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टाइलों के शहर में...बदला-बदला मंजर!

अर्चिस मोहन / मोरबी 12 06, 2017

गुजरात चुनाव

सिरैमिक टाइल्स के गढ़ गुजरात के मोरबी में पाटीदार उद्यमी गुजरात के विकास मॉडल से इत्तफाक नहीं रखते हैं और इलाके के युवा हार्दिक पटेल के प्रभाव में हैं

भारत में सिरैमिक टाइलों और दीवार घडि़यों की राजधानी कहे जाने वाले मोरबी से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 8 के दोनों तरफ चिमनियों से निकलने वाले सफेद धुएं के बादल दिखाई देते हैं। यह गुजरात के सबसे ज्यादा राजस्व सृजित करने वाले और सबसे कम बेरोजगारी दर वाले जिलों में एक है। मगर बिंडबना है कि मोरबी 'विकास के गुजरात मॉडल' की नाकामी का भी नमूना है। इस मॉडल की असफलता का एक और उदाहरण अमरेली है, जो पाटीदार आंदोलन का प्रमुख केंद्र था। 

यह सपाट राष्ट्रीय राजमार्ग टूटी-फूटी सड़क वाले शहर मोरबी को जाता है। मंगलवार को ओखी तूफान की वजह से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को यहां अपनी जनसभा रद्द करनी पड़ी।  शहर में सार्वजनिक बुनियादी ढांचा खस्ताहाल है। शहर का युवा उस प्रभाव में हैं, जो पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने सोमवार को यहां एक जनसभा में उन पर डाला है। वह राजनीति को लेकर बेहद जागरूक हैं और 'विकास के गुजरात मॉडल' की हवा निकालने के लिए उनके पास उंगलियों पर आंकड़े हैं। 

22 वर्ष के कंप्यूटर इंजीनियर हार्दिक पाटीदार ने कहा, 'क्या है गुजरात मॉडल? यहां कोई अच्छा सरकारी स्कूल, कॉलेज या अस्पताल नहीं है। मोरबी राज्य के खजाने में सबसे ज्यादा कर भेजता है।' वह चार साल की कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब अपने परिवार की सिरैमिक टाइल विनिर्माण इकाई को संभालते हैं। हार्दिक की इस पढ़ाई पर उनके पिता को 4 लाख रुपये खर्च करने पड़े हैं। 

मोरबी भारत की 70 फीसदी विट्रिफाइड, वॉल और अन्य तरह की टाइलों की मांग पूरी करता है। यहां के सिरैमिक टाइल उद्योग में करीब 469 इकाइयां हैं, जिनमें से ज्यादातर का स्वामित्व पाटीदार समुदाय के पास है।  राज्य सरकार द्वारा गांधीनगर में 16 से 19 नवंबर के बीच आयोजित 'वाइब्रैंट सिरैमिक एक्सपो ऐंड समिट' के दौरान बांटे गए एक दस्तावेज के मुताबिक, 'पटेल फैक्टरी मालिक समुदाय के बीच गहरा संबंध है। इनमें से ज्यादातर बहुत सी फैक्टरियों में सह-मालिक हैं, जिससे संसाधनों को साझा करने में मदद मिलती है।'

हार्दिक इस बात से खफा हैं कि राज्य में निजी शिक्षा बहुत महंगी है। उन्होंने कहा, 'मैं एक्सपो में हिस्सा लेने के लिए गांधीनगर गया था और मैंने पाया कि मेरे पूर्व सहपाठी अब महज 7,000 रुपये प्रति महीना कमा रहे हैं। मेरे मजदूर 350 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से उनसे ज्यादा कमा रहे हैं।'  कांग्रेस के घोषणापत्र में महंगी निजी शिक्षा की समस्या दूर करने और सरकारी स्कूल एवं कॉलेजों में सुधार का वादा किया गया है। मोरबी कारोबारियों का गढ़ है। सिरैमिक टाइलों के अलावा मोरबी पैकेजिंग उद्योग, दीवार घड़ी विनिर्माताओं (अजंता, सोनम जैसे जाने-माने ब्रांड) और बल्ब विनिर्माताओं का भी ठिकाना है। यहां 700 लघु एवं मझोले उद्योग और 2,000 सहायक इकाइयां हैं। इनमें 4 लाख से अधिक कामगारों को रोजगार मिला हुआ है। मोरबी सिरैमिक एसोसिएशंस के आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में सिरैमिक उद्योग का कारोबार महज 28,500 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 6,500 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल था। 

मोरबी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वच्छ भारत अभियान' और उजाला योजना से खुश होना चाहिए क्योंकि इन दो योजनाओं की मांग से इस एसएमई केंद्र को मदद मिली है। लेकिन ऐसा नहीं है। फैक्टरी मालिकों का कहना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और नोटबंदी का उन पर असर पड़ा, लेकिन यह थोड़े समय रहा। कांग्रेस के अनुसंधान विभाग द्वारा 20 नवंबर को जारी दस्तावेज में दावा किया गया है कि नोटबंदी से उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे 80 फीसदी इकाइयां कुछ समय के लिए बंद हो गईं। 

मोरबी सिरैमिक एसोसिएशंस के अध्यक्ष केजी कुंदरिया ने कहा कि यह असर बहुत ज्यादा नहीं था। कुंदरिया ने कहा, 'नोटबंदी का हमसे ज्यादा हमारे डीलरों पर असर पड़ा। सरकार ने जीएसटी की दर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने की हमारी मांग मानी है।' एक अन्य फैक्टरी मालिक ने उनकी बात से असहमति जताते हुए नाम न छापने की शर्त पर कहा, 'तीन महीने निर्यात 50 फीसदी और उत्पादन 20 फीसदी कम हुआ। हमने सरकार से कहा कहा था कि अगर 28 फीसदी कर बरकरार रहा तो चीनी सिरैमिक टाइलें उद्योग को चौपट कर देंगी।' फैक्टरी मालिकों को डर है कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो उन्हें परेशान करेगी। 

हालांकि मंगलवार शाम को राहुल गांधी का दौरा रद्द कर दिया गया, लेकिन कुंदरिया ने उद्योग की भाजपा के राज्य सभा सदस्य पुरुषोत्तम रूपाला के साथ बैठक कराई। लेकिन पाटीदारों और भाजपा के बीच अविश्वास की खाई को पाटना इतना आसान नहीं था। भले ही फैक्टरी मालिक आलोचना करने में सतर्कता बरत रहे हों, लेकिन पाटीदार युवा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की खुलेआम आलोचना कर रहे हैं। 

40 साल के घनश्याम पाटीदार ने कहा, 'मोदी और भाजपा ने हिंदू-मुसलमानों को बांटकर हमें खूब बेवकूफ बनाया है। हमारी नाराजगी नौकरियों और किसानों को उपज के अच्छे दाम नहीं मिलने को लेकर है। हमें धोखा देने के लिए शाह को सबक सिखाने की जरूरत है।'इस समुदाय के वरिष्ठ जनों की शिकायत है कि शाह ने उनकी 'आयरन लेडी' आनंदीबेन पटेल (पूर्व मुख्यमंत्री) और उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल का अपमान किया है। रूपाणी को मुख्यमंत्री बनाए जाने से पहले नितिन पटेल को दो दिन तक इंतजार कराया गया। पाटीदार रूपाणी और शाह से बदला लेना चाहते हैं। मोदी केवल संयोग से उनके निशाने पर आए हैं। 

गुजरात कांग्रेस के महासचिव लालजी देसाई कहते हैं कि पाटीदार एकजुट होकर भाजपा को वोट देंगे, लेकिन वह मानते हैं कि कुछ स्वामीनारायण पंथ की अपील से प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि मोदी अब भी इस समुदाय, विशेष रूप से महिलाओं में लोकप्रिय हैं। सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात के पाटीदार भाजपा के खिलाफ हो सकते हैं, लेकिन मध्य और दक्षिण गुजरात से पार्टी को इस समुदाय का समर्थन मिलेगा। 
Keyword: gujrat, election, BJP, congress,,
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