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रिफंड न मिलने से निर्यातक परेशान

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली November 26, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की उलझन अब भी सुलझ नहीं पाई है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले चार महीने से रिफंड के मद में निर्यातकों की कम से कम 50,000 करोड़ रुपये की रकम फंसी हुई है। इससे पूंजी संकट तो पैदा हुआ ही है, साथ ही देश से होने वाला निर्यात भी प्रभावित हो रहा है।  सरकार ने अब तक एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) के तहत जुलाई के लिए महज 350 करोड़ रुपये की राशि ही निर्गत की है, जबकि निर्यातकों ने 750 करोड़ रुपये का दावा किया था। इनपुट टैक्स क्रेडिट भी अब तक नहीं मुनासिब हो पाया है। उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार नवंबर के निर्यात आंकड़ों पर नकारात्मक असर दिख सकता है, क्योंकि निर्यातक आगे के लिए कारोबारी सौदे नहीं कर पा रहे हैं। 
 
वैसे सरकार का दावा है कि रिफंड की प्रक्रिया जारी है और देरी जीएसटी नेटवर्क की वजह से हुई है। इस बीच, सरकार ने कहा कि जुलाई के लिए निर्यातकों के मात्र 550 करोड़  रुपये के दावे ही वाजिब हैं। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'रिफंड की प्रक्रिया चल रही है। जीएसटी नेटवर्क पर रिफंड से जुड़े फॉर्म उपलब्ध नहीं होने के कारण देरी हुई है। इसे दुरुस्त करने का कोई जरिया भी नहीं था। अब हम रिफंड प्रक्रिया में तेजी ला रहे हैं।'
 
फेडेरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोट्र्स ऑर्गेनाइजेशन के अजय साहनी ने कहा कि निर्यातकों के लिए मौजूदा स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, 'निर्यातकों के करीब 50,000 करोड़ रुपये के रिफंड अटके हुए हैं। रकम के अभाव में वे नए सौदे नहीं ले पा रहे हैं। नवंबर के निर्यात के आंकड़ों पर निश्चित ही इसका  असर पड़ेगा।' भारत से वस्तुओं के निर्यात में अक्टूबर में कमी आई। जीएसटी लागू होने के बाद निर्यातकों के समक्ष पैदा हुई पूंजी की कमी की वजह से पिछले 14 महीने में पहली बार निर्यात प्रभावित हुआ। इससे 35 महीनों में व्यापार घाटा सर्वाधिक हो गया। अक्टूबर में निर्यात 1.1 प्रतिशत कम होकर 23.1 अरब डॉलर रहा। कुल रिफंड में करीब 85 प्रतिशत रकम इनपुट टैक्स क्रेडिट के कारण बकाया है जबकि मात्र 15 प्रतिशत आईजीएसटी के कारण अटकी पड़ी है।
 
सरकार के अनुसार माल के खेप के बिल नंबर और कुछ अन्य कारणों से 200 करोड़ रुपये के रिफंड के दावे अवैध हैं। अधिकारी ने कहा, 'रिफंड के दावे में कुछ अनियमितताएं दिखीं हैं। जुलाई के लिए केवल 550 करोड़ रुपये के दावे ही वाजिब माने जा सकते हैं। अगर किसी से कोई गलती हुई है तो उसके लिए सरकार जिम्मेदार नहीं है। 200 करोड़ रुपये रिफंड के मामले ऐसे हैं, जो ड्यूटी ड्रॉबैक ले चुके हैं, इसलिए कर रिफंड के योग्य नहीं हैं।' जीएसटी लागू होने के बाद भी तीन महीनों के लिए ड्यूटी ड्रॉबैक स्कीम उन निर्यातकों के लिए आगे बढ़ा दी गई थी, जो जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले रहे थे। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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