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सिले-सिलाये परिधानों का निर्यात गिरा

टी ई नरसिम्हन / चेन्नई November 16, 2017

रेडिमेड परिधानों के निर्यात में सितंबर में करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी लेकिन अक्टूबर में इसमें लगभग 41 फीसदी की गिरावट आई है। निर्यातकों का कहना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर चीजें स्पष्टï नहीं होने के कारण निर्यात में कमी आई है। साथ ही दूसरे प्रतिस्पद्र्घी देशों की तुलना में भारत अच्छी स्थिति में नहीं है।  रेडिमेड परिधानों का निर्यात सितंबर में बढ़कर 10,707 करोड़ रुपये पहुंच गया था जो एक साल पहले इसी महीने 8,583.55 करोड़ रुपये था। डॉलर के संदर्भ में देखा जाए तो इस साल सितंबर में 1.662 अरब डॉलर का निर्यात किया गया जबकि पिछले साल इसी महीने ये 1.284 अरब डॉलर था। तीन महीने के अंतराल के बाद रेडिमेड परिधानों के निर्यात में सकारात्मक बढ़ोतरी हुई। लेकिन अक्टूबर में रेडिमेड परिधानों के निर्यात में 41 फीसदी की गिरावट आई। रुपये के संदर्भ में यह 9,100.75 करोड़ रुपये से घटकर 5,398.08 करोड़ रुपये रह गया। डॉलर के संदर्भ में यह गिरावट 39.22 फीसदी है। पिछले साल इस महीने 1.364 अरब डॉलर के रेडिमेड कपड़ों का निर्यात हुआ था जबकि इस बार यह 0.829 अरब डॉलर रहा। 

 
फियो सदर्न रीजन के रीजनल चेयरमैन और तिरुपुर एक्सपोटर्स एसोसिएशन (टीईए) के पूर्व अध्यक्ष ए शक्तिवेल ने कहा कि नकदी की भारी कमी के कारण निर्यातक वैश्विक व्यापार के सकारात्मक रुझान का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निर्यातकों को जुलाई और अगस्त में भुगतान किए गए जीएसटी के रिफंड में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है लेकिन व्यवस्था की खामियों के कारण रिफंड के अधिकांश मामले अभी सुलझाए नहीं जा सके हैं। उन्होंने केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) से निर्यात पर भुगतान किए गए एकीकृत जीएसटी के आधार पर तुरंत जीएसटी रिफंड जारी करने की मांग की और कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो इसके लिए बाद में सत्यापन किया जा सकता है।
 
शक्तिवेल ने वित्त मंत्रालय से 31 मार्च, 2018 तक ड्यूटी ड्रॉबैक की पुरानी दर बहाल करने का अनुरोध किया ताकि भारतीय उत्पाद प्रतिस्पद्र्घी बन सकें और सकारात्मक रुझानों का फायदा उठा सकें। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा करना संभव न हो तो निर्यात उत्पादों पर लगने वाले करों के रिफंड की व्यवस्था बनाई जाए। शक्तिवेल ने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि वह सभी बैंकों को जीएसटी रिफंड पर आसान ऋण देने को कहें ताकि निर्यातक गंभीर वित्तीय संकट से बाहर आ सकें।
 
निर्यातकों ने जीएसटी परिषद से आग्रह किया है कि जुलाई से अक्टूबर के बीच निर्यात उत्पादों पर इनपुट टैक्स का रिफंड जल्दी से जल्दी किया जाए और अगर इसके लिए व्यवस्था तैयार नहीं है तो फिर निर्यातकों के दावों के आधार पर रिफंड का भुगतान किया जाए। इसके लिए सत्यापन बाद में किया जा सकता है। टीईए के अध्यक्ष राजा षणमुगम ने कहा कि लोग अब व्यवस्था के आदी हो रहे हैं। पिछले तीन महीनों के दौरान जब वैश्विक मांग बढ़ रही थी तो निर्यातक कर से जुड़े भ्रम के कारण इसका फायदा नहीं उठा सके। षडमुगम ने कहा, 'अब हमारे पास कोई विकल्प नहीं है लेकिन जीएसटी ने दूसरे देशों की तुलना में हमारे उत्पादों को महंगा बना दिया है।' उन्होंने कहा कि सितंबर में निर्यात में जो बढ़ोतरी हुई थी वह मौजूदा माहौल में स्थायी नहीं है। एक अन्य निर्यातक ने षडमुगम की बात से सहमति जताते हुए कहा कि जब तक भारत यूरोपीय देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता है तब तक निर्यातकों की स्थिति खराब रहेगी। प्रतिस्पद्र्घी देशों के पास शुल्क का फायदा है जबकि भारत के पास ऐसी लाभप्रद स्थिति नहीं है।
Keyword: redymade, textiles,,
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