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अफ्रीका से घटा कच्चे तेल का आयात, मगर अमेरिका से बढ़ा

रॉयटर्स / नई दिल्ली November 17, 2017

अक्टूबर में भारत का अफ्रीका से कच्चे तेल का आयात गिरकर अपने चार साल के निम्र स्तर पर आ गया। दुनिया के इस तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देश के लगातार अमेरिका और पश्चिम एशिया के भारी ग्रेड वाले सस्ते तेल की ओर रुख करने से ऐसा हुआ है। शिप ट्रैकिंग के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। अमेरिकी कच्चे तेल का उत्पादन 2016 के मध्य से 14 प्रतिशत से भी अधिक बढ़कर 96.5 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) हो गया है। चूंकि तुलनात्मक रूप से यह सस्ता होता है और एशियाई रिफाइनरों के लिए हल्के ग्रेड का आयात विकल्प संभव हुआ है, इसलिए व्यापार मार्ग में परिवर्तन करने से उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है।
 
रिसोर्स इकॉनमिस्ट में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों के निदेशक एहसान उल-हक ने कहा कि पहले एशिया में पश्चिमी अफ्रीकी तेल पश्चिमी एशिया के तेल के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा था, लेकिन अब इसका एक नया प्रतिस्पर्धी है - अमेरिका। अमेरिकी कच्चे तेल के उत्पादन में इजाफे ने अंतरराष्टï्रीय बेंच मार्क ब्रेंट के मुकाबले वेस्ट टैक्सस इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) से संबद्ध अमेरिकी तेल को तुलनात्मक रूप से सस्ता बना दिया है। तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) के नेतृत्व में ब्रेंट तेल आपूर्ति में कटौती का समर्थन करता रहा है। अक्टूबर के बाद से डब्ल्यूटीआई छह डॉलर प्रति बैरल की औसत छूट पर चल रहा है। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन में रिफाइनरीज के प्रमुख आर रामचंद्रन ने कहा कि पिछले कुछेक महीनों में अमेरिकी तेल ने अफ्रीकी ग्रेड्स से जोरदार मुकाबला किया है और कीमत का अंतर (डब्ल्यूटीआई और ब्रेंट के बीच) माल भाड़े को पूरा करने के लिए पर्याप्त था।
 
2015 में जब अमेरिका ने अपने बढ़ते उत्पादन के साथ-साथ निर्यात की कठोर पाबंदियों को आसान किया, उससे पहले तक अमेरिकी कच्चे तेल की भारत को निर्यात किए जाने की बात कभी सुनी ही नहीं गई थी। थॉमसन रॉयटर्स ईकॉन के शिप ट्रैकिंग के आंकड़े दर्शाते हैं कि लगातार बढ़ते हुए इस साल अक्टूबर में अमेरिकी तेल का योगदान भारत के कुल आयात का तकरीबन तीन प्रतिशत हो गया है, जबकि अफ्रीकी कच्चे तेल का हिस्सा करीब 10.5 प्रतिशत गिरा है जो नवंबर 2012 के बाद से निम्रतम स्तर है।
 
अक्टूबर में भारत का कुल तेल आयात 41 लाख बैरल प्रति दिन था। इसमें सितंबर के मुकाबले 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। पिछले साल के मुकाबले भी यह आयात 4.6 प्रतिशत कम रहा। इसमें से करीब 4,30,000 बैरल प्रति दिन अफ्रीका से आयात हुआ जो मार्च 2013 के बाद से सबसे कम स्तर है। नाइजीरिया से आपूर्ति में बाधा पडऩे से भी इसके निर्यात पर चोट पड़ी है, जिसने भारतीय रिफाइनरों पर आपूर्ति का अन्य स्रोत तलाशने का दबाव बनाया। आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले महीने भारत के कुल आयात में पश्चिम एशिया का हिस्सा बढ़कर इस साल के अपने शीर्ष स्तर पर पहुंच गया जो तकरीबन 28 लाख बैरल प्रति दिन के साथ करीब 70 प्रतिशत रहा।
 
रामचंद्रन ने कहा कि कम सल्फर के बजाय रिफाइनर्स मध्यम सल्फर वाला तेल चाह रहे हैं इसलिए खेप पश्चिम अफ्रीका से पश्चिम एशिया की ओर स्थानांतरित हो रही है। भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता इराक है और इसके बाद सऊदी अरब। तीसरे सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता के रूप में नाइजीरिया का स्थान ईरान ने ले लिया है।
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