बिजनेस स्टैंडर्ड - कॉफी उत्पादक बोर्ड के अनुमान से असहमत
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कॉफी उत्पादक बोर्ड के अनुमान से असहमत

टी ई नरसिम्हन / चेन्नई November 19, 2017

कर्नाटक के कॉफी उत्पादकों ने वर्ष 2017-18 में उत्पादन करीब 3,12,000 टन रहने का अनुमान जताया है। यह कॉफी बोर्ड के उत्पादन के अनुमान 3,50,000 की तुलना में बहुत कम है। उत्पादकों ने आरोप लगाया है कि बोर्ड ने आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए हैं।  कॉफी बोर्ड के फसल में फूल आने के बाद का 2017-18 का उत्पादन अनुमान 3,50,400 टन है, जिसमें 1,03,100 टन अरेबिका और 2,47,300 टन रोबस्टा का उत्पादन शामिल है। यह पिछले साल यानी 2016-17 के अंतिम अनुमान (3,12,000 टन) से 38,000 टन (12.31 फीसदी) अधिक है। 

 
कॉफी बोर्ड वाणिज्य मंत्रालय के तहत आता है। कॉफी बोर्ड ने कहा कि कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के परंपरागत उत्पादक क्षेत्रों में कॉफी का रकबा 13,500 हेक्टेयर बढ़ा है, जिससे उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा फूल आने के बाद के अनुमान इस साल मई में जारी किए गए थे, इसलिए अगर मई 2017 के बाद कोई नुकसान हुआ है तो उस पर मॉनसून के बाद के अनुमान में विचार किया जाएगा। 
 
कर्नाटक प्लांटर्स एसोसिएशन (केपीए) के चेयरमैन मनीयपांडा एम चेंगप्पा ने कहा कि कटाई के बाद के आंकड़ों के आधार पर 2016-17 में कॉफी का कुल उत्पादन 3,12,000 टन रहा, जो इससे पिछले साल 3,48,000 टन था। चेंगप्पा ने कहा, 'वर्ष 2017-18 भी उत्पादन करीब 3,05,000 से 3,12,000 टन रहने का अनुमान है। हालांकि कॉफी बोर्ड ने उत्पादक जिलों में रकबा करीब 13,500 हेक्टेयर बढऩे का हवाला देते हुए 3,50,000 टन उत्पादन का आंकड़ा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है।' 
 
गौरतलब है कि देश के कुल कॉफी उत्पादन में 72 फीसदी योगदान कर्नाटक का है। कॉफी बोर्ड ने कहा कि फसल में फूल आने के बाद के अनुमानों के आधार पर 2017-18 में उत्पादन 2,51,760 टन रहेगा, जो पिछले साल 2,21,745 टन था। वहीं केरल में उत्पादन 68,520 टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के अंतिम अनुमान 63,265 टन से 5,255 टन (8.31 फीसदी) अधिक है। केरल में मुख्य रूप से रोबस्टा कॉफी का उत्पादन होता है। 
 
तमिलनाडु में उत्पादन 19,160 टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के अंतिम अनुमान 16,335 टन से 2,825 टन (17.29 फीसदी) अधिक है। आंध्र प्रदेश, ओडिशा और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के गैर-परंपरागत क्षेत्रों में उत्पादन 10,960 टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल का अंतिम अनुमान 10,655 टन था। इन गैर-परंपरागत क्षेत्रों में उत्पादन बढऩे की वजह आंध्र प्रदेश में रकबा बढऩा है। चेंगप्पा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से कीट और बीमारियां बढ़ी हैं, जिनका कॉफी की उत्पादकता पर असर पड़ता है। कर्नाटक में पिछले एक दशक के दौरान अरेबिका कॉफी की उत्पादकता 1,200 किलोग्राम से घटकर 600 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और रोबस्टा कॉफी की उत्पादकता 2,000 किलोग्राम से घटकर 1,400 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गई है। उन्होंने कहा कि इस साल भी कॉफी उत्पादक जिलों में बारिश के अहम महीनों में बेवक्त और कम बारिश हुई है। इसके कारण कॉफी की खड़ी फसल कमजोर है। 
Keyword: coffee, tea, bagan, चाय बोर्ड दार्जिलिंग,
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