बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी से निर्यातकों की बढ़ती मुश्किलें
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जीएसटी से निर्यातकों की बढ़ती मुश्किलें

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 11 16, 2017

गहराता संकट

जीएसटी के तहत रिफंड नहीं मिलने से एमएसएमई को नकदी का संकट
रोजगार मुहैया कराने वाले विभिन्न क्षेत्रों में देखी जा रही है तेज गिरावट
अक्टूबर महीने में पहली बार निर्यात में 1.12 फीसदी की देखी गई गिरावट
पहले लगातार 13 महीने निर्यात में दिखी वृद्धि, सितंबर में 25 फीसदी वृद्धि

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत किए गए करों के भुगतान पर निर्यातकों को अभी रिफंड नहीं मिला है और इन निर्यातकों का आरोप है कि इसकी वजह से ही इस क्षेत्र में गिरावट देखी जा रही है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता कहते हैं, 'बिना रिफंड मिले लगातार चार महीने तक जीएसटी का भुगतान करने के बाद लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। ऐसे में तत्काल ऐसे उपाय करने की जरूरत है जिससे निर्यात में आगे गिरावट न हो। सुधारात्मक उपाय न करने की स्थिति में नवंबर में हालात और गंभीर हो सकते हैं।'

लगातार 13 महीने तक लगातार वृद्धि बरकरार रहने और सितंबर में 25 फीसदी से ज्यादा वृद्धि दर्ज करने के बाद अक्टूबर में पहली बार देश के निर्यात में 1.12 फीसदी तक की गिरावट आई। अब तक निर्यातकों को कर से छूट दी गई थी लेकिन नए कराधान के तहत निर्यातकों को संभावित मुनाफे पर पहले कर का भुगतान करना है और फिर रिफंड के लिए आवेदन करना है जो रिफंड बाद में मिलता है। 

गुप्ता का कहना है कि रोजगार मुहैया कराने वाले प्रमुख क्षेत्रों मसलन, चमड़ा और चमड़ा उत्पाद, हीरे और आभूषण, रेडिमेड परिधान आदि के उत्पादन में तेज गिरावट देखी गई है। इसके अलावा छोटे क्षेत्रों में अस्थिरता बनी रही मसलन हस्तशिल्प और कालीन जो दर और कीमतों के लिहाज से ज्यादा प्रभावित हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि नतीजतन हस्तशिल्प निर्यात संवद्र्धन परिषद इस क्षेत्र के लिए एक वित्तीय पैकेज के लिए प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया में है। 

इसकी प्रमुख वजह रिफंड की प्रक्रिया है जिसमें इस वजह से देरी हो रही है क्योंकि सरकार ने रिफंड दस्तावेज दाखिल करने की तारीख को बढ़ाया है। इंजीनियरिंग निर्यात संवद्र्धन परिषद (ईईपीसी) का कहना है कि जीएसटीआर 1, जीएसटीआर 2, जीएसटीआर 3 के लिए आवेदन दाखिल करने की तारीख बढ़ाकर क्रमश: 10 जुलाई, 31 अक्टूबर और 10 नवंबर कर दी गई है। ईईपीसी का कहना है कि तारीख में विस्तार का अर्थ यह हुआ कि जुलाई का रिफंड नवंबर के तीसरे हफ्ते से पहले उपलब्ध नहीं हो सकता है। इसी तरह अगस्त महीने का निर्यात रिफंड दिसंबर तक मिलने की उम्मीद है और सितंबर रिफंड में विभिन्न चरणों वाला असर दिखने की उम्मीद है पिछले हफ्ते गुवाहाटी में हुई आखिरी जीएसटी परिषद की बैठक में परिषद ने जीएसटीआर 3बी सरलीकृत फॉर्म का विस्तार मार्च 2018 तक करने का फैसला किया। 

निर्यातकों का आरोप है कि अक्टूबर में जीएसटी परिषद द्वारा स्वीकृत उपायों का क्रियान्वयन बेहद धीमा रहा है। इनमें सरकार द्वारा अक्टूबर के बाद तक संशोधित दरों के जरिये शुल्क वापसी योजना और जीएसटी दस्तावेजों को दाखिल करने की प्रक्रिया सरल बनाना शामिल है। निर्यातकों का आरोप है कि रिटर्न दाखिल करने में आई मुश्किलें तो बनी ही रहीं।
Keyword: export, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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