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मूडीज ने सुधार दिया मूड

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली November 17, 2017

नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर भले ही कुछ वर्ग सरकार को कोस रहे हों, लेकिन रेटिंग एजेंसियों को ये दोनों कदम बहुत पसंद आए हैं और इनसे भारत की रेटिंग में सुधार हो रहा है। इन दोनों कदमों और बैंकों फंसे कर्ज का बोझ कम करने की सरकारी कवायद के कारण रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर सर्विसेज ने आज भारत की रेटिंग बढ़ा दी और उसे सबसे कम निवेश की श्रेणी से ऊपर वाली श्रेणी में रख दिया। लेकिन उसने भारत को ऋण और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के ऊंचे अनुपात पर चेताया है। उसने यह भी कहा है कि भूमि और श्रम सुधारों का एजेंडा अभी पूरा नहीं हुआ है। इन सुधारों के लिए केंद्र को राज्यों के सहयोग की जरूरत है।
 
इससे पहले मूडीज ने करीब 14 साल पहले 2004 में भारत की रेटिंग सुधार किया था और उसे जंक ग्रेड से बाहर निकाला था। उस वक्त भी राष्टï्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ही सरकार थी। मोदी सरकार रेटिंग एजेंसियों को यह भरोसा दिलाने कोशिश करती रही है कि देश की रेटिंग में सुधार होना चाहिए। लेकिन अभी तक इसका खास असर नहीं हुआ था। हालांकि 2015 में मूडीज ने भारत के रेटिंग परिदृश्य को सबसे कम निवेश श्रेणी में सकारात्मक बता दिया था। पिछली संप्रग सरकार ने भी एजेंसियों से भारत की रेटिंग बढ़ाने का आग्रह किया था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ था।
 
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों से हमने जो भी सकारात्मक कदम उठाए हैं, उन्हें मान्यता दी गई है, लेकिन देर से दी गई है।' रेटिंग में सुधार के मूडीज के कदम से भारत में पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा, रुपया मजबूत होगा और भारतीय कंपनियों को विदेशों से कम ब्याज दर पर पूंजी मिल सकेगी। यही सब भांपकर शुक्रवार को सेंसेक्स भी 235.98 अंक उछलकर 33,342.80 पर बंद हुआ।
 
देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि मूडीज द्वारा भारत की रेटिंग सुधारे जाने से सरकार और वित्तीय संस्थाओं की उधारी की लागत कम होगी, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और सुधारों को लेकर निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा। बाजार नियामक सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने कहा कि रेटिंग सुधरने से निवेश और भी बढ़ेगा, जिसमें विदेशी पूंजी भी शामिल है।
 
नई रेटिंग का परिदृश्य स्थिर है। इसका मतलब है कि भारत की रेटिंग को सुधारने और बिगाडऩे वाले कारक अभी लगभग बराबर हैं। इससे पहले रेटिंग परिदृश्य सकारात्मक था, लेकिन रेटिंग कम थी, जिसका अर्थ था कि रेटिंग में सुधार के बजाय गिरावट की आशंका अधिक थी। इससे छह महीने पहले मूडीज ने चीन की सॉवरिन रेटिंग एक पायदान घटाई थी। तब भी चीन को मिली रेटिंग भारत से दो पायदान ज्यादा थी।
 
स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स तथा फिच ने अब भी भारत को स्थिर परिदृश्य के साथ सबसे निचली निवेश श्रेणी में रखा है। अब सबकी निगाहें इन दो रेटिंग एजेंसियों पर होंगी कि वे भी मूडीज की तर्ज पर भारत की रेटिंग बढ़ाती हैं या नहीं। एसऐंडपी का कहना है कि भारत को अपनी कमजोर राजकोषीय स्थिति को संभालने की जरूरत है, जो इस बात का संकेत है कि भारत को रेटिंग में सुधार के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है।
 
मूडीज का कहना है कि सरकार के सुधार कार्यक्रम की अहम कडिय़ों में जीएसटी, मौद्रिक नीति ढांचे में सुधार, बैंकिंग प्रणाली में फंसे कर्ज की समस्या से निपटने के लिए किए गए उपाय, नोटबंदी, आधार और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण शामिल हैं। इन उपायों से अर्थव्यवस्था की बाधाएं दूर होंगी। अलबत्ता मूडीज ने साथ ही चेताया है कि भारत पर कर्ज का ऊंचा बोझ देश के क्रेडिट प्रोफाइल में रोड़ा बना हुआ है। 
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