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सस्ता कर्ज उठाएं, क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाएं

संजय कुमार सिंह /  December 03, 2017

भारतीयों के बारे में हमेशा यही माना जाता रहा है कि उन्हें कर्ज से परहेज होता है। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। भारतीय रिजर्व बैंक से हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक क्रेडिट कार्ड पर कुल बकाया राशि सितंबर, 2017 के अंत में बढ़कर 59,900 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उससे साल भर पहले यही आंकड़ा केवल 43,200 करोड़ रुपये था यानी सितंबर 2016 से सितंबर 2017 के बीच क्रेडिट कार्ड के बकाया में 38.7 फीसदी इजाफा हो गया है।

 
पिछले दो साल में क्रेडिट कार्ड का बकाया करीब 78 फीसदी बढ़ा है। कर्ज देने के लिए क्रेडिट रेटिंग तय करने वाले अग्रणी ब्यूरो ट्रांसयूनियन सिबिल ने इसी साल अप्रैल में एक सर्वेक्षण कराया था। इस सर्वेक्षण में आठ शहरों के 1,100 उपभोक्ताओं को शामिल किया गया था। सर्वेक्षण में शामिल 92 फीसदी लोग तो हर महीने न्यूनतम राशि (कार्ड पर कुल बकाया की 5 फीसदी रकम) से अधिक रकम जमा करते थे, लेकिन 33 फीसदी लोगों को यही नहीं पता था कि न्यूनतम राशि (मिनिमम अमाउंट ड्यू) से ज्यादा रकम जमा करने का क्या फायदा है। सर्वेक्षण से जाहिर हो गया है कि जैसे-जैसे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ही लोगों को इसकी अधिक से अधिक जानकारी होना जरूरी है ताकि वे कर्ज के जाल में फंसने से बच जाएं।
 
हर महीने चुका दें बकाया
 
अपने कर्ज को अगले महीने तक नहीं जाने दीजिए यानी उसकी रिवॉल्विंग मत होने दीजिए क्योंकि रिवॉल्विंग कर्ज पर 18 से 47 फीसदी तक का कमरतोड़ ब्याज चुकाना पड़ता है। पीयर टु पीयर (पी2पी) ऋणदाता प्लेटफॉर्म फेयरसेंट डॉट कॉम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजत गांधी कहते हैं, 'यह कर्ज का सबसे बुरा जाल है क्योंकि बकाया रकम बहुत तेजी से बढ़ती जाती है। कई लोग तो अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर नकदी भी निकालने लगते हैं, जिस पर बहुत अधिक निकासी शुल्क लगता है। इतना ही नहीं, उन्हें निकासी शुल्क के ऊपर भी ब्याज चुकाना पड़ता है।'
 
न रखें ज्यादा कार्ड
 

बहुत अधिक क्रेडिट कार्ड रखना भी जोखिम की बात है। ट्रांसयूनियन सिबिल की मुख्य परिचालन अधिकारी हर्षला चंदोरकर कहती हैं, 'हो सकता है कि आप उनमें से किसी कार्ड का भुगतान करना भूल जाएं। ऐसे में आप कर्ज के जाल के करीब पहुंच जाते हैं।' अपने कार्ड में मौजूद क्रेडिट लिमिट का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना भी अच्छा नहीं है। साथ ही आपको अक्सर यह जांचते रहना चाहिए कि आपकी आय और कर्ज का अनुपात क्या है। चंदोरकर कहती हैं, 'अगर आपकी आय का 45 फीसदी से ऊपर हिस्सा मासिक किस्त चुकाने में ही चला जाता है तो आपके लिए चिंता की बात है। अगर आपकी 25 फीसदी से अधिक आय असुरक्षित कर्ज की ईएमआई चुकाने तथा मनमाना खर्च करने में निकल जाती है तो आपको चौकन्ना हो जाना चाहिए।' जैसे ही आपके क्रेडिट कार्ड का कर्ज आपके दो महीने के वेतन से अधिक हो जाता है, आपको सख्त कदम उठाने की जरूरत हो जाती है। अपने फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और कम प्रतिफल वाले दूसरे निवेशों को भुना दें और क्रेडिट कार्ड का कर्ज निपटा दें। लेकिन भविष्य निधि, पेंशन फंड और बीमा को भुनाने से बचें।

ईएमआई में बदलें

 
जैसे ही आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर कोई खरीदारी करते हैं, आपके पास बैंक से फोन आने लगते हैं और फोन करने वाला आपसे गुजारिश करता है कि खरीदारी के कारण आपका जो भी बिल बन रहा है, आप उसे ईएमआई में बदलवा लें। पैसाबाजार डॉट कॉम में उपाध्यक्ष और भुगतान योजनाओं के प्रमुख साहिल अरोड़ा का कहना है, 'क्रेडिट बैलेंस ट्रांसफर किसी भी कार्ड धारक के लिए अच्छा है बशर्ते वह छूट या रियायत की अवधि (प्रमोशन पीरियड) में ही पूरा बकाया चुकाने की कुव्वत रखता हो। इस अवधि के दौरान ब्याज दर बहुत कम होती है और कभी-कभी तो ब्याज लिया ही नहीं जाता। यह अवधि भी कहीं 2 महीने की हो सकती है और कुछ बैंक आपको 24 महीने तक का समय दे सकते हैं। जैसे ही प्रमोशन पीरियड पूरा हो जाता है, पहले की तरह ऊंची दर पर ब्याज लगने लगता है।' आम तौर पर विक्रेता ही प्रमोशन की अवधि के दौरान ब्याज का पूरा खर्च उठा लेते हैं। कभीकभार बैंक भी मोटी खरीद पर आसान तरीकों से रकम चुकाने का मौका देते हैं। इसमें अक्सर ब्याज लगाया ही नहीं जाता। लेकिन यह मौका चुनिंदा ग्राहकों को ही दिया जाता है। आम तौर पर ऐसी ईएमआई योजनाओं में 14 से 24 फीसदी ब्याज वसूला जाता है और 1.5 फीसदी का प्रोसेसिंग शुल्क लिया जाता है। लेकिन इसका फायदा आपको तभी होगा, जब कुल खर्च पर्सनल लोन के मुकाबले सस्ता पड़ रहा हो। ध्यान रखने वाली एक बात यह भी है कि 50 से 55 दिनों तक ब्याज नहीं देने की सुविधा क्रेडिट कार्ड पर हुई नई खरीद पर तब तक हासिल नहीं होती, जब तक पहले से ट्रांसफर किया गया बैलेंस पूरी तरह चुका नहीं दिया जाता।
 
बैंक या एनबीएफसी से कर्ज
 
आप बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) से भी पर्सनल लोन ले सकते हैं। इनमें ग्राहक के रिकॉर्ड और प्रोफाइल के हिसाब से 11 से 32 फीसदी तक की दर से ब्याज वसूला जाता है। बैंकों की ब्याज दर वास्तव में 14 फीसदी या उससे अधिक ही होती है। अरोड़ा बताते हैं, 'जिन्होंने पहले ही आवास ऋण ले रखा हो, उनके लिए टॉप-अप होम लोन और कुछ रेहन रखकर उसके बदले ऋण लेना (11 फीसदी या उससे अधिक ब्याज दर पर) दूसरे विकल्प हैं। जिनके ऊपर क्रेडिट कार्ड का बहुत अधिक बकाया है, वे संपत्ति गिरवी रखकर उसके बदले कर्ज ले सकते हैं। उसमें ब्याज की दर 9.4 फीसदी प्रतिवर्ष होती है और अवधि 15 वर्ष तक हो सकती है।'
 
फिनटेक से कर्ज
 
क्रेडिट कार्ड के कर्ज तले दबे कई लोगों को किसी अच्छे बैंक या एनबीएफसी से पर्सनल लोन भी नहीं मिल पाता। कुबेरा डॉट कॉम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदित्य कुमार बताते हैं, 'बैंक आम तौर पर शीर्ष 6,000 या 8,000 कंपनियों के वेतनभोगी कर्मचारियों को कर्ज देना पसंद करते हैं। अगर आप बहुत अच्छी साख वाली कंपनी में काम नहीं करते हैं, आपका सालाना वेतन 6 लाख रुपये से अधिक नहीं है और आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा नहीं है तो आपको किसी बैंक से पर्सनल लोन नहीं मिलेगा। उस सूरत में आपको किसी फाइनैंशियल टेक्नोलॉजी यानी फिनटेक कंपनी से ही कर्ज लेना पड़ सकता है।' वह कहते हैं कि अगर आपका क्रेडिट स्कोर 740 से कम होता है तो बैंक आम तौर पर आपकी कर्ज की अर्जी पर विचार ही नहीं करते। लेकिन कर्ज देने वाली फिनटेक कंपनी 650 से कम के स्कोर पर भी कर्ज देने को तैयार हो जाती है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया एकदम सरल है और कर्ज भी बहुत जल्दी दे दिया जाता है। कुमार बताते हैं, 'अर्जी आने के बाद हम कर्ज मंजूर करने में केवल चार घंटे लगाते हैं। अगर ग्राहक के दस्तावेज तैयार हैं तो हम 24 से 48 घंटे में उसे कर्ज दे भी देते हैं।'कुबेरा की ब्याज दर 13.99 से 24 फीसदी तक होती हैं। ब्याज दर का फैसला आपके क्रेडिट स्कोर, क्रेडिट रिपोर्ट में दिए गए कर्ज अदायगी के अब तक के रिकॉर्ड, काम के अनुभव आदि पर निर्भर करता है। वे 1 से 5 साल तक के लिए कर्ज देते हैं और 12 महीने की लॉक-इन अवधि होती है यानी आप 12 महीने गुजरने से पहले पूरा कर्ज चुका भी नहीं सकते। लोनटॉप डॉट इन ने एक खास क्रेडिट कार्ड टेकओवर कर्ज तैयार किया है, जिसमें ब्याज की दर 1.5 फीसदी प्रति माह (18 फीसदी सालाना) तक भी हो सकती है। यह कर्ज 11 महीने के लिए दिया जाता है। कंपनी के मुख्य कार्य अधिकारी और सह-संस्थापक सत्यम कुमार बताते हैं कि कर्ज लेने वाले को हर महीने ब्याज ही चुकाना होता है। 11 महीने के दौरान अपनी सहूलियत से वह किसी भी वक्त मूलधन चुका सकता है।
 
पी2पी ऋण प्लेटफॉर्म से कर्ज
 
आप चाहें तो कर्ज के लिए पीयर2पीयर (पी2पी) प्लेटफॉर्म के पास भी जा सकते हैं। आई2आई फंडिंग के सह-संस्थापक राघवेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं, 'हमारे पास कर्ज के जितने भी आवेदन आते हैं, उनमें से 25 से 30 फीसदी क्रेडिट कार्ड का कर्ज चुकाने के लिए होते हैं।' वह कहते हैं कि अगर एक बार किसी व्यक्ति का क्रेडिट कार्ड का कर्ज बढऩा शुरू हो जाता है तो उसका क्रेडिट स्कोर गिर जाता है और उसी वजह से उसे औपचारिक वित्तीय संस्था से कर्ज मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। जब कोई व्यक्ति कर्ज के लिए अर्जी डालता है तो उसकी अर्जी की जांच की जाती है और उसके बाद उसे प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया जाता है। अपलोड होने के बाद प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत ऋणदाता कर्ज देने के बारे में विचार करते हैं।
 
ब्याज दर ग्राहक के प्रोफाइल पर निर्भर करती है। आई2आई 12 से 30 फीसदी तक की ब्याज दर पर कर्ज देता है। सिंह कहते हैं, 'अगर आप वेतनभागी पेशेवर हैं, किसी प्रतिष्ठिïत कंपनी के लिए काम करते हैं, आपका मासिक वेतन 30,000 या 40,000 रुपये है और आपकी आय तथा कर्ज का अनुपात अधिक नहीं है तो आपको 18 से 22 फीसदी की ब्याज दर पर कर्ज हासिल हो सकता है।'
 
फेयरसेंट डॉट कॉम 14 से 20 फीसदी तक ब्याज वसूलती है। पी2पी प्लेटफॉर्म में एक खामी यह है कि आप कर्ज हासिल करने की सभी शर्तें बेशक पूरी करते हों, आपको कर्ज तभी मिलेगा, जब प्लेटफॉर्म पर ऐसा कोई ऋणदाता हो, जो आपके प्रोफाइल को देखने के बाद आपको कर्ज देने के लिए तैयार हो।
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