बिजनेस स्टैंडर्ड - महंगाई ने रोकी कटौती की राह
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महंगाई ने रोकी कटौती की राह

आरबीआर्ई ने नीतिगत दरों को रखा कायम, बैंकों को दी संभलने की नसीहत
अनूप रॉय और अभिजित लेले / मुंबई 12 06, 2017

मौद्रिक समीक्षा

रीपो दर 6 फीसदी और रिवर्स रीपो 5.75 फीसदी पर बरकरार
मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 4.3 से 4.7 फीसदी किया
चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर का अनुमान 6.7 फीसदी पर कायम

राजकोषीय मोर्चे पर लक्ष्य से चूकने के खतरे के प्रति किया आगाहभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने उम्मीद के अनुरूप नीतिगत दर को बरकरार रखते हुए तटस्थ रुख अपनाया है। लेकिन आरबीआई के गवर्नर ने सरकार से नई पूंजी हासिल करने के लिए बैंकों के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं। मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने रीपो दर को 6 फीसदी पर कायम रखा है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के सर्वेक्षण में भी सभी 10 अर्थशास्त्रियों और बॉन्ड बाजार के डीलरों ने दरें यथावत बनाए रखने के पक्ष में राय जाहिर की थी। हालांकि मौद्रिक नीति समिति के बाह्यï सदस्य रवींद्र ढोलकिया रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती के पक्ष में थे। लेकिन आरबीआई के गवर्नर ऊर्जित पटेल सहित पांच सदस्यों ने कटौती नहीं करने के पक्ष में मत दिया। 

आरबीआई ने कहा कि पिछली कटौती के आधार पर बैंक अब भी ग्राहकों को दरें घटाकर लाभ दे सकते हैं लेकिन बैंकों ने इस पर प्रतिबद्घता नहीं जताई। समीक्षा में आरबीआई ने संभावित मुद्रास्फीति बढऩे के अनुमान को लेकर ज्यादा चिंता तो नहीं जताई लेकिन दूसरी छमाही के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को 10 आधार अंक बढ़ा दिया। तीसरी और चौथी तिमाही के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान 4.3 से 4.7 फीसदी रखा गया है। आरबीआई ने कहा कि बढ़ती मुद्रास्फीति पर सतर्कता से नजर रखने की जरूरत है। राजकोषीय विचलन और वैश्विक वित्तीय अस्थिरता की वजह से भी स्थानीय बाजार में मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।

आरबीआई ने अर्थव्यवस्था के वृद्धि अनुमान को 6.7 फीसदी पर बरकरार रखा है। मौद्रिक समिति के एक सदस्य ने कहा कि तीसरी और चौथी तिमाही में वृद्धि दर 7 से 7.8 फीसदी के बीच रह सकती है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल मूल्य वृद्धि 6.3 फीसदी रही। पटेल ने कहा कि कंपनियों द्वारा पूंजी बाजार से बड़े पैमाने पर संसाधनों को जुटाने और कारोबार को आसान बनाने के लिए हाल में किए गए उपायों से विकास को गति मिलेगी। नकदी पर पर भी रिजर्व बैंक सहज दिखा। 

डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा कि केंद्रीय बैंक जरूरत के मुताबिक द्वितीयक बॉन्ड बाजार बिक्री और बॉन्डों की खरीद से अल्पकालिक और दीर्घकालिक अवधि के लिए स्थायी नकदी बाजार में झोंकेगा। उन्होंने कहा, 'इस वित्त वर्ष के अंत में नकदी की स्थिति में मामूली अधिशेष की संभावना है।' आचार्य ने कहा कि तटस्थता की स्थिति 2018 की दूसरी छमाही में आएगी। वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता की स्थिति को देखते हुए तटस्थता पर बैंक का रुख स्वाभाविक है।

आईडीएफसी बैंक लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पान ने कहा, 'अभी उथलपुथल का दौर है। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि तेल की कीमतें 60 डॉलर पर ही अटकी रहेंगी। इसमें उतार चढ़ाव हो सकता है। खाद्य की कीमतों पर भी स्थिति स्पष्टï नहीं है। यह भी साफ नहीं है कि विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों के मौद्रिक व्यवस्था को सख्त करने से रुपये की कीमत कम होगी या नहीं।' लेकिन पान सहित अधिकांश अर्थशास्त्री आने वाले दिनों में भी दरों में कटौती की उम्मीद नहीं करते हैं। साथ ही दरों के बढ़ने की भी दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है। 

बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के मुद्दे पर पटेल ने कहा कि इसका मकसद न केवल उनकी पूंजी की जरूरतों को पूरा करना है बल्कि उन्हें मजबूत बनाना भी है। इसके साथ ही बैंकों पर सुधार और कामकाज के पुनर्गठन की जिम्मेदारी भी है। पटेल ने कहा, 'यह केवल पुनर्पूंजीकरण पैकेज नहीं है बल्कि सुधार और पुनर्गठन पैकेज है। इससे सार्वजनिक बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत होगी ताकि हमें अगली बार ऐसी स्थिति से न गुजरना पड़े।'

कार्ड से लेनदेन शुल्क में बदलाव

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने डेबिट कार्ड के जरिये लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) की अलग-अलग दर पेश की है, जिसमें छोटे व बड़े कारोबारियों के लिए अलग-अलग सीमा तय की गई है। एमडीआर किसी बैंक द्वारा मुहैया कराई गई डेबिट व क्रेडिट सेवाओं पर कारोबारियों से वसूली जाने वाली दर है। हालिया अधिसूचना के मुताबिक, 20 लाख रुपये तक सालाना कारोबार वाले छोटे कारोबारियों के लिए पीओएस या ऑनलाइन डेबिट कार्ड से हुए लेनदेन पर एमडीआर शुल्क 0.40 फीसदी तय किया गया है और इस पर 200 रुपये प्रति लेनदेन की सीमा भी है। क्विक रिस्पांस कोड यानी क्यूआर के जरिये भुगतान पर शुल्क 0.30 फीसदी होगा और इस पर अधिकतम 200 रुपये प्रति लेनदेन की सीमा होगी। अगर कारोबारी का सालाना कारोबार 20 लाख रुपये से ज्यादा है तो एमडीआर शुल्क 0.90 फीसदी होगा।
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