्योंकि मजदूर संगठन छंटनी के नियमों में किसी तरह के बदलाव के खिलाफ हैं। नोटबंदी और जीएसटी पर विपक्ष के हमलों का सामना कर रही सरकार की भी शायद राजनीति जोखिम उठाने की मंशा नहीं है।' केंद्र सरकार ने कोड ऑन इंडस्ट्रियल रिलेशंस बिल में प्रस्ताव किया था कि 300 कामगारों तक क्षमता वाले कारखानों को सरकार की मंजूरी के बिना छंटनी करने, कामगारों को नौकरी से निकालने या कारखाना बंद करने की अनुमति होगी। मौजूदा नियमों के मुताबिक 100 कामगारों तक की क्षमता वाले कारखाने ऐसा कर सकते हैं। 

विधेयक में छंटनी वाले कामगारों को नौकरी छोड़ने के बदले मिलने वाले वेतन (सेवरेंस पे) को तीन गुना बढ़ाने का भी प्रस्ताव था। मौजूदा नियमों के मुताबिक कामगार को सालाना 15 दिन का वेतन मिलता है जिसे 45 दिन करने का प्रस्ताव किया गया था। प्रस्तावित विधेयक से मजदूर संगठन कानून, 1926, औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) कानून, 1946 और औद्योगिक विवाद कानून 1947 को मिलाकर एक ही कानून बनाया जाएगा।

श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि सरकार अब इस बात पर विचार कर रही है कि मुआवजा पैकेज को बढ़ाकर सालाना 30 दिन के बराबर किया जाए या फिर सेवरेंस पे को उसी स्तर पर बरकरार रखा जाए। अधिकारी ने कहा, 'अगर छंटनी के नियमों में कोई बदलाव नहीं होता है तो सेवरेंस पे में भी बदलाव नहीं होगा। अगर ऐसा हुआ तो यह उद्योग विरोधी कदम होगा।'

बीएमएस के अध्यक्ष सी के साजी नारायणन ने कहा, 'हमारा मानना है कि छंटनी की अनुमति की सीमा पूरी तरह समाप्त की जानी चाहिए। 20 साल पहले जिन कारखानों में 100 कर्मचारी काम करते थे, अब स्वचालन के कारण वहां केवल 10-20 लोग काम कर रहे हैं। कारोबार आसान बनाने के उपाय किए जाने चाहिए लेकिन कारोबार को बंद करने के रास्ते आसान नहीं होने चाहिए।'

10 केंद्रीय मजदूर संगठनों ने अपनी मांगों और प्रस्तावित श्रम सुधारों के खिलाफ पिछले महीने संसद के बाहर 3 दिन तक विरोध प्रदर्शन किया था। बीएमएस ने 17 नवंबर को अलग से दिल्ली में प्रदर्शन किया था। बाद में उसके नेताओं ने श्रम मामलों की मंत्रियों की समिति के साथ चर्चा की थी। यह समिति वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुआई में गठित की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि श्रम समवर्ती सूची में शामिल है और राज्य भी केंद्र की अनुमति से अपने कानूनों में संशोधन कर सकते हैं। राज्यों को विवादित श्रम कानून सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए कहा जाएगा। 
Keyword: छंटनी, नियम, मजदूर संगठन, जोखिम, श्रम सुधार, विधेयक, नौकरी, सेवरेंस पैकेज,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बिटकॉइन को मिलनी चाहिए कानूनी वैधता?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.