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इंडिगो के लिए कर्मचारी प्रबंधन से जुड़ा सबक

इंसानी पहलू
श्यामल मजूमदार /  November 23, 2017

कुछ दिन पहले तक इंडिगो सातवें आसमान पर नजर आ रही थी। उसने यह घोषणा की थी कि वह दिसंबर में रोजाना 1,000 उड़ानों का आंकड़ा हासिल कर लेगी। एयरलाइन की खुशी उस बयान में भी झलकी थी जिसमें कहा गया था कि उसकी 'हरेक उड़ान लाखों लोगों को अपने सपने पूरा करने का मौका देती है।' लेकिन उसके दो दिन बाद तस्वीर बदल चुकी थी। देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी ने खुद को एक ऐसी स्थिति में पाया जब ग्राहकों के प्रति दोस्ताना रवैया रखने वाले संगठन के रूप में उसकी प्रतिष्ठा दांव पर लग चुकी थी। एक प्रौढ़ यात्री के साथ मारपीट करते इंडिगो के कुछ कर्मचारियों का वीडियो सामने आया। ये तस्वीरें वायरल होने तक उसने चुप्पी साधे रखी और फिर इस पर खेद जताया। 

 
इंडिगो को साफ तौर पर अपने मानव संसाधन एवं प्रशिक्षण तौर-तरीकों में बदलाव करने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके। इसकी शुरुआत वह किसी संकट के समय अपनी प्रतिक्रिया क्षमताओं की समीक्षा करते हुए कर सकती है। दरअसल इस वाकये ने दिखाया कि एयरलाइन के कर्मचारी मारपीट की घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर मचे हंगामे से निपटने के लिए तैयार ही नहीं थे। किसी भी कंपनी के लिए यह जरूरी है कि वह अपने कर्मचारियों को संभावित संकटपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखे। किसी भी मामले में बाहरी दुनिया पर पूर्व-निर्णय का आरोप लगाने से शायद ही कोई मदद मिलेगी। असल में किसी भी उपभोक्ता-केंद्रित उद्योग के लिए धारणा प्रबंधन उसके प्रशिक्षण कार्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा होता है।
 
इंडिगो के सामने दूसरा काम यह है कि वह अपने कर्मचारियों में  बेहतर संवाद एवं संचार की क्षमता विकसित करे क्योंकि किसी भी कार्यस्थल पर कामयाबी के लिए ये गुण काफी अहम हैं। अब कोई भी कंपनी ऐसी दुनिया में नहीं रह सकती है जहां कामयाबी के लिए केवल तकनीकी महारत पर ही निर्भर रहा जाए। इसके बजाय दूसरों के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर सकने की क्षमताओं को आगे रखा जाना चाहिए। जहां तक मुश्किल ग्राहकों से निपटने का सवाल है तो उनका गला पकडऩे के बजाय उनकी बात को सुनना और उनसे सम्मति जताना हमेशा बेहतर होता है।
 
तीसरा काम यह करना होगा कि एयरलाइन अपने कर्मचारियों को तनाव से निपटने में मदद करे। सीमित अवधि में हरेक कर्मचारी को समयसीमा का पालन करने या एक चुनौतीपूर्ण दायित्व पूरा करने में दबाव का सामना करना पड़ता है। लेकिन जैसे ही काम से संबंधित तनाव गंभीर रूप लेने लगता है तो वह अत्यधिक भारी पडऩे लगता है और शारीरिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। ऐसे में कर्मचारियों के लिए सहायता कार्यक्रम के जरिये तनाव प्रबंधन संसाधन रखना उपयोगी है। ऑनलाइन सूचना और काउंसलिंग भी मददगार हो सकती हैं।
 
एयरलाइन कर्मचारियों के लिए तो तनाव प्रबंधन उपायों की खास जरूरत है। वे हवाई परिवहन बढऩे, सुरक्षा मानदंडों के सख्त होने, काम के अनियमित घंटे होने और आराम का पर्याप्त समय नहीं मिल पाने से अधिक दबाव में हैं। इंटरनैशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन के एक अध्ययन के मुताबिक, दुनिया भर में सस्ती विमानन सेवाएं परिचालन लागत कम करने और कम किराये की पेशकश करने के लिए अपने कर्मचारियों से अधिकतम सीमा तक काम लेती हैं। फेडरेशन का यह भी कहना था कि खराब ढंग से प्रशिक्षित किए गए ये 'भावुक श्रमिक' या एक ही समय पर कई कामों में लगाए गए कर्मचारियों को क्रोधित यात्रियों से कारगर तरीके से निपटने में दिक्कत हो सकती है। जब किसी विमान से जल्दबाजी में माल ढुलाई होने के बाद अनमने चालक दल और असंतुष्ट यात्री उस उड़ान पर रवाना होते हैं तो केबिन सदस्यों से ढेर सारे यात्रियों की देखभाल करने की उम्मीद की जाती है। चालक दल में व्यवस्थागत नाकामी के चलते मार्केटिंग में व्यवस्थागत नाकामी और भी बढ़ जाती है।
 
इंडिगो ब्रिटिश एयरवेज की संस्कृति में किए गए बदलावों से भी काफी कुछ सीख सकती है। ब्रिटिश एयरवेज के कर्मचारियों में असंतोष काफी हद तक बढऩे लगा था। ऐसी स्थिति में इस विदेशी एयरलाइन ने अपने कर्मचारियों के लिए एक सहायता कार्यक्रम 'पुटिंग पीपुल फस्र्ट' चलाया था जो आज कई विश्वविद्यालयों के लिए शोध का विषय बना हुआ है। इसमें कर्मचारियों के रवैये को सही कर उन्हें तनाव का बेहतर तरीके से सामना करने और व्यक्तिगत लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया था। एयरवेज कर्मचारियों के कोट कॉलर पर भी स्टाफ को तवज्जो देने का संदेश लिखा होता था ताकि हरेक को इसका अहसास होता रहे। व्यवस्था को भी ऐसे बनाया गया कि कर्मचारी शीर्ष प्रबंधन तक सीधे अपनी बात पहुंचा सकें। इसके जरिये यह संदेश देने की कोशिश की गई थी कि उसके सचल एवं दूरदराज के कर्मचारी भी नजरअंदाज नहीं किए जाते हैं। दरअसल ब्रिटिश एयरवेज ऐसी पहली विमानन कंपनी बनी जिसने अपने कर्मचारियों के लिए रोजाना टीवी प्रसारण शुरू किया था।
 
ब्रिटिश एयरवेज के तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी कॉलिन मार्शल ने कहा था कि एयरलाइन को अपने स्टाफ और सेवा संबंधी उनके नजरिये को उसी तरह 'डिजाइन' करना था जिस तरह विमान की सीट, उसमें लगने वाले मनोरंजन उपकरणों या एयरपोर्ट लाउंज को यात्रियों की सुविधा और पसंद के आधार पर डिजाइन किया जाता है। निश्चित रूप से उस कार्यक्रम ने ब्रिटिश एयरवेज की सभी समस्याओं को हल नहीं किया था लेकिन अगर इंडिगो उसी तर्ज पर कोई कार्यक्रम लागू करती है तो उससे उसे कोई नुकसान भी नहीं होगा।
Keyword: aviation, विमानन indigo,,
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