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बैंक ई-वॉलेट पर गहरा रहा है संकट

निकहत हेतवकर / मुंबई November 17, 2017

इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट (ई-वॉलेट) कंपनियों के साथ बैंक जिस तेजी के साथ हाथ मिला रहे हैं, उससे उनके अपने वॉलेट पर खतरा मंडराने लगा है। माना जा रहा है कि बैंकों के अपने वॉलेट जल्द ही बंद हो सकते हैं। विश्लेषक कहते हैं कि बैंकों के अपने वॉलेट शुरू करने के बजाय बाजार में पहले से मौजूद मोबाइल वॉलेट कंपनियों के साथ मिलाना अधिक मुफीद है। डेलॉयट इंडिया में पार्टनर विजय मणि ने कहा, 'तकनीक तेजी से बदल रही है। ऐेस में वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) क्षेत्र की कंपनियों के साथ हाथ मिलाकर नए डिजिटल उत्पादों को अपनाना फायदेमंद है। इसलिए कई बैंक ऐप्लिकेशन विकसित करने के लिए प्रौद्योगिकी फर्मों के साथ भागीदारी कर रहे हैं।' आईसीआईसीआई बैंक के पास अपना वॉलेट है। फिर भी गुरुवार को उसने पेटीएम के साथ हाथ मिलाया, जिसके तहत वह क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर छोटी अवधि के लिए छोटे कर्ज देगा। निजी क्षेत्र के इस आला बैंक का कहना है कि इस साझेदारी का मकसद ऐसे ग्राहकों तक पहुंचना है, जो कर्ज या क्रेडिट की दुनिया में नए हैं। इस तरह बैंक अपने मौजूदा ग्राहकों से परे नए ग्राहक भी हासिल कर लेगा।
 
जब निजी क्षेत्र के ऐक्सिस बैंक ने फ्रीचार्ज का अधिग्रहण किया था तो उसने फैसला किया था कि उस ब्रांड को चलते रहने दिया जाएगा और वह उसे अपने वॉलेट के साथ नहीं मिलाएगा। ऐक्सिस बैंक में रिटेल लेंडिंग एंड पेमेंटï्ïस के प्रमुख संग्राम सिंह ने कहा, 'उपभोक्ता वॉलेट का इस्तेमाल अक्सर ऐसे लेनदेन के लिए करते हैं, जिनमें रकम छोटी होती है, लेकिन जिन्हें बार-बार करना पड़ता है। उपभोक्ताओं के साथ रिश्ते मजबूत करने में यह काफी कारगर तरीका है। साथ ही बैंक इन ग्राहकों के साथ शुरुआती भुगतान से भी आगे का रिश्ता बना सकता है और उन्हें सेगमेंट-आधारित बैंकिंग उत्पाद मुहैया करा सकता है।' 
 
इसी तरह आईडीएफसी बैंक के पास अपना वॉलेट 'जिगिट' था, लेकिन उसने ई-वॉलेट सेवाओं के लिए हाल ही में मोबिक्विक के साथ भी भागीदारी की है। आईडीएफसी बैंक के कार्यकारी निदेशक अवतार मोंगा ने कहा, 'हम जिगिट को अकेले नहीं बढ़ाना चाहते। यूं भी हम बड़ी रकम खर्च कर ज्यादा ग्राहकों का साथ नहीं खरीद रहे थे।' आईडीएफसी बैंक का जिगिट और ऐक्सिस बैंक का लाइम अब ऐपल ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं है। 
 
गार्टनर इंडिया के शोध निदेशक डी डी मिश्रा ने कहा, 'बैंकों के लिए तकनीकी हलचलों पर लगातार नजर रखना और उनके साथ तालमेल बिठाते रहना आसान नहीं है। लेकिन ई-वॉलेट कंपनियां इस मामले में नए तरीके से काम करती हैं क्योंकि उनका असली धंधा यही है। यूं भी अब सब कुछ खुद ही करने का जमाना नहीं रह गया। अब पूरी व्यवस्था तैयार करनी होती है।' कुछ प्रमुख ई-वॉलेट कंपनियों के वॉलेट को गूगल प्ले स्टोर पर 1 करोड़ से भी ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। पेटीएम को तो 5 करोड़ से भी अधिक बार डाउनलोड किया गया है। लेकिन बैंकों के वॉलेट को बहुत कम लोगों ने डाउनलोड किया है। केवल भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का वॉलेट 'स्टेट बैंक बडी' 1 करोड़ बार डाउनलोड किया गया है। आईसीआईसीआई बैंक के पॉकेट्स और एचडीएफसी बैंक के जैपपे को 50-50 लाख बार ही डाउनलोड किया गया है। इंडसइंड बैंक ने वॉलेट लाने के बजाय मोबिक्विक के साथ मिलकर को-ब्रांडेड वॉलेट पेश किया है। 
 
मोबिक्विक की सह-संस्थापक उपासना टाकू ने कहा, 'उपयोगकर्ता के लेनदेन रिकॉर्ड आदि से प्राप्त आंकड़ों से हमें पता चल जाता है कि उसे कितना कर्ज दिया जा सकता है और इस तरह हमें कर्ज या बीमा जैसे नए उत्पाद उसे देने में मदद मिलती है।' बैंकों और ई-वॉलेट कंपनियों दोनों के लिए इस तरह की साझेदारी फायदेमंद होती है। जहां बैंकों को मोबाइल वॉलेट का व्यापक ग्राहक आधार मिल जाता है, वहीं वॉलेट को भी बैंक के कार्ड नेटवर्क के साथ ऑनलाइन और ऑफलाइन भुगतान में शामिल होने का मौका मिल जाता है।
 
निजी बैंकों ने तो इस मौके को दोनों हाथों से लपका है, लेकिन सरकारी बैंक उसे अपनाने में बहुत देर लगा रहे हैं। स्टेट बैंक जरूर इसका अपवाद है। सरकारी बैंकों के अधिकारियों का कहना है कि कड़ी प्रतिस्पर्धा ने डिजिटल बैंकिंग पर जोर देने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा है। लेकिन कई सरकारी बैंक इस काम के लिए संसाधन, प्रतिभा और समय की किल्लत से जूझ रहे हैं। इसलिए ऐसी कंपनियों के साथ साझेदारी करना ही समझदारी वाला कदम है, जिन्हें एप्लिकेशन और उत्पाद विकसित करने और उन्हें सही समय पर बाजार में उपलब्ध कराने में महारत हासिल है। पेमेंट्ïस काउंसिल ऑफ इंडिया में प्रीपेड कमेटी के सह-अध्यक्ष सुनील कुलकर्णी ने कहा कि खुद के वॉलेट वाले बैंकों का मॉडल कारगर नहीं रहा है। वह कहते हैं, 'ई-वॉलेट कंपनियों ने भुगतान और सेवा आपूर्ति के लिए उपभोक्ता अनुभव पर खास ध्यान केंद्रित किया है जबकि बैंकों का ज्यादा जोर जमाओं और ऋणों पर ही रहा है।'
Keyword: bank, e wallet, company,,
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