बिजनेस स्टैंडर्ड - 31 अरब डॉलर की फॉरवर्ड पोजीशन
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31 अरब डॉलर की फॉरवर्ड पोजीशन

अनूप रॉय / मुंबई December 04, 2017

भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपया-डॉलर में 31 अरब डॉलर की विशाल फॉरवर्ड पोजीशन बना ली है, जो हाजिर बाजार में विदेशी धन के लगातार प्रवाह पर सक्रिय हस्तक्षेप के लिए जरूरी है। फॉरवर्ड एक अनुबंध होता है जो पहले से तय कीमत पर विदेशी मुद्रा की खरीद के लिए किया जाता है। उस कीमत पर डॉलर की खरीद का अधिकार सुरक्षित करने के लिए खरीदार को छोटा सा शुल्क चुकाना होता है जो फॉरवर्ड प्रीमियम कहलाता है।
 
अर्थशास्त्रियों व करेंसी डीलरों ने कहा कि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तरफ से दरें बढ़ाने या आसान मुद्रा की नीतियों को सामान्य बनाए जाने पर अगर विदेशी फंडों की निकासी होती है तो यह जोखिम के खिलाफ सुरक्षा हो सकती है।  यह संयोग हो सकता है, लेकिन इस कैलेंडर वर्ष में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारत में 31.33 अरब डॉलर का निवेश किया है, जो आरबीआई की शुद्ध फॉरवर्ड पोजीशन 31.13 अरब डॉलर के करीब-करीब बराबर है। इसमें से 3.44 अरब डॉलर तीन महीने के भीतर परिपक्व होंगे, वहीं 28.2 अरब डॉलर एक साल के भीतर। एक साल से ज्यादा वाली पोजीशन में आरबीआई के पास 981 अरब डॉलर की सेल पोजीशन है। मजबूत निवेश के परिणामस्वरूप आरबीआई का विदेशी मुद्रा भंडार 400 अरब डॉलर के पार चला गया है। उभरते बाजार हमेशा ही डॉलर का संचय करना चाहते हैं, लेकिन भारत अब तक ऐसा नहीं कर पाया है क्योंकि चालू खाते का घाटा काफी ऊंचा है। अभी चालू खाते का घाटा प्रबंधनयोग्य स्तर पर है, लिहाजा आरबीआई सक्रियता से भंडार बना रहा है, लेकिन तुरंत डॉलर की खरीद के जरिए वह नकदी बढ़ाने का इच्छुक नहीं है।
 
हाजिर बाजार में आरबीआई का तत्काल हस्तक्षेप तब तक नहीं होता जब तक कि उस दिन विनिमय दर में उतारचढ़ाव न हो। सामान्य स्थिति में आरबीआई डॉलर की खरीद के जरिए डॉलर की तरलता बढ़ाता रहता है। हालांकि जब वह डॉलर खरीदता है तो उतनी ही रकम के बराबर रुपये में नकदी निकालता भी है। यह महंगाई को ऐसे समय में भड़का सकता है जब केंद्रीय बैंक को महंगाई का लक्ष्य बनाए रखना है। इसलिए हाजिर बाजार में डॉलर की खरीद के समय आरबीआई कई चरणों में डॉलर बेचता भी है। साथ ही इसे फॉरवर्ड बाजार में तब खरीदता है जब हाजिर डिलिवरी लेनी जरूरी न हो और फिर इस अनुबंध को आगे बढ़ाते रहता है या फॉरवर्ड बाजार में धीरे-धीरे डॉलर बेच देता है। इसके अलावा जब व्यवस्था में नकदी सूख जाती है तो आरबीआई हाजिर बाजार में डॉलर खरीदकर रुपया उपलब्ध करा देता है और फॉरवर्ड में अपनी पोजीशन बेच देता है। इससे दो महत्वपूर्ण मकसद पूरे होते हैं और इसमें पहला है, यह विनिमय दर को स्थिर कर देता है। फॉरेक्ससर्व के प्रबंध निदेशक सत्यजीत कांजीलाल ने कहा, आरबीआई को हाजिर बाजार में हमेशा हस्तक्षेप की दरकार नहीं होती। जब वह फॉरवर्ड बाजार में तात्कालिक आधार पर खरीद-बिक्री करता है तो बाजार को आरबीआई के मूड का पता चलता है और वे अपनी पोजीशन उसी के मुताबिक समायोजित करते हैं।
Keyword: RBI, dollar, rupee,
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