बिजनेस स्टैंडर्ड - पावरलूम क्षेत्र को उबारेगी तकनीक
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पावरलूम क्षेत्र को उबारेगी तकनीक

दिलीप कुमार झा / मुंबई November 19, 2017

केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी एनर्जी एफिशंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) के साथ मिलकर पावरलूम क्षेत्र को मुश्किलों से उबारने के लिए तकनीक सुधार योजना शुरू की है। इस योजना को सस्टेनेबल ऐंड एक्सीलरेटेड अडोप्शन ऑफ एफिशंट टेक्सटाइल टेक्नोलॉजिज टू हेल्प स्मॉल इंडस्ट्रीज (साथी) नाम दिया गया है। योजना के तहत बहुत पुरानी तकनीक की जगह नई तकनीक लागू की जाएगी, लेकिन पावरलूम मालिकों को इसके लिए पहले कोई कीमत नहीं चुकानी होगी। 
 
इस पहल के तहत विद्युत मंत्रालय के तहत आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ईईएसएल बड़ी मात्रा में कम बिजली की खपत करने वाले पावरलूम, मोटर और रेपियर किट की खरीद करेगी। वह ये उपकरण लघु एवं मझोली पावरलूम इकाइयों को पहले कोई पैसा लिए बिना मुहैया कराएगी।  सिंथेटिक ऐंड रेआन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एसआरटीईपीसी) के चेयरमैन श्री नारायण अग्रवाल ने कहा, 'इकाइयों के मालिकों को न तो ये उपकरण खरीदने के लिए पहले पैसे चुकाने होंगे और न ही बाद में इनकी कीमत का पैसा लौटाने के लिए अतिरिक्त रकम का इंतजाम करना होगा। दरअसल ईईएसएल को पैसा उस बचत में से लौटाया जाएगा, जो उन्हें अच्छे उपकरण लगाने और लागत घटने से होगी। ईईएसएल बड़ी मात्रा में उपकरणों की खरीद करेगी, जिससे पूंजी की लागत कम होगी। इसका लाभ पावरलूम इकाइयों को दिया जाएगा ताकि उन्हें कम रकम लौटानी पड़े और वे जल्द यह रकम लौटा दें।' 
 
अग्रवाल ने कहा, 'कम बिजली की खपत वाले उपकरण लगाने से बिजली की बचत होगी, जिसका इकाई के मालिक की लागत घटेगी। इकाई का माालिक ईईएसएल को 4-5 साल में किस्तों में रकम का भुगतान करेगा। यह बड़ी मांग, बड़ी मात्रा में खरीद और उधारी का मॉडल है, जिसे ईईएसएल एलईडी बल्ब, स्मार्ट मीटर और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे कई क्षेत्रों में अपना चुकी है।'
 
ईईएसएल और कपड़ा आयुक्त पूरे देश में साथी योजना को लागू करेंगे। इसके अमलीजामे की शुरुआत के लिए इरोड, सूरत, इच्छलकरंजी जैसे प्रमुख क्लस्टरों में प्रदर्शनी और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। देश में ज्यादातर पावरलूम क्षेत्र असंगठित है। इसमें बड़ी तादाद में सूक्ष्म एवं लघु इकाइयां हैं, जो देेश में 57 फीसदी कपड़े का उत्पादन करती हैं। देश में 24.9 लाख पावरलूम हैं, जिनमें से ज्यादातर असंगठित क्षेत्र की हैं और वे पुरानी तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। ये मुख्य रूप से नकद में सौदे करती हैं और कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखती हैं। देश का पावरलूम क्षेत्र पहले नोटबंदी से और उसके बाद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से प्रभावित हुआ है। 
 
केंद्र सरकार तकनीक में सुधार के मकसद से अभी पावर टेक्स इंडिया के तहत प्लेन पावरलूम के इनसिटू में सुधार कर रही है। इस योजना के तहत प्लेन पावरलूम को प्रोसेस कंट्रोल इक्विपमेंट से जोड़ा जाता है, जिससे ज्यादा उत्पादन होता है, गुणवत्ता बेहतर होती है और 50 फीसदी अधिक कीमत मिलती है। इस योजना के तहत अब तक 1,70,000 को अद्यतन बनाया जा चुका है, जिसके लिए सरकार ने कुल 186 करोड़ रुपये की सब्सिडी मुहैया कराई है। 
Keyword: textiles, कपड़ा एवं परिधान नीति,
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